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नगर निगम चुनावः टिकट आवेदन के साथ शपथ पत्र पर कांग्रेस में घमासान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 10 Oct 2016 08:11 PM IST
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नगर निगम चुनाव के लिए टिकट के आवेदन के साथ शपथ पत्र लेने के फरमान से कांग्रेसी नेताओं में घमासान मच गया है। तिवारी गुट खुलकर इसके विरोध में आ गया है, जबकि छाबड़ा गुट के कुछ वरिष्ठ नेता शपथ पत्र लेने का समर्थन कर रहे हैं।
तिवारी गुट के सीनियर नेता चंद्रमुखी शर्मा का कहना है कि जिन नेताओं को 25 से 30 साल पार्टी में काम करते हो गया है उनसे शपथ पत्र मांग कर उनके साख पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शपथ पत्र सिर्फ सरकार और कोर्ट में ही दिए जा सकते हैं।
शर्मा का कहना है कि पिछले दो साल में जो पार्षद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं असल में वह असली कांग्रेसी थे ही नहीं। राज बाला मलिक को नगर निगम चुनाव से चंद दिन पहले ही टिकट दिया गया, जबकि सतीश कैंथ और सतप्रकाश अग्रवाल सिर्फ बंसल के घर तक ही सीमित थे।
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तिवारी गुट के सीनियर नेता चंद्रमुखी शर्मा का कहना है कि जिन नेताओं को 25 से 30 साल पार्टी में काम करते हो गया है उनसे शपथ पत्र मांग कर उनके साख पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शपथ पत्र सिर्फ सरकार और कोर्ट में ही दिए जा सकते हैं।
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शर्मा का कहना है कि पिछले दो साल में जो पार्षद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं असल में वह असली कांग्रेसी थे ही नहीं। राज बाला मलिक को नगर निगम चुनाव से चंद दिन पहले ही टिकट दिया गया, जबकि सतीश कैंथ और सतप्रकाश अग्रवाल सिर्फ बंसल के घर तक ही सीमित थे।
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प्रदीप छाबड़ा ने मामले में कहीं बड़ी बात
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शर्मा का कहना है कि अगर वह पार्टी छोड़कर गए हैं तो यह उस समय के नेतृत्व (बंसल) की असफलता है, जिन्होंने ऐसे लोगों को टिकट दिए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे पार्षदों का पार्टी में कोई वजूद हीं नहीं था। शर्मा का कहना है कि पार्टी के पास कोई लीगल अथारिटी नहीं है जो कि शपथ पत्र लेने के बावजूद अगर कोई पार्टी छोड़ता है तो वह उसके खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है।
शर्मा का कहना है कि शपथ पत्र शायद इसलिए लिया जा रहा है कि कि उन्हें लगता है कि वह ऐसे लोगों को टिकट देने जा रही है जो चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ सकते हैं। इसलिए पार्टी अभी से ऐसे नेताओं के प्रति सतर्क रहे। पूर्व मेयर रविंदर सिंह पाली का कहना है कि शपथ पत्र लेना कोई समझदारी नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी में कई नेता ऐसे है जिन्होंने अपना राजनीतिक कॅरियर पवन बंसल के समय और छाबड़ा से कई साल पहले शुरू किया था।
ऐसे लोगों को आवेदन के समय शपथ पत्र लेना उनकी तौहीन करना है। कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि बैठक में टिकट के लिए आवेदन के साथ शपथ पत्र लेने का भी प्रस्ताव आया है, जिस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। प्रदेश कार्यकारिणी के अधिकतर पदाधिकारी इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि 14 अक्तूबर को वार्डों का ड्रा निकाला जाएगा। इसके बाद शपथ पत्र के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
शर्मा का कहना है कि शपथ पत्र शायद इसलिए लिया जा रहा है कि कि उन्हें लगता है कि वह ऐसे लोगों को टिकट देने जा रही है जो चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ सकते हैं। इसलिए पार्टी अभी से ऐसे नेताओं के प्रति सतर्क रहे। पूर्व मेयर रविंदर सिंह पाली का कहना है कि शपथ पत्र लेना कोई समझदारी नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी में कई नेता ऐसे है जिन्होंने अपना राजनीतिक कॅरियर पवन बंसल के समय और छाबड़ा से कई साल पहले शुरू किया था।
ऐसे लोगों को आवेदन के समय शपथ पत्र लेना उनकी तौहीन करना है। कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि बैठक में टिकट के लिए आवेदन के साथ शपथ पत्र लेने का भी प्रस्ताव आया है, जिस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। प्रदेश कार्यकारिणी के अधिकतर पदाधिकारी इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि 14 अक्तूबर को वार्डों का ड्रा निकाला जाएगा। इसके बाद शपथ पत्र के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।