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संक्रमण के बाद भी न बरतें लापरवाही, री इंफेक्शन का खतरा बरकरार

Wed, 19 Jan 2022 02:15 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 02:15 AM IST
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Do not be careless even after infection, risk of re-infection remains
चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर के दौरान वे लोग भी तेजी से संक्रमित हो रहे हैं जो इससे पहले भी वायरस की चपेट में आ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के वेरिएंट में लगातार हो रहे बदलाव के कारण ऐसा संभव हो रहा है। इसलिए जरूरी है कि संक्रमण से बचाव के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया जाए। इसके लिए अपने खानपान के साथ ही रहन सहन में महत्वपूर्ण बदलाव करने जरूरी है।
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पीजीआई में कोरोना टीका के ट्रायल की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर व सामुदायिक चिकित्सा विभाग की डॉ. मधु गुप्ता ने बताया कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि एक बार संक्रमित हो जाने के बाद उनके शरीर में एंटीबॉडी उत्पन्न होने से वे आगे संक्रमित नहीं होंगे, यह सही नहीं है। क्योंकि पूर्व में संक्रमित होने के दौरान उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो चुकी है। ऐसे में पुन: संक्रमित होने यानी री इंफेक्शन का खतरा बरकरार रहेगा। इसके साथ ही कोरोना वायरस के अलावा डेल्टा, डेल्टा प्लस और ओमिक्रॉन जैसे वेरिएंट का मिलना भी ऐसी स्थिति को उत्पन्न कर रहा है। इसलिए जरूरी है कि जो पूर्व में संक्रमित हो चुके हैं वे ज्यादा एहतियात बरतें। वहीं, जिन्होंने टीके की दोनों खुराक नहीं लगवाई है वह संक्रमित होने के तीन महीने के बाद टीका जरूर लगवाएं। ठीक वैसे ही बूस्टर डोज की प्रक्रिया भी संक्रमित होने के तीन महीने के बाद अनिवार्य रूप से पूरी करनी जरूरी है, ताकि हमारे शरीर में वायरस से बचाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिल सके। जो व्यक्ति संक्रमित नहीं है वे टीके की दोनों खुराक के साथ ही मानक के अनुसार बूस्टर डोज भी अनिवार्य रूप से लगवाना सुनिश्चित करें।
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इनसेट-
क्या करें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए
- सुबह 40 से 60 मिनट तक शारीरिक गतिविधियां जरूर करें।
- 15 से 20 मिनट योग करें। इसमें आसन, अनुलोम विलोम, कपालभाति और ध्यान जरूर शामिल हों।
- 10 से 15 मिनट योगासन करें। इसमें अनुलोम-विलोम, कपालभाति और ध्यान जरूर शामिल हों।
- काढ़ा लेना फायदेमंद साबित होगा।
इनसेट-
कितना लें काढ़ा
एक दिन में 30 से 40 एमएल से ज्यादा नहीं।
पानी: 60 से 70 एमएल (1 कप), तुलसी के पत्ते: 3, लौंग: 1, काली मिर्च: 1 दालचीनी: एक चुटकी पाउडर, अदरक, पसन्द के अनुसार गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है।
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-अगर लौंग, दालचीनी और काली मिर्च ले रहे हैं तो मुलेठी कम कर दें। इन तीनों की जगह मुलेठी लेना चाहते हैं तो एक बार किसी वैद्य से जरूर बात कर लें। काढ़ा हर शख्स की परेशानी और उसकी जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।

नोट- ये जानकारी आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजीव कपिला ने दी।
इनसेट-
इनका करें सेवन
विटामिन सी, बी और जिंक वाली चीजें, जैसे- अमरूद, संतरे या मौसमी, टमाटर । इन्हें हर दिन खा सकते हैं। इनसे विटामिन सी मिल जाएगा। इनके अलावा हमारे भोजन में साग सब्जी या फल 4 अलग-अलग रंगों के हों तो शरीर की जरूरी मिनरल या विटामिन की जरूरत पूरी हो जाती है। जैसे- लाल : टमाटर, हरा: अमरूद, मौसमी, पालक, लौकी आदि, पीला: पपीता, संतरा आदि। जिंक के लिए: नट्स (3 से 4 बादाम या 1 मुट्ठी रोस्टेड मूंगफली या एक अखरोट लिया जा सकता है।
नोट- ये जानकारी पीजीआई की आहार विशेषज्ञ डॉ. पूनम खन्ना ने दी।
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