बलि: मंदिर-मजार के बीच जिंदा दफनाया नवजात
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तंत्र-तंत्र के चक्कर में शहर के अंदर नवजात शिशु की बलि दे दी गई। दिल दहला देने वाली यह घटना गुरुतेग बहादुर नगर स्थित एक मजार के पीछे की है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ शिशु हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज करके शव का सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाकर नगर परिषद को सौंप दिया है। डॉक्टरों ने मृतक के रक्त व शरीर के कुछ अंग का सैंपल डीएनए जांच हेतु लिया है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह सिविल अस्पताल के सामने स्थित हुडा ग्रीन बेल्ट में गुरुतेग बहादुर नगर के बच्चे गिल्ली डंडा खेल रहे थे। इसी दौरान गिल्ली मजार के पीछे बने गढ्ढे में जा गिरी। बच्चा गिल्ली लेने गया तो वहां भूमि में नवजात बच्चे का सिर देख सहम गया और शोर मचाया।
इसके बाद अन्य बच्चे वहां पहुंचे और आसपास मौजूद मोहल्ला वासियों को इसकी जानकारी दी। जमीन में धड़ तक दफन नवजात की बात आग की भांति क्षेत्र में फैल गई। दूर-दूर से लोग मौके पर पहुंचने लगे। सूचना मिलने पर जेजे पुलिस चौकी मंगल सिंह मौके पर पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों को घटनाक्रम की जानकारी दी। चौकी प्रभारी ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी घटना के बारे में बताकर मौके पर आने का आग्रह किया।
प्रशासन की तरफ से बीडीपीओ महेंद्र नेहरा घटना स्थल पर पहुंचे। इसके बाद जमीन में धड़ तक दफन नवजात के शव को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। शव बाहर निकालने पर डॉक्टर ने जांच की तो शव नवजात ‘लड़के’ का निकला। शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल ले जाया गया। इंस्पेक्टर दिनेश कुमार ने बताया कि डॉक्टरों ने बताया है कि जन्म लेने के कुछ घंटों बाद ही नवजात को जमींन मे दफनाया गया है।
शिशु हत्या को तंत्र-मंत्र से जोड़कर देख रहे हैं लोग
जिस स्थान पर नवजात को धड़ तक दफनाया गया है उसके 12 कदम पर एक मजार है और 200 कदम पर मां काली का मंदिर है। ऐसा माना जा रहा है कि अंधविश्वास के चलते तांत्रिक कार्य को पूरा करने के लिए इस नवजात शिशु को जन्म के अंधेरे में धड़तक दफनाया गया।
क्षेत्र वासी भी इस शिशु हत्या को तंत्र-मंत्र से जोड़कर देख रहे हैं क्योंकि शख्स बिना किसी मकसद के नवजात के साथ इतनी क्रूरता नहीं दिखा सकता। जांच अधिकारी एएसआई मंगल सिंह का कहना है कि नवजात का आसपास के क्षेत्र में नहीं हुआ। मुखबिरों की सहायता से इसका पता लगाया गया है।
ये पूरा क्षेत्र स्लम है अगर जन्म के दौरान नवजात की मौत भी होती तो उसे श्मशान भूमि में दफनाया जाता। पुलिस हर तरह से इस मामले की जांच कर रही है। मामला तांत्रिक मकसद को पूरा करने के लिए नवजात की बलि देने का भी हो सकता है। लोग अंध विश्वास में आकर इच्छा पूर्ति हेतु इस प्रकार बली दे देते हैं। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ शिशु हत्या की धारा 318/201 के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
बच्चों ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया
घटना स्थल के पास स्थित गुरुतेग बहादुर नगर निवासी हरबंस कौर ने बताया कि सुबह करीब साढे़ आठ बजे एक मूक बधिर युवक मजार के पास गया था। जहां उसने जमीन में धड़ तक दफन नवजात का शव देखा। उक्त युवक ने कुछ ही दूरी पर गिल्ली डंडा खेल रहे बच्चों को इशारे से समझाने का प्रयास किया।
वह बच्चों को वहां लेकर गया इसके बाद बच्चों ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर वह भी मजार के पीछे गई तो एक नवजात धड़ तक दफन देख दंग रह गई। किस ने नवजात की जान ली यह जल्दी सामने आना चाहिए।
तंत्र-मंत्र से जुड़ा लगता है मामला
आशा रानी, निवासी गुरुतेग बहादुर नगर, सिरसा ने बताया कि सुबह मजार के पीछे ग्रीन बेल्ट में लोगों की भीड़ देखी तो वहां चली गई। जो दृश्य देखा वो दिल दहला देने वाला था। नवजात को जमींन में धड़ तक दफन देखकर ऐसा लग रहा है किसी ने तंत्र-मंत्र के चक्कर में आकर बच्चे की बलि दी है। हमारे क्षेत्र में तो ऐसा कोई नहीं है जिसने यह सब किया हो। किसी ओर स्थान से नवजात को वहां लाया गया है और फिर आधा जमींन में दफन कर डाला।
विसरा मधुबन लैब भेजा
शव का दोपहर को सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। डॉक्टर ने बिसरा तैयार करके जांच हेतु मधुबन लैब भेज दिया है। सिटी थाना के कार्यवाहक प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार ने बताया है कि मृतक का डीएनए टेस्ट करवाया जा रहा है ताकि गुत्थी सुलझने के बाद पुलिस आरोपी का डीएनए नवजात बच्चे के डीएनए से मिलान कर सके। इससे दोषी के खिलाफ बड़ा ठोस सबूत होगा और अदालत में उसे अपने किए की सजा दिलवाने में अहम साबित होगा।