नौ साल तक बंधक बनाकर कराई गुलामी
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अंकल मुझे तड़के चार बजे डंडे मारकर उठा देते थे और कहते थे कि भैंसों को चारा डाल और दूध निकाल। इसके बाद पूरा दिन बस काम में ही निकलता था। खाने को जूठा ही मिलता था। मारते भी बहुत थे।
कभी घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था। रात को 11 बजे ही सोने देते थे। अंकल ने कई जगह काम के लिए भेजा। वहां भी बहुत मारते थे और दिनभर काम कराते थे। 20 साल का मंगा सिंह यह बताते हुए फूट-फूटकर रो पड़ता है।
मंगा नौ साल बाद सरहंद स्थित न्यू यादविंदरा कॉलोनी में अपने घर पहुंच मां-भाई से मिल पाया है। साल 2005 में मंगा सिंह जब मात्र 11 साल का था तो अचानक गायब हो गया।
अगवा करने वाला आरोपी रेलवे पुलिस का कर्मचारी
साल 2005 में मंगा सिंह जब मात्र 11 साल का था तो अचानक गायब हो गया। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट मां त्रिलोचन कौर ने संबंधित त्रिपड़ी थाने में दर्ज कराई थी लेकिन पुलिस को कोई सुराग नहीं लग पाया था।
अचानक कुछ दिन पहले मंगा सिंह फटेहाल अपने घर पहुंचा तो मां लंबी दाढ़ी रखे मंगा को पहचान नहीं पाई। मंगा ने जब मां कहा तो त्रिलोचन कौर जान गई कि वह तो उसके जिगर का टुकड़ा है जो उससे बिछड़ गया था। त्रिचोलन कौर पति की मौत के बाद लोगों के घरों में काम करके अपने दो बेटों का भरण पोषण कर रही थी। इसी बीच वर्ष 2005 में मंगा गायब हो गया।
घर पहुंचे मंगा ने सारी आपबीती सुनाई कि किस तरह अगवा करने वाला गुरसेवक जिला मोहाली के गांव घडुआं ले गया था। गुरसेवक ने उसे आगे दो-तीन लोगों के पास भी भेजा। किसी के पास छह माह, तो किसी के पास साल भर काम किया। मंगा की वापसी के बारे में पुलिस को सूचित कर दिया गया। जांच के बाद शनिवार को गुरसेवक सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।