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किसानों को दोहरा झटका: डीएपी खाद प्रति क्विंटल 300 रुपये महंगी, 800 रुपये में मिलने वाली पोटाश अब 1600 की मिलेगी
Mon, 25 Apr 2022 08:17 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 25 Apr 2022 08:17 PM IST
सार
डाई आमोनियम फास्फेट (डीएपी) के दामों में प्रति क्विंटल 300 रुपये की वृद्धि से पंजाब के किसानों पर 240 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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पंजाब का किसान
- फोटो : फाइल
विस्तार
पंजाब में किसानों को दोहरा झटका लगा है। डाई आमोनियम फास्फेट (डीएपी) खाद के साथ ही पोटाश के दामों में भी दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। अब किसानों को एक क्विंटल डीएपी खाद खरीदने के लिए 300 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं पोटाश की कीमत प्रति क्विंटल 800 से बढ़कर 1600 रुपये पहुंच गई है।
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पंजाब का किसान पहले से ही गर्मी की मार से परेशान है। अधिक गर्मी के कारण गेहूं का दाना 20 से 25 प्रतिशत सिकुड़ गया है। इससे किसानों को फसल का अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा है। गेहूं से हुए नुकसान की मार झेल रहे पंजाब के किसान को अब खादों के मूल्यों में हुई वृद्धि ने खासा परेशान कर दिया है।
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अभी तक डीएपी खाद के 50 किलो के बैग के लिए किसान 1200 रुपये मूल्य चुकाते थे। अब उन्हें प्रति बैग 150 रुपये अधिक 1350 रुपये चुकाने होंगे। प्रति क्विंटल की बात करें तो किसानों को डीएपी खाद के लिए 300 रुपये अधिक देने होंगे। डीएपी के बाद किसानों को पोटाश खाद के मूल्य में हुई दोगुनी वृद्धि ने हैरानी में डाल दिया है। पोटाश की खाद प्रति क्विंटल 800 से बढ़कर 1600 रुपये हो गई है, जिससे किसान काफी नाराज हैं। सूबे के किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में किसानों को राहत देने की मांग की है।
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240 करोड़ रुपये का पड़ेगा बोझ
डाई आमोनियम फास्फेट (डीएपी) के दामों में प्रति क्विंटल 300 रुपये की वृद्धि से पंजाब के किसानों पर 240 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। राज्य में एक अनुमान के मुताबिक आठ लाख टन से अधिक डीएपी खाद का उपयोग किया जाता है। इससे पहले ही उर्वरक पर सब्सिडी कम करने के केंद्र के फैसले से किसान परेशान हैं।
खाद के दामों में बेतहाशा वृद्धि किसानों पर दोहरी मार है। इस साल कम उपज के कारण किसानों की आय पर बहुत बुरा असर पड़ा है। अब तक केंद्र और राज्य की सरकारों से कोई राहत नहीं दी गई है। नतीजतन किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। - सुखदेव सिंह कोकरीकलां, किसान नेता।