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Chandigarh: चंडीगढ़ को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए पीजीआई-प्रशासन आएंगे साथ, जागरूकता रैली निकाली

Sun, 28 May 2023 09:34 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 28 May 2023 09:34 AM IST
सार

पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में विभाग के डॉक्टर सोनू गोयल ने बताया कि हुक्के का 45 मिनट का सेशन लेने वाला युवा एक बार में 50 सिगरेट के कश के बराबर तंबाकू ले लेते हैं। उन्हें इसका पता भी नहीं चलता।

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Cyclothon and Walkathon organized by Chandigarh PGI on occasion of Tobacco Prohibition Day
चंडीगढ़ में साइक्लोथान और वाकेथान का आयोजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को चंडीगढ़ पीजीआई की तरफ से साइक्लोथान और वाकेथान का आयोजन किया गया। जिसमें पीजीआई से सुखना लेक तक काफी संख्या में युवाओं ने भाग लेकर तंबाकू छोड़ने के लिए लोगों को जागरूक किया। 

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कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ को तंबाकू फ्री बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पीजीआई के साथ मिलकर काम करेगा। कार्यक्रम में पीजीआई, चंडीगढ़ और पंजाब स्वास्थ्य विभाग, आईएमए, पीयू, होमी भाभा कैंसर संस्थान के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ ने भाग लिया। 
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पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के डॉक्टर सोनू गोयल ने बताया कि हुक्के का 45 मिनट का सेशन लेने वाला युवा एक बार में 50 सिगरेट के कश के बराबर तंबाकू ले लेते हैं। उन्हें इसका पता भी नहीं चलता। फ्लेवर वाला हुक्का और भी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि फ्लेवर के चक्कर में युवा एक के बजाय दो से तीन सेशन तक ले लेते हैं। वहीं अगर इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर गौर किया जाए तो इसके दुष्प्रभाव को देखते हुए ही 2020 में इसे बैन कर दिया गया था। क्योंकि इसमें 95 प्रतिशत निकोटिन होता है। जबकि सामान्य सिगरेट में निकोटिन की मात्रा 1 से 2 प्रतिशत होती है। 

डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि तंबाकू को प्वॉइजन एक्ट के तहत जहर माना गया है। इसे चूहे मारने वाली दवा के सामान रखा गया है। फिर भी युवा ही नहीं हर वर्ग के लोग इसका सेवन कर रहे हैं। डॉ सोनू ने कहा कि तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए महीनों तक काउंसिलिंग की जाती है। इसे एक बार में नहीं छोड़ा जा सकता। धीरे-धीरे मात्रा कम करके इसकी लत को कम किया जाता है। डॉ. सोनू का कहना है कि तंबाकू ही नहीं कोई भी नशा छोड़ने के लिए सबसे पहले निर्णय लेना जरूरी है। उसके बाद किसी एक ऐसे अपने की तलाश कीजिए जिससे उसे निर्णय को साझा कर सकें। वे अपना घर या बाहर का व्यक्ति हो सकता है। 

तंबाकू छोड़ने के बाद ऐसे होता है सुधार 
- 24 घंटे में हार्ट रेट सामान्य होने लगता है।
- 7 दिन में रिस्पेरेटरी सिस्टम में सुधार होने लगता है। 
- 5 साल में हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। 
- 10 साल में फेफड़े सामान्य होने लगते हैं।

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