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Chandigarh News: मेयर के इन्कार के बावजूद संपत्ति कर बढ़ाने का आया प्रस्ताव, पार्षदों ने किया खारिज, अब प्रशासन बढ़ाएगा

Sat, 08 Feb 2025 01:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Feb 2025 01:54 AM IST
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Despite mayor's refusal, proposal to increase property tax came, councilors rejected, now administration will increase it
चंडीगढ़। नगर निगम सदन की बैठक में संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) बढ़ाने के एक टेबल एजेंडे को लेकर हंगामा हो गया। मेयर हरप्रीत कौर बबला के इन्कार करने के बावजूद बैठक में टेबल एजेंडा आया, जिसे देखकर वह खुद हैरान रह गईं। इसका सभी पार्षदों ने भी जमकर विरोध किया। अंत में प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया लेकिन आयुक्त अमित कुमार ने आपत्ति जताई और कहा कि वह इस फैसले से सहमत नहीं हैं।
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हाल ही में हुई एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने नगर निगम को संपत्ति कर बढ़ाने का सुझाव दिया था। निगम के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ में मोहाली और पंचकूला से काफी कम संपत्ति कर है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। आखिरी बार साल 2020 में संपत्ति कर बढ़ाए गए थे, इसलिए बैठक के दौरान वाणिज्यिक संपत्तियों पर कर की दर को 3 से बढ़ाकर 12 फीसदी करने और इसी अनुपात में आवासीय संपत्तियों के कर में भी वृद्धि करने का प्रस्ताव लाया गया। जब एजेंडा पार्षदों के पास पहुंचा वह नाराज हो गए। जब टेबल एजेंडा का नंबर आया तो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षद मेयर के पास पहुंच गए। कहा कि उनकी पहली बैठक में ही लोगों पर बोझ डालने का एजेंडा क्यों लाया गया। मेयर बबला ने कहा कि उन्होंने इसे वापस भेज दिया था। इसके बावजूद लाया गया है, इसलिए वह इसे खारिज करती हैं। हालांकि, पार्षद फिर भी शांत नहीं हुए। सीनियर डिप्टी मेयर ने यहां तक कह दिया कि उनके मनाही के बाद भी एजेंडा आया है, इसका अर्थ है कि मेयर की नहीं चल रही है। हालांकि, बबला ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पार्षद बैठेंगे और चर्चा करेंगे।
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साल के अंत तक निगम 500 करोड़ के घाटे में होगाः अमित कुमार
एजेंडा के रद्द होने पर आयुक्त ने कहा कि उनकी टिप्पणी भी नोट की जाए। वह इस फैसले से सहमत नहीं हैं। ये प्रस्ताव निगम के राजस्व को बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। अगर कमाई नहीं बढ़ाई तो निगम इस साल के अंत तक 500 करोड़ के घाटे में होगा। कहा कि निगम के पास फरवरी और मार्च में वेतन देने के लिए पैसा नहीं है। जनवरी माह की सैलरी भी लेट हुई है। प्रशासन से कुछ पैसा बढ़कर मिला है। ऐसे में खुद भी कमाई बढ़ानी होगी। यह प्रस्ताव काफी विचार विमर्श के बाद लाया गया था।
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प्रशासन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर बढ़ा सकता है संपत्ति कर
निगम ने भले प्रस्ताव रद्द कर दिया है लेकिन अब प्रशासन अपनी शक्तियों का प्रयोग करके संपत्ति कर को बढ़ा सकता है। नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व की बेहद जरूरत है। अधिकारियों का मानना है कि जो संपत्ति कर बढ़ाने का उन्होंने प्रस्ताव रखा है, उससे 50 से 60 करोड रुपये अतिरिक्त आमदनी होगी। निगम अब प्रशासन से संपत्ति कर बढ़ाने का आग्रह करेगा। जिसके बाद प्रशासन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर संपत्ति कर को बढ़ा सकता है। ऐसा पहले भी हुआ है। हर बार पानी-सीवरेज सेस को बढ़ाने का विरोध किया जाता है लेकिन प्रशासन की ओर से उसे अपनी शक्तियों का प्रयोग करके लागू कर दिया जाता।

मेयर की इजाजत के बिना कोई एजेंडा नहीं आ सकताः सीनियर डिप्टी मेयर
सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने कहा कि मेयर की पहली सदन की बैठक में उम्मीद थी कि वह शहर को कोई नया तोहफा देंगी लेकिन प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने का एजेंडा लाकर उन्होंने लोगों का विश्वास तोड़ दिया। अगर प्रॉपर्टी टैक्स का एजेंडा मेयर ने नहीं लाया तो एजेंडा कैसे आया, क्योंकि कोई भी एजेंडा मेयर के साइन के बिना नहीं आ सकता। मेयर को सब मालूम था। यह लोगों को गुमराह करने की बात है।


संपत्ति कर बढ़ाने के पीछे तर्क ---
1. संपत्ति कर शहर के जीडीपी का एक फीसदी होना चाहिए। चंडीगढ़ की जीडीपी 65,000 करोड़ है। इस अनुसार 500 करोड़ से अधिक कर होना चाहिए लेकिन है सिर्फ 45 करोड़।
2. मोहाली की 2.34 लाख की आबादी से 40 करोड़ का टैक्स आता है लेकिन चंडीगढ़ की 12.50 लाख की आबादी से सिर्फ 45 करोड़
3. संपत्ति कर की दरों में 2018 और 2020 में संशोधन किया गया था, लेकिन वार्षिक दर में कोई बदलाव नहीं हुआ
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