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'संत गिरफ्तार करते तो खून खराबा हो जाता'

Tue, 11 Nov 2014 05:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Nov 2014 05:30 PM IST
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DGP told to high court on arrest issue of sant rampal

करौंथा आश्रम के मुखी संत रामपाल के आगे हरियाणा सरकार बौनी पड़ गई और उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। डीजीपी एसएन वशिष्ठ ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर कहा कि गिरफ्तारी का प्रयास किया गया था, लेकिन डेरे में बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे मौजूद थे और पुलिस प्रबंध नाकाफी था।

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जस्टिस एम. जियापाल की डिवीजन बेंच ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए संत रामपाल के दोबारा वारंट जारी किए हैं और सरकार को निर्देश दिया है कि 17 नवंबर तक रामपाल को हाईकोर्ट पेश किया जाए। डीजीपी ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के लिए डेरे में गई पुलिस को एक श्रद्धालू ने बताया कि रामपाल बीमार हैं, लिहाजा डीसी हिसार ने सरकारी डाक्टरों का बोर्ड बनाकर तथ्यों की पुष्टि करवाई। पाया गया कि रामपाल को आराम की सख्त जरूरत है। वशिष्ठ ने वारंट लागू नहीं कराने पर खेद प्रगट करते हुए गिरफ्तारी के लिए और समय भी मांगा।
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एमिक्स क्यूरे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने पैरवी के दौरान आरोप लगाया कि सरकार संत रामपाल को बचाने का प्रयास कर रही है। वारंट जारी होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने डेरे में समर्थक एकत्र किए और ऊपर से उपायुक्त हिसार ने मेडिकल बोर्ड गठित कर रामपाल के बचाव के लिए रास्ता बना दिया।

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सरकार व रामपाल के वकील को नोटिस

DGP told to high court on arrest issue of sant rampal

एडवोकेट गुप्ता ने बेंच से यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट के आदेश को ऐसे ही अनदेखा करने की इजाजत दी गई तो हर कोई अदालत का मजाक बनाकर रख देगा।

पैरवी के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और दोपहर को फैसला सुनाया कि यदि सरकार चाहे तो अपराधी को बंकर से भी खींच कर ला सकती है। संत रामपाल के दोबारा वारंट जारी करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि 17 नवंबर को रामपाल को हाईकोर्ट में पेश किया जाए। यदि सरकार विफल रहती है तो डीजीपी व गृह सचिव निजी तौर पर पेश होकर जवाब दें।

हालांकि एमिक्स क्यूरे ने पांच नवंबर के वारंट लागू नहीं कराने के कारण डीजीपी व गृह सचिव पर अवमानना कार्रवाई करने की पैरवी की थी।
रामपाल की पेशी के साथ ही राम कंवर ढाका व डाक्टर ओपी हुड्डा को अवमानना की हर सुनवाई पर हाईकोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। राम कंवर ढाका को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर पेश किया था और हाईकोर्ट ने सीजेएम चंडीगढ़ की अदालत में पेश होकर उसे जमानत लेने की छूट दे दी।

बेंच ने सरकार व रामपाल के वकील को नोटिस थमाते हुए यह भी पूछा है कि कत्ल केस में रामपाल की जमानत क्यों न रद्द कर दी जाए। सोमवार को सुनवाई के दौरान डीजीपी व गृह सचिव के अलावा हरियाणा पुलिस के कई उच्चाधिकारी मौजूद रहे। चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारियों ने सुरक्षा प्रबंधों को खुद संभाला। बेंच ने कहा है कि सुरक्षा इंतजाम अगली सुनवाई पर भी पहले जैसे ही रहेंगे।

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