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'हे प्रभु! रेल में वीआईपी सेफ नहीं तो हम कैसे?'

Sat, 04 Apr 2015 05:30 PM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Sat, 04 Apr 2015 05:30 PM IST
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loot in train with home ministery officer wife, inside story

केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी की पत्नी से चलती ट्रेन में लाखों के आभूषणों की लूटपाट ने रेलवे के सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोल दी।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत दिल्ली किदवई नगर वासी अमित शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनकी पत्नी वनिका गुप्ता मायके में एक विवाह समारोह में शिरकत करके बीती रात घर लौट रही थी।
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उनके साथ पांच वर्ष का बेटा आरुष शर्मा भी था। अमित शर्मा ने बताया कि लूट की वारदात की सूचना उन्हें फोन पर मिली थी। हद तो यह है कि इस ट्रेन में कोई भी सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं था।

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नहीं थी कोई सुरक्षा व्यवस्था

loot in train with home ministery officer wife, inside story

रेलवे के सुरक्षा प्रबंधों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस एसी स्पेशल ट्रेन में लूट की वारदात हुई, उसकी किसी भी बोगी में सुरक्षा के लिए एक भी जीआरपी या आरपीएफ का जवान उपलब्ध नहीं था।

हैरत की बात ये है कि जिस रेल को बजट के दौरान सुरक्षित बनाने के दावे हाल ही में किए गए हों, उनकी उम्मीदें इस लूट की घटना के बाद ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है।

शुक्रवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे ऊधमपुर से नई दिल्ली जाने वाली जिस एसी स्पेशल ट्रेन में हुई लूट हुई, उसमें महिला, बच्चों और बुजुर्गों सहित कुल 1500 से ज्यादा रेल मुसाफिर रेल मंत्रालय के इसी भरोसे पर बड़े आराम से यात्रा कर रहे थे।

करीब साढ़े तीन बजे जैसे ही ट्रेन में लूट की वारदात के साथ अफरा-तफरी मची तो  सुरक्षा के लिए जीआरपी और आरपीएफ का कोई जवान चिल्लाने पर भी इस ट्रेन में नहीं मिला। इस ट्रेन में लुटेरे आए बड़ी आसानी से वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

ट्रेन में नहीं था कोई भी सुरक्षा गार्ड

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आरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक सुनील कुमार ने अमर उजाला को बताया कि जिस ट्रेन में लूट की वारदात हुई, उस समय उस ट्रेन में कोई भी सुरक्षा गार्ड नहीं था।

उक्त अधिकारी ने बड़ी साफगोई से कहा कि इस गार्ड में राजकीय रेलवे पुलिस और आरपीएफ के किसी जवान के न होने की शिकायत लूट की वारदात की शिकार हुई वनिका गुप्ता ने स्वयं लिखित में की है।

कोच कंडक्टर व अटेंडेंट ने बंद नहीं किया था शटर
पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक कोच कंडक्टर और अटेंडेंड अगर चाहते तो लूट की वारदात को शटर बंद करके बचा सकते थे। उन्होंने बताया कि अमूमन लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए लुटेरे दो डिब्बों के बीच में बने जोड़ को उठाकर भीतर घुसते हैं।

अगर दोनों डिब्बों का शटर बंद हो तो कोई भी भीतर घुस नहीं सकता। ये मामले पहले भी सुरक्षा के प्रबंधों को पुख्ता करने के लिए उठ चुके हैं। डिब्बों के बीच में जहां जोड़ हैं, वहां कोई ऐसी व्यवस्था हो, जिससे लुटेरे इसे उठाकर डिब्बों में ना घुस सकें।

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