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मिर्चपुर कांड : एक नाबालिग आरोपी दोषी करार, सजा कल
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Fri, 29 Jan 2016 12:58 AM IST
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हिसार जुवेनाइल कोर्ट के न्यायाधीश आशीष शर्मा की अदालत ने बहुचर्चित मिर्चपुर कांड के पांच आरोपियों में से वीरवार को एक आरोपी को दोषी करार दिया है। बाकी चार आरोपियों को बरी कर दिया गया। अदालत दोषी को शनिवार को सजा सुनाएगी। दिल्ली का सत्र न्यायालय 15 बालिग आरोपियों को पहले सजा सुना चुका है।
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जुवेनाइल कोर्ट ने वीरवार को चार नाबालिग आरोपियों को बरी करते हुए एक आरोपी को दोषी मानकर सजा सुनाने के बारे में फैसला सुरक्षित रख लिया। इस फैसले से बहुचर्चित मिर्चपुर कांड की याद एक बार फिर ताजा हो गई है। सनद रहे कि 21 अप्रैल 2010 को एक कुतिया को लात मारने के विवाद के बाद मिर्चपुर के ग्रामीणों ने गांव की दलित बस्ती पर धावा बोल दिया था।
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ग्रामीणों ने दलितों से मारपीट करते हुए कई घरों में आग लगा दी थी। दलित एकाएक हुए हमले के बाद भाग गए थे। मगर ताराचंद और उनकी विकलांग बेटी सुमन उपद्रवियों के हाथ लग गए थे। मारपीट और जिंदा जलाने के कारण उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद बवाल मच गया था।
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देशभर में इस कांड की गूंज पहुंची। दलित संगठनों ने इस कांड के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। इसे संभालने में हरियाणा सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस कांड के विरोध में 100 से ज्यादा परिवार गांव से पलायन कर गए थे। इनमें काफी परिवार यहां कैमरी रोड पर तंवर फार्म हाउस में अब भी शरण लिए हुए हैं। कांड के तूल पकड़ने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी अचानक गांव में पहुंचे थे। यहां कोर्ट में सरकारी वकील अखिल दलाल ने बताया कि एक आरोपी पर जुर्म साबित हुआ है।
15 दोषियों को दिल्ली में हो चुकी है सजा
कांड के तूल पकड़ने और दलित संगठनों के रोष के चलते सूबे की हुड्डा सरकार ने इस केस को दिल्ली के सत्र न्यायालय में स्थानांतरित किया था। वहां की एडीजे कामिनी लाऊ ने 31 अक्टूबर 2011 को 98 दोषियों में से 15 को दोषी मानकर सजा सुनाई थी। इसमें आगजनी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम, गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा पांच को पांच-पांच साल और सात आरोपियों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी।
सत्र न्यायालय में करेंगे अपील: कल्सन
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि वे चार जुवनाइल आरोपियों के बरी होने के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील करेंगे। पुलिस की गलत तफ्तीश के कारण वे बरी हुए हैं। पुलिस को तफ्तीश में ढील नहीं बरतनी चाहिए थी।