Operation Lotus: नेताओं के पुराने भाषणों से होगा आवाज का मिलान, विधायकों ने विजिलेंस को सौंपे मोबाइल
आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा भाजपा नेताओं पर पैसे की पेशकश करने का आरोप लगाया जा रहा है, इसे देखते हुए साइबर सेल ने मोबाइल कॉल में सुनाई दे रही आवाजों को भाजपा नेताओं की आवाजों से मिलान करना शुरू किया है।
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पंजाब के दस आप विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये का लालच देने और धमकाने के मामले में दर्ज शिकायत पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है। शिकायत करने वाले ज्यादातर आप विधायकों ने अपने वे मोबाइल विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दिए हैं जिनमें पैसे की पेशकश के कॉल आए थे। साइबर सेल भाजपा नेताओं के पुराने भाषणों से आवाज का मिलान कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, सियासी नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले भाषणों को रिकार्ड में रखा जाता है, जिससे उनकी आवाज भी पुलिस के रिकार्ड में दर्ज रहती है। विजिलेंस ब्यूरो के सूत्रों के अनुसार, आरंभिक जांच में आप विधायकों के मोबाइल में पैसे की पेशकश करने वाले और धमकाने वाले लोगों की आवाजें हर बार अलग-अलग हैं। दूसरी ओर, चूंकि आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा भाजपा नेताओं पर पैसे की पेशकश करने का आरोप लगाया जा रहा है, इसे देखते हुए साइबर सेल ने मोबाइल कॉल में सुनाई दे रही आवाजों को भाजपा नेताओं की आवाजों से मिलान करना शुरू किया है। इसके साथ ही, आप और अन्य सियासी दलों के उन नेताओं की आवाजों से भी मिलान की योजना बनाई गई है, जो संबंधित विधायकों के ज्यादा करीब हैं या उनसे ज्यादा बार मुलाकात करते रहे हैं।
टावर डंप की भी होगी जांच
इसके साथ ही, साइबर सेल ने विधायकों से संबंधित उन इलाकों से टावर डंप भी निकालने का फैसला किया है, जहां रहते हुए विधायकों को पैसों की पेशकश और धमकाने के कॉल रिसीव हुए हैं। टावर डंप में मिली कॉल डिटेल और कॉल रिकार्डिंग से यह भी साफ हो सकेगा कि आप विधायकों द्वारा जो शिकायत दी गई है, क्या काल रिकार्डिंग भी उसके अनुसार ही है या कुछ अन्य बातें भी हुई हैं? इसके अलावा कॉल करने वालों को कोई ऐसा व्यक्ति तो नहीं जिसे संबंधित विधायक पहचान रहे हों। विधायकों को फोन कॉल कब किए गए और बातचीत कितनी देर तक हुई, इसका रिकार्ड भी साइबर सेल जुटा रहा है। फिलहाल यह बात सामने आई है कि विधायकों के मोबाइल पर कॉल करने वाले व्यक्तियों ने कुछ कॉल तो सीधे नंबरों से और कुछ कॉल एक ऐप के जरिए की है, जहां कॉल करने का असली नंबर बदल जाता है और कॉल रिसीव करने वाले को असली व्यक्ति का पता नहीं चलता।