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तुरेआ तुरेआ जा फरीदा
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तुरेआ तुरेआ जा फरीदा और कई अन्य सूफी गीतों से सूफी गायक अरूण फरीदी ने वीरवार को पंजाब कला भवन की शाम को रोशन कर दिया। पंजाब संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 12-14 दिसंबर को ‘शरद ऋतु संगीत उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन सूफी गायक अरूण अफरीदी ने सूफी गायन पर प्रस्तुति दी। अफरीदी केसाथ उनकी पार्टी के सदस्याें ने स्टेप पर बखूबी साथ निभाया। कार्यक्रम को देखने ट्राइसिटी के सुफी गयन केप्रशंसक पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरूआत सूफी गायक अरूण फरीदी ने बाबा फरीद केकलाम तुरेआ तुरेआ जा फरीदा से की। इसके बाद शाह हुसैन के कलाम चंगी हां ते मंदी हां पर लोगों की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में अरूण अफरीदी ने एक के बाद एक सूफी गानों पर शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
कौन हैं अरुण अफरीदी
फरीदकोट से ताल्लुक रखने वाले सूफी गायक अरूण अफरीदी देव दिलदार जी ग्वालियर घराने से हैं। नुसरत फतेह अली खान को अपना आदर्श मानने वाले अरूण के मुताबिक सूफी गायन डन्होंने 15 वर्ष की उम्र से शुरू किया। इसकेबाद अपने दादा और पिता से मिली गायन की इस विरासत को उन्हाेंने संभाला है और आगे लेकर जा रहे हैं। अरूण अफरीदी ने बताया कि सूफी गायक हंसराज हंस से उन्हे बहुत कुछ सीखने को मिला।
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बेस्ट सूफी का अवार्ड मिला
वर्ष 2003 में वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस पटियाला में अरूण अफरीदी को बेस्ट सूफी गायक का अवार्ड भी मिला जब उन्हाेंने पाकिस्तान और भारत केपंजाब के मुख्यमंत्रियाें परवेज इलाही और अमरिंदर सिंह की मौजूदगी में अपना गायन पेश किया। अरूण अफरीदी ने कहा कि सूफी संगीत रूह को अल्लाह से जोड़ता है। इनकेअनुसार बदतले समय में भी आज भी सूफी गायन को सूनने वालों की कोई कमी नही है।
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कार्यक्रम की शुरूआत सूफी गायक अरूण फरीदी ने बाबा फरीद केकलाम तुरेआ तुरेआ जा फरीदा से की। इसके बाद शाह हुसैन के कलाम चंगी हां ते मंदी हां पर लोगों की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में अरूण अफरीदी ने एक के बाद एक सूफी गानों पर शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
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कौन हैं अरुण अफरीदी
फरीदकोट से ताल्लुक रखने वाले सूफी गायक अरूण अफरीदी देव दिलदार जी ग्वालियर घराने से हैं। नुसरत फतेह अली खान को अपना आदर्श मानने वाले अरूण के मुताबिक सूफी गायन डन्होंने 15 वर्ष की उम्र से शुरू किया। इसकेबाद अपने दादा और पिता से मिली गायन की इस विरासत को उन्हाेंने संभाला है और आगे लेकर जा रहे हैं। अरूण अफरीदी ने बताया कि सूफी गायक हंसराज हंस से उन्हे बहुत कुछ सीखने को मिला।
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बेस्ट सूफी का अवार्ड मिला
वर्ष 2003 में वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस पटियाला में अरूण अफरीदी को बेस्ट सूफी गायक का अवार्ड भी मिला जब उन्हाेंने पाकिस्तान और भारत केपंजाब के मुख्यमंत्रियाें परवेज इलाही और अमरिंदर सिंह की मौजूदगी में अपना गायन पेश किया। अरूण अफरीदी ने कहा कि सूफी संगीत रूह को अल्लाह से जोड़ता है। इनकेअनुसार बदतले समय में भी आज भी सूफी गायन को सूनने वालों की कोई कमी नही है।