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बेटियां बेटों से कम नहीं... सुप्रीम कोर्ट का फैसला देगा आत्मबल, अब वह भी सम्मान से जी सकेंगी
Thu, 13 Aug 2020 01:47 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 01:47 PM IST
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पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की लोगों ने तारीफ की है। लोगों का कहना है कि इससे महिलाओं को आत्मबल मिलेगा। महिला सशक्तिकरण के लिए यह एक मजबूत कदम है। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि कोर्ट के आदेश अथवा कानून का पालन सही दिशा में हो तो ही यह फायदेमंद है। कई बार लोग अधिकारों का दुरुपयोग करने लगते हैं। इससे रिश्तों में खटास आ जाती है।
इसलिए जरूरी है कि संपत्ति के मामले में दिए गए फैसले का लोग सदुपयोग करें। ताकि कोई महिला अपने अधिकारों से वंचित न रह सके। साथ ही तभी इस कानून की सार्थकता सामने आएगी। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि लगातार वृद्धाश्रम में बढ़ती संख्या पर भी इस फैसले के बाद रोक लगेगी। अब अपनी मां, बेटी या अन्य किसी महिला को घर से बाहर निकालने से पहले लोग 10 बार सोचेंगे।
बेटियां अब कभी पराई नहीं होंगी
न्यायालय का फैसला बड़ा सराहनीय कदम है। यह नारी सशक्तिकरण को मजबूत बनाएगा। इससे महिलाओं के अधिकार और आर्थिक सहयोग में मदद होगी। शादी के बाद जो बेटियां पराई हो जाती थीं, ससुराल में भी पराई बुलाई जाती थीं, उनके साथ अब ऐसा नहीं हो सकेगा। वह दोनों ही जगह सम्मान की हकदार होंगी।
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- रजनी बजाज, समाज सेविका
सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है।
‘हमारी बेटियां, बेटों से कम हैं क्या’यह कथन आज पूरा हुआ है। जिन बेटियों को अब तक पराया समझा जाता था। अब उनका अपने पिता की संपत्ति में पूर्ण अधिकार होगा। इससे वह अपने आप को मजबूत महसूस करेंगी।
- शीतल नेगी, समाज सेविका
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इसलिए जरूरी है कि संपत्ति के मामले में दिए गए फैसले का लोग सदुपयोग करें। ताकि कोई महिला अपने अधिकारों से वंचित न रह सके। साथ ही तभी इस कानून की सार्थकता सामने आएगी। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि लगातार वृद्धाश्रम में बढ़ती संख्या पर भी इस फैसले के बाद रोक लगेगी। अब अपनी मां, बेटी या अन्य किसी महिला को घर से बाहर निकालने से पहले लोग 10 बार सोचेंगे।
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बेटियां अब कभी पराई नहीं होंगी
न्यायालय का फैसला बड़ा सराहनीय कदम है। यह नारी सशक्तिकरण को मजबूत बनाएगा। इससे महिलाओं के अधिकार और आर्थिक सहयोग में मदद होगी। शादी के बाद जो बेटियां पराई हो जाती थीं, ससुराल में भी पराई बुलाई जाती थीं, उनके साथ अब ऐसा नहीं हो सकेगा। वह दोनों ही जगह सम्मान की हकदार होंगी।
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- रजनी बजाज, समाज सेविका
सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है।
‘हमारी बेटियां, बेटों से कम हैं क्या’यह कथन आज पूरा हुआ है। जिन बेटियों को अब तक पराया समझा जाता था। अब उनका अपने पिता की संपत्ति में पूर्ण अधिकार होगा। इससे वह अपने आप को मजबूत महसूस करेंगी।
- शीतल नेगी, समाज सेविका
बस फैसले का दुरुपयोग न हो
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला प्रशंसनीय है, परंतु हम इसके दूरगामी नतीजों पर गौर करें तो इस फैसले का दुरुपयोग होने की भी आशंका है। 2005 से पहले जो लोग आपसी सहमति से संपत्ति बेच चुके हैं, वर्तमान में आपसी संबंध खराब होने व कलह बढ़ने की आशंका है।
- डॉ. अनीश गर्ग, प्रधान, नेचर क्योर सोसायटी
आपसी संबंध खराब होने की आशंका
बेटियों के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समाज में कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। इस फैसले का उपयोग सही दिशा में हुआ तो ठीक, अन्यथा बेटियों से उनके पिता और भाई के आपसी संबंध भी खराब हो सकते हैं।
- प्रभाष कुमार, आयकर एवं जीएसटी सलाहकार
बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं होना चाहिए
यह अच्छा फैसला है। बेटा और बेटी में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। पिता की संपत्ति में जितना हक बेटे का है, उतना ही बेटी का भी होना चाहिए। क्योंकि बेटियों को पराया धन मानकर शादी के बाद विदा कर दिया जाता है, ऐसे में उनके लिए मुश्किल होती थी। वह दोनों जगह पराई रहती थी।
- ज्योति तिवारी, समाज सेविका
बेटियों को समानता का अधिकार मिलना चाहिए
