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पंजाब डीजीपी की नियुक्ति से संबधित फैसला 21 जनवरी तक सुरक्षित
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चंडीगढ़। पंजाब पुलिस प्रमुख के पद पर नियुक्ति को लेकर अनदेखा किए जाने से आहत सीनियर आईपीएस अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा और सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर बुधवार को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने दिनकर गुप्ता की नियुक्ति संबंधी फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। दोनों ने ट्रिब्यूनल में दायर की याचिकाओं में खुद को नवनियुक्त डीजीपी दिनकर गुप्ता के मुकाबले अधिक सीनियर और डीजीपी पद के लिए सबसे उपयुक्त बताया था।
मुस्तफा ने याचिका में कहा था कि डीजीपी पद के लिए घोषित अफसरों के पैनल पर विचार के समय उन्हें गलत तरीके से अनदेखा किया है। उन्होंने दिनकर गुप्ता की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर कैट को बताया है कि प्रदेश के डीजीपी पद के लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा निर्धारित किए तीनों मानदंडों को वह पूरा करते हैं। उन्हें इसलिए अनदेखा कर दिया, क्योंकि इस मामले में यूपीएससी को राज्य सरकार ने अंधेरे में रखा, ताकि वह इस पद पर निजी हित साधते हुए अपने पसंदीदा अफसर को तैनात कर सकें। मुस्तफा ने कहा था कि यूपीएससी द्वारा भेजे चार डीजीपी में से वह सबसे सीनियर हैं। उनका आरोप था कि राज्य सरकार ने सितंबर, 2018 में पंजाब पुलिस एक्ट के एक अनुच्छेद में संशोधन करके, राज्य स्तर पर गठित एक कमेटी को डीजीपी पद के लिए पैनल बनाने का अधिकार दे दिया। इस संशोधन का उद्देश्य केवल इतना था कि राज्य सरकार डीजीपी की नियुक्ति पर अपना नियंत्रण रखना चाहती है।
मुस्तफा ने यह भी आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार ने यूपीएससी के सामने कुछ अधिकारियों के बारे में तथ्यों को छिपाया। मुस्तफा ने कैट से अपील की थी कि दिनकर गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किए जाने के 7 फरवरी, 2019 के आदेश को रद्द किया जाए।
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मुस्तफा ने याचिका में कहा था कि डीजीपी पद के लिए घोषित अफसरों के पैनल पर विचार के समय उन्हें गलत तरीके से अनदेखा किया है। उन्होंने दिनकर गुप्ता की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर कैट को बताया है कि प्रदेश के डीजीपी पद के लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा निर्धारित किए तीनों मानदंडों को वह पूरा करते हैं। उन्हें इसलिए अनदेखा कर दिया, क्योंकि इस मामले में यूपीएससी को राज्य सरकार ने अंधेरे में रखा, ताकि वह इस पद पर निजी हित साधते हुए अपने पसंदीदा अफसर को तैनात कर सकें। मुस्तफा ने कहा था कि यूपीएससी द्वारा भेजे चार डीजीपी में से वह सबसे सीनियर हैं। उनका आरोप था कि राज्य सरकार ने सितंबर, 2018 में पंजाब पुलिस एक्ट के एक अनुच्छेद में संशोधन करके, राज्य स्तर पर गठित एक कमेटी को डीजीपी पद के लिए पैनल बनाने का अधिकार दे दिया। इस संशोधन का उद्देश्य केवल इतना था कि राज्य सरकार डीजीपी की नियुक्ति पर अपना नियंत्रण रखना चाहती है।
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मुस्तफा ने यह भी आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार ने यूपीएससी के सामने कुछ अधिकारियों के बारे में तथ्यों को छिपाया। मुस्तफा ने कैट से अपील की थी कि दिनकर गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किए जाने के 7 फरवरी, 2019 के आदेश को रद्द किया जाए।
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