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पुलिस की करतूत: आप भी कहेंगे, 'दुश्मन भये कोतवाल, डर ही लागेगा'

Wed, 06 Apr 2016 09:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 06 Apr 2016 09:36 AM IST
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Torture of punjab and haryana police on Ordinary people, some example
मौके पर यदि पुलिस हस्तक्षेप न करती तो कुछ भी हो सकता था। - फोटो : Demo pic

पुलिस जनता की रक्षक मानी जाती है लेकिन पंजाब हरियाणा में ऐसा नहीं है। यहां की पुलिस आम लोगों को किस कदर प्रताड़ित करती है, हाईकोर्ट में आए मामलों से इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। मंगलवार को अदालत में तीन मामले ऐसे पहुंचे जिनमें पुलिस ने पीड़ितों को इतना परेशान किया कि उन्हें कोर्ट की शरण में आना पड़ा। 

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मामला-1 
पहले सड़क पर फिर पटरी पर मरा युवक
 
वर्ष 2014 में पटियाला में बीस साल के युवक जॉनपाल सिंह की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। थाना पुलिस ने पहले इसे सड़क हादसा बता दिया और बाद में कहा कि युवक की मौत ट्रेन की टक्कर से हुई। पिता सेवक सिंह और भाई जसपाल सिंह का कहना है कि जॉनपाल की हत्या की गई।
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आरटीआई के तहत रेलवे पुलिस ने घटना के दिन ट्रेन की टक्कर से उस जगह पर किसी भी मौत होने से साफ इनकार किया जिस जगह पुलिस ने ट्रेन से हादसा बताया था। पुलिस ने चार युवकों के खिलाफ हल्की धाराओं का मामला दर्ज कर लिया।
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सेवक सिंह ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि पटियाला पुलिस उनके बेटे की हत्या का मामला दबाने की कोशिश में लगी है। मांग है कि युवकों के खिलाफ दर्ज मामले में कत्ल की धारा जोड़ी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने पटियाला पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 

मामला-2
पुलिस की गोली से कोमा में युवक 

फरीदाबाद सीआईए स्टाफ ने पिछले साल 24 जुलाई को एक फोर्ड फिएस्टा कार रोकी। उसमें बैठे पांच-छह युवकों को बाहर निकाला। पुलिस पार्टी के अन्य सदस्यों के रोकने के बावजूद हवलदार आनंद सिंह ने मोहित नामक युवक पर हथियार तान दिया और गोली नाक के पास से लगी। तभी से युवक कोमा में है।

इसे महज हादसा बताते हुए अदालत में चालान पेश कर दिया। मोहित के पिता तेजपाल सिंह ने एडवोकेट सुमित गोयल के माध्यम से याचिका दायर करके सीबीआई जांच की मांग की।जस्टिस राजन गुप्ता ने मामला सीबीआई के हवाले करते हुए कहा है कि पुलिस ऐसे आसानी से हथियार कैसे निकाल लेती है, इसकी बड़े स्तर पर जांच जरूरी है। सीबीआई को दो महीने में स्थिति रिपोर्ट देने को भी कहा है।

मामला-3
युवती से दुष्कर्म-हत्या केस में पिता को ही फंसाया

कुरुक्षेत्र में एक युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने उसके पिता के खिलाफ ही दुष्कर्म और हत्या का मामला बना दिया। पीड़ित पिता ने हाईकोर्ट दस्तक दी तो जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने पुलिस की थ्योरी गलत करार देते हुए पिता को क्लीन चिट दे दी।

इसके बाद पिता ने मानहानि का मुआवजा मांगा और हाईकोर्ट के जस्टिस के.कानन की बेंच ने हर्जाना अदा करने का आदेश देते हुए कुरुक्षेत्र के एसपी और डीएसपी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी। इसी मामले में अब पुलिस अधिकारियों और सरकार ने अपील दायर करके एकल बेंच का फैसला रद्द करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने हालांकि एकल बेंच के फैसले पर फिलहाल रोक लगाते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है, लेकिन अभी फैसला होना बाकी है कि पुलिस गलत थी या नहीं।

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