यह सही बात है कि बेटियों को समानता के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आखिर एक पिता से जन्मी संतान के अधिकार अलग-अलग कैसे हो सकते हैं। पिता की संपत्ति में अधिकार मिलने से बेटी की हिम्मत को भी मजबूती मिलेगी।
- रेनू नागर, गृहणी
- डॉ. अनीश गर्ग, प्रधान, नेचर क्योर सोसायटी
आपसी संबंध खराब होने की आशंका
बेटियों के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समाज में कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। इस फैसले का उपयोग सही दिशा में हुआ तो ठीक, अन्यथा बेटियों से उनके पिता और भाई के आपसी संबंध भी खराब हो सकते हैं।
- प्रभाष कुमार, आयकर एवं जीएसटी सलाहकार
बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं होना चाहिए
यह अच्छा फैसला है। बेटा और बेटी में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। पिता की संपत्ति में जितना हक बेटे का है, उतना ही बेटी का भी होना चाहिए। क्योंकि बेटियों को पराया धन मानकर शादी के बाद विदा कर दिया जाता है, ऐसे में उनके लिए मुश्किल होती थी। वह दोनों जगह पराई रहती थी।
- ज्योति तिवारी, समाज सेविका
बेटियों को समानता का अधिकार मिलना चाहिए
यह सही बात है कि बेटियों को समानता के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आखिर एक पिता से जन्मी संतान के अधिकार अलग-अलग कैसे हो सकते हैं। पिता की संपत्ति में अधिकार मिलने से बेटी की हिम्मत को भी मजबूती मिलेगी।
- रेनू नागर, गृहणी
सुप्रीम कोर्ट का अच्छा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 2005 से पहले जन्मी बेटी को संपत्ति में अधिकार देकर अच्छा कदम उठाया है। यह कदम बेटियों को समानता का अधिकार देने में अच्छा साबित होगा। जन्म से ही बेटियों को यह अधिकार है, लेकिन उसके बावजूद भी वह इस अधिकार से वंचित रह जाती हैं।
- विपिन, अधिवक्ता, जिला अदालत
हर महिला आज खुद को किसी न किसी रूप में साबित कर रही है। इसलिए बेटे के समान वह भी अपने पिता की संपत्ति की बराबर हकदार है। यह निर्णय महिलाओं को मानसिक रूप से भी बढ़ावा देगा। बेटे की तरह अब बेटी भी संपत्ति को संभालने में सक्षम है।
- वनीत कुमार, अधिवक्ता, जिला अदालत
बेटियों को नई हिम्मत देेगा
हर प्रकार से सक्षम होने के बाद भी बेटियों को इस अधिकार से वंचित रखा जाता है। इसलिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बेटियों को नई हिम्मत प्रदान करेगा। बेटे को संपत्ति मिलने पर उसका भविष्य तो सुरक्षित हो जाता है लेकिन बेटियां शादी के बाद भी सुरक्षित नहीं हो पातीं।
- सुप्रीत कौर बराड़, अधिवक्ता, जिला अदालत
बेटियां माता पिता का ज्यादा सम्मान करती हैं
अदालत के फैसले का हम स्वागत करते हैं। आज के समय में भेदभाव करना सही नहीं है। बेटियां अपनी शादी होने के बाद भी माता-पिता से जुड़कर उनकी सेवा करती हैं। इस फैसले से उनके साथ लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। माता पिता के लिए बेटा बेटी समान होने चाहिए।
- गीतांजली वाधवा, अधिवक्ता, जिला अदालत
यह ऐतिहासिक फैसला है। शायद यह फैसला पहले आता तो वृद्धाश्रम की परंपरा ही न शुरू होती। अब बेटी को लेकर उसके माता-पिता की चिंता खत्म हो गई। जरूरत है इस फैसले को सही से लागू करने की और इसका सही उपयोग करने की।
- शिप्रा बंसल, मनोनीत पार्षद
- विपिन, अधिवक्ता, जिला अदालत
हर महिला आज खुद को किसी न किसी रूप में साबित कर रही है। इसलिए बेटे के समान वह भी अपने पिता की संपत्ति की बराबर हकदार है। यह निर्णय महिलाओं को मानसिक रूप से भी बढ़ावा देगा। बेटे की तरह अब बेटी भी संपत्ति को संभालने में सक्षम है।
- वनीत कुमार, अधिवक्ता, जिला अदालत
बेटियों को नई हिम्मत देेगा
हर प्रकार से सक्षम होने के बाद भी बेटियों को इस अधिकार से वंचित रखा जाता है। इसलिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बेटियों को नई हिम्मत प्रदान करेगा। बेटे को संपत्ति मिलने पर उसका भविष्य तो सुरक्षित हो जाता है लेकिन बेटियां शादी के बाद भी सुरक्षित नहीं हो पातीं।
- सुप्रीत कौर बराड़, अधिवक्ता, जिला अदालत
बेटियां माता पिता का ज्यादा सम्मान करती हैं
अदालत के फैसले का हम स्वागत करते हैं। आज के समय में भेदभाव करना सही नहीं है। बेटियां अपनी शादी होने के बाद भी माता-पिता से जुड़कर उनकी सेवा करती हैं। इस फैसले से उनके साथ लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। माता पिता के लिए बेटा बेटी समान होने चाहिए।
- गीतांजली वाधवा, अधिवक्ता, जिला अदालत
यह ऐतिहासिक फैसला है। शायद यह फैसला पहले आता तो वृद्धाश्रम की परंपरा ही न शुरू होती। अब बेटी को लेकर उसके माता-पिता की चिंता खत्म हो गई। जरूरत है इस फैसले को सही से लागू करने की और इसका सही उपयोग करने की।
- शिप्रा बंसल, मनोनीत पार्षद