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Aligarh News: ब्लैकमेलिंग कांड से डेटिंग एप पर खलबली, खिलाड़ी डिलीट कर रहे अकाउंट
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समलैंगिक से दोस्ती और फिर उन्हें एएमयू के वीएम हॉल में बुलाकर ब्लैकमेल करने का मामला उजागर होने के बाद माई बॉय और ग्रिंडर डेटिंग एप पर खलबली मच गई है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने से एक के बाद एक अलीगढ़ के कई यूजर्स ने अपने अकाउंट डिलीट कर दिए। कई ने डेटिंग एप के अलावा अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स भी ब्लॉक कर दिए। जिला पुलिस की साइबर सेल बीबीए छात्र की गिरफ्तारी के बाद से इंटरनेट पर निगरानी रख रही है। बताया जा रहा है कि पहचान उजागर होने के डर के चलते अकाउंट डिलीट हुए हैं।
पुलिस की जांच में अब तक 125 से ज्यादा लोगों के संपर्क में आने के संकेत मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है, जिन्हें आरोपियों ने अपने जाल में फंसाया और बाद में ब्लैकमेल किया। लिहाजा इन सभी को आरोपी मानने के बजाय पुलिस संभावित पीड़ितों और संपर्कों के तौर पर जांच कर रही है।
वीडियो और चैट खोलेंगे राज
मुख्य आरोपी के मोबाइल से मिले वीडियो, कॉल डिटेल और संपर्कों ने पुलिस की जांच को बड़ा आधार दिया है। अब डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ मोबाइल के डेटा की परतें खोल रहे हैं। मोबाइल की डिजिटल कॉपी तैयार कर मूल डिवाइस को सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद डिलीट फोटो, वीडियो, चैट और दूसरी फाइलों को रिकवर करने की कोशिश चल रही है। पुलिस कॉल लॉग, चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा, संपर्क सूत्र और क्लाउड बैकअप तक खंगाल रही है। यानी जो बातें मोबाइल से मिटा दी गईं, पुलिस अब उनके डिजिटल निशान तलाश रही है।
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फरार चार आरोपियों से खुलेगा नेटवर्क
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के मुताबिक मामले में एक आरोपी शहजिल को जमानत मिलने के बावजूद जांच और मुकदमा जारी है। फरार आरोपी मन्नान, ऑगी, भोला और एक अन्य अज्ञात की तलाश में पुलिस टीमें लगाई गई हैं। इनमें एक आरोपी कासगंज का हिस्ट्रीशीटर बताया गया है। पुलिस की नजर अब सिर्फ फरार आरोपियों पर नहीं, बल्कि मोबाइल में छिपे उस पूरे नेटवर्क पर है, जिससे यह पता चल सके कि कितने लोग संपर्क में आए, कितने शिकार बने और ब्लैकमेलिंग का दायरा कहां तक फैला था।
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पुलिस की जांच में अब तक 125 से ज्यादा लोगों के संपर्क में आने के संकेत मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है, जिन्हें आरोपियों ने अपने जाल में फंसाया और बाद में ब्लैकमेल किया। लिहाजा इन सभी को आरोपी मानने के बजाय पुलिस संभावित पीड़ितों और संपर्कों के तौर पर जांच कर रही है।
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वीडियो और चैट खोलेंगे राज
मुख्य आरोपी के मोबाइल से मिले वीडियो, कॉल डिटेल और संपर्कों ने पुलिस की जांच को बड़ा आधार दिया है। अब डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ मोबाइल के डेटा की परतें खोल रहे हैं। मोबाइल की डिजिटल कॉपी तैयार कर मूल डिवाइस को सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद डिलीट फोटो, वीडियो, चैट और दूसरी फाइलों को रिकवर करने की कोशिश चल रही है। पुलिस कॉल लॉग, चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा, संपर्क सूत्र और क्लाउड बैकअप तक खंगाल रही है। यानी जो बातें मोबाइल से मिटा दी गईं, पुलिस अब उनके डिजिटल निशान तलाश रही है।
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फरार चार आरोपियों से खुलेगा नेटवर्क
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के मुताबिक मामले में एक आरोपी शहजिल को जमानत मिलने के बावजूद जांच और मुकदमा जारी है। फरार आरोपी मन्नान, ऑगी, भोला और एक अन्य अज्ञात की तलाश में पुलिस टीमें लगाई गई हैं। इनमें एक आरोपी कासगंज का हिस्ट्रीशीटर बताया गया है। पुलिस की नजर अब सिर्फ फरार आरोपियों पर नहीं, बल्कि मोबाइल में छिपे उस पूरे नेटवर्क पर है, जिससे यह पता चल सके कि कितने लोग संपर्क में आए, कितने शिकार बने और ब्लैकमेलिंग का दायरा कहां तक फैला था।