मनीमाजराः 20 करोड़ की लूट का मामला 72 घंटे में सुलझाया, 12 मिनट में समेट ले गए थे गहने
चंडीगढ़ में मनीमाजरा स्थित तनिष्क ज्वैलरी शोरूम से 20 करोड़ रुपये के गहनों की लूट देश की सबसे बड़ी लूट में से एक थी, जिसे 72 घंटे में ही सुलझा लिया गया था। 11 जनवरी 2011 को पुलिस की वर्दी में आए 9 लुटेरे रात करीब 1:30 बजे तनिष्क ज्वैलरी शोरूम से गहने लूटकर फरार हो गए लेकिन चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच की टीम ने महज 72 घंटे के अंदर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। इतना ही नहीं लूटे गए गहने भी बरामद कर लिए। 11 जनवरी 2011 को ठंड भरी रात में सन्नाटा पसरा हुआ था। तनिष्क शोरूम के बाहर दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे।
इसी बीच वहां पर एक के बाद एक नौ लुटेरे पुलिस की वर्दी में आ धमके और दोनों सिक्योरिटी गार्ड दीनानाथ और स्वर्ण सिंह को बंधक बना लिया और गन प्वाइंट पर लेकर उन्हें जबरन बेहोशी की दवा खिला दी। दोनों गार्ड के बेहोश होने के बाद लुटेरों ने गैस कटर से शोरूम शटर का काटकर अंदर प्रवेश किया और गहने लूटकर भाग निकले। सुबह जब शोरूम के मालिक मौके पर पहुंचे तो शटर को टूटा हुआ देख उनके होश उड़ गए, उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। इतनी बड़ी लूट की खबर से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मनीमाजरा थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच, आपरेशन सेल व अन्य खुफिया विंग लुटेरों की तलाश में जुट गईं।
12 मिनट में समेट ले गए करोड़ों के गहने
जांच में खुलासा हुआ कि लुटेरे पूरी प्लानिंग और रेकी कर वारदात को अंजाम देने आए थे। लुटेरों के पास एक ट्रक था, जिसे उन्होंने तनिष्क ज्वैलर्स से थोड़ी दूरी पर खड़ा किया था। वारदात को अंजाम देने के लिए लुटेरे चादर लेकर आए थे। इसी चादर में उन्होंने करीब 20 करोड़ के सोने और हीरे के गहने लपेटकर ट्रक से फरार हो गए। इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने महज 12 मिनट का वक्त लिया। इससे साफ पता चलता है कि आरोपियों ने पहले रेकी की और फिर वारदात को अंजाम दे डाला। लूटपाट को अंजाम देते समय पुलिस के हाथ सीसीटीवी फुटेज भी लगा था।
पुलिस की वर्दी बनी लुटेरों के लिए मुसीबत
लुटेरे वारदात को अंजाम देने के लिए पुलिस की वर्दी पहनकर आए थे। वारदात को अंजाम देने के बाद लुटेरे पुलिस वर्दी को वहीं फेंक गए। वारदात स्थल पर पहुंची पुलिस ने जब वर्दी को खंगाला तो उसमें यूपी और दिल्ली पुलिस का साइन लगा हुआ था। इससे पुलिस को शक हुआ आरोपी किसी दूसरे राज्य के हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस से मामले को साझा कर मदद ली गई।
पुलिस ऐसे पहुंची आरोपियों तक
पुलिस टीम को शक होने के बाद टीम ने वारदात स्थल वाली जगह के मोबाइल डाटा उठाया लेकिन सैकड़ों डाटा आने के बाद क्राइम ब्रांच के पास आरोपियों तक पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। इस दौरान यूपी और दिल्ली के कई मोबाइल नंबर पुलिस के हाथ लगे। इससे टीम का शक और गहरा गया क्योंकि वर्दी भी यूपी और दिल्ली के मिले थे। इसके बाद पुलिस ने उन सभी नंबर को लोकेट करना शुरू कर दिया।
इसके अगले एक दिन बाद एक आरोपी के बारे में टीम को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी दिल्ली में ठहरा हुआ है, जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने ट्रैप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के गिरफ्त में आते ही उसकी निशानदेही पर टीम गाजियाबाद के लोनी से बाकी के आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर केस सुलझा दिया। पुलिस ने आरोपियाें के पास लूटे हुए सोने और हीरे के गहने भी बरामद कर लिए।
पुलिस की हुई थी किरकरी
शोरूम में लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से भी पुलिस लुटेरों की पहचान नहीं कर पाई और न ही तनिष्क शोरूम का सिक्योरिटी गार्ड आरोपियों की पहचान सके। इससे पकड़े गए आरोपियों पर अदालत में पुलिस इन पर लगाई गई डकैती और आर्म्स एक्ट की धारा साबित नहीं कर सकी। इनके पास से गहनों की रिकवरी के आधार पर अदालत ने इन सभी को तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी।
इन्हें मिली थी तीन-तीन साल की सजा
2.मानव सोनी, निवासी वैशाली, गाजियाबाद
3. अजय सिंह, निवासी पिलखुवा, हापुड़
4.भूरा तोमर, निवासी पिलखुवा, हापुड़
5.नदीम, निवासी पिलखुवा, हापुड़
6.सुरेंद्र सिंह तोमर, निवासी पिलखुवा, हापुड़
7.सोनू राघव, निवासी पिलखुवा, हापुड़
8. हरजिंदर सिंह, निवासी पिलखुवा, हापुड़
9.अनुज कुमार, निवासी पिलखुवा, हापुड़