करोड़ों के मनरेगा घोटाले में 9 अधिकारियों पर गाज
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति पर चलते हुए सोमवार देर शाम अंबाला जिले में करोड़ों रुपये के मनरेगा घोटाले के नौ आरोपियों पर वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
विभाग ने चार रेंज फॉरेस्ट अफसरों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि हरियाणा वन सेवा के तीन अधिकारियों को निलंबित करने के लिए सरकार को सिफारिश भेज दी है। इसी घोटाला से जुड़े दो सेवानिवृत्त अधिकारियों के प्रति भी नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। यह जानकारी सोमवार को वन विभाग के प्रवक्ता ने दी।
उन्होंने बताया कि अंबाला जिले में मनरेगा घोटाले में संलिप्त विभाग के 9 अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। इसमें संलिप्त हरियाणा वन सेवा के तीन अधिकारियों जगमोहन शर्मा, प्रशांत शर्मा और राजेश राणा को निलंबित करने के लिए सरकार को सिफारिश भेजी गई है, जबकि विभाग के चार रेंज फॉरेस्ट अधिकारियों गोकुल शर्मा, दीपक एलाबादी, विनोद कुमार और सुरेंद्र नागर को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इस घोटाले से जुड़े दो अधिकारी जिनमें लक्ष्मण दास रेंज फॉरेस्ट अधिकारी और अधीक्षक चंद्रमोहन पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई के लिए लिख दिया गया है।
मनरेगा परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश
पानीपत के आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने वर्ष 2007-2010 के बीच अंबाला जिले में मनरेगा परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के घोटाले को उजागर कर तत्कालीन प्रदेश सरकार से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन यह मामला काफी समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा और आखिरकार आरटीआई एक्टिविस्ट ने हरियाणा लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाकर कार्रवाई किए जाने की मांग की।
इस पूरे मामले में अंबाला के तत्कालीन एडीसी संजीव वर्मा और वजीर सिंह गोयत की ओर से की गई जांच में घोटाला सामने आने के बाद भी अंबाला के तत्कालीन डीसी समेत चार उच्चाधिकारियों ने वन विभाग को करोड़ों रुपये के चेक आवंटित कर दिए थे। केस की विजिलेंस जांच में पाया गया कि अंबाला के तत्कालीन डीसी ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के ही वन विभाग के अधिकारियों को चेक जारी कर भुगतान करवा दिया।
मामले की जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी (विजिलेंस) शरद कुमार ने हरियाणा सरकार को 16 नवंबर, 2012 को सौंप दी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ हरियाणा सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता ने 12 जनवरी, 2015 को सीएम विंडो पर इसकी शिकायत दी तो हरियाणा सरकार ने वन विभाग के मुख्य आरोपी अधिकारी, डीएफओ (टी) अंबाला मंडल सहित नौ लोगों के खिलाफ 27 जनवरी, 2015 को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
बावजूद इसके सरकार की ओर से नामजद अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामले में सरकार की कार्यशैली के खिलाफ शिकायतकर्ता ने 30 जनवरी, 2015 को लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दाखिल कर दी।
लोकायुक्त के अधीन मामले की बीते सप्ताह हुई सुनवाई पर जांच अधिकारी ने लोकायुक्त को बताया था कि सभी नौ आरोपी जिनके खिलाफ अंबाला जिला अदालत से गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिए गए हैं, फरार हो चुके हैं। इस पर लोकायुक्त ने जांच अधिकारी को सभी फरार आरोपियों के खिलाफ जिला अदालत से सर्च वारंट जारी कराने के निर्देश दिए गए थे।