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Chandigarh News: आरएलए, यूटी प्रशासन और पंजीकरण अधिकारी पर लगाया हर्जाना

Sun, 11 Aug 2024 02:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2024 02:55 AM IST
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Damages imposed on RLA, UT Administration and Registration Officer
चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता आयोग ने चंडीगढ़ प्रशासन के परिवहन विभाग, रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी और पंजीकरण व लाइसेंसिंग अधिकारी को नई अधिसूचना जारी करने से मात्र पांच मिनट पहले खरीदी गई कार से रोड टैक्स वसूलने के मामले में सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। उपभोक्ता आयोग ने तीनों को शिकायतकर्ता को हर्जाने के रूप में 1.42 लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार व केस में खर्च हुई राशि के रूप में 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।
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क्या था मामला...74 वर्षीय सेक्टर-43 निवासी पूरन सिंह भिंडर ने दिसंबर 2022 में हाइब्रिड कार खरीदनी चाही। उन्हें बताया गया कि कार की कुल कीमत 20 लाख पड़ेगी। इसमें सड़क किनारे सहायता, बुनियादी किट, विस्तारित वारंटी और बीमा शामिल होगा। इसके साथ कहा गया कि शहर में 20 लाख तक की हाइब्रिड कार पर कोई रोड टैक्स नहीं है। इसके साथ एक लाख रुपये की छूट पेश की गई। शिकायतकर्ता ने 11 हजार रुपये देकर कार बुक की। इसके बाद आरटीजीएस के माध्यम से 19.95 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया, जिसके बाद कंपनी ने 19.48 लाख रुपये का चालान जारी किया।
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हाइब्रिड कारों के पंजीकरण के लिए 8 दिसंबर 2023 को चंडीगढ़ प्रशासन के परिवहन विभाग, रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी और पंजीकरण व लाइसेंसिंग अधिकारी की ओर से नई सूचना की जारी की गई, जिसमें उल्लेख किया गया कि हाइब्रिड कारों पर सौ प्रतिशत रोड टैक्स देय होगा। यह सूचना दोपहर के 3.07 बजे जारी की गई लेकिन शिकायतकर्ता ने कार का पंजीकरण 3.02 मिनट पर करवा लिया था। परिवहन विभाग की ओर से अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र 3.07 बजे 300 रुपये की प्राप्ति के बाद जारी किया गया। इसकी शिकायत के बावजूद शिकायतकर्ता की सुनवाई नहीं हुई। वहीं, नई अधिसूचना के चलते शिकायतकर्ता से रोड टैक्स के रूप में 1.42 लाख रुपये लिए गए। इस मामले पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने चंडीगढ़ प्रशासन के परिवहन विभाग, रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी और पंजीकरण व लाइसेंसिंग अधिकारी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार देते शिकायतकर्ता से रोड टैक्स के रूप लिए गए 1.42 लाख रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार व केस में खर्च हुई राशि के रूप में 10 हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं।
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