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फर्जी एनकाउंटर: DSP समेत 4 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद

Tue, 02 Dec 2014 05:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 02 Dec 2014 05:27 PM IST
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Fake Encounter Case: Life Imprisonment to 4 Police Personnels Including DSP

21 साल पहले पंजाब के एक युवक का फर्जी एनकाउंटर करने के जुर्म में सोमवार को कोर्ट ने एक डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। मामला पंजाब के पटियाला से जुड़ा है।

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स्पेशल जज सीबीआई पंजाब कंवलजीत सिंह की कोर्ट ने सभी दोषियों को सजा सुनाते हुए जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी।
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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के गांव बिलसड़ी बुजुर्ग में 12 अक्तूबर 1993 को लुधियाना के गांव सहारनमाजरा के हरजीत सिंह का फर्जी एनकाउंटर किया गया था।
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इसमें डीएसपी रविंदर कुमार सिंह तत्कालीन एसएचओ पुलिस स्टेशन पुवायां जिला शाहजहांपुर (यूपी) समेत बृजलाल वर्मा तत्कालीन सीनियर सब इंस्पेक्टर पुवायां थाना, ओंकार सिंह तत्कालीन कांस्टेबल जिला शाहजहांपुर (यूपी) और हरिंदर सिंह तत्कालीन एएसआई पुलिस पोस्ट मलोद, थाना पायल, जिला खन्ना निवासी जिला कपूरथला (पंजाब) को दोषी साबित किया जा चुका है।

उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना

Fake Encounter Case: Life Imprisonment to 4 Police Personnels Including DSP

इन सभी को 120-बी आईपीसी यानी साजिश रचने के दोष में उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

वहीं अगवा करने के दोष में चारों पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना व जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद होगी। हत्या के दोष में रविंदर कुमार सिंह, बृज लाल वर्मा, ओंकार सिंह को उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना और जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद, हरिंदर सिंह को हत्या की साजिश रचने में उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना व जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

सबूतों को नष्ट करने के दोष में रविंदर सिंह, बृज लाल व ओंकार सिंह को तीन साल कैद, 10 हजार जुर्माना, जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त कैद होगी। फर्जी कागजात तैयार करने यानी धारा 466 आईपीसी के तहत रविंदर, बृज लाल व ओंकार सिंह को तीन साल कैद, 10 हजार जुर्माना व जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। सजा सुनाने के बाद अदालत ने चारों को पटियाला की सेंट्रल जेल भेज दिया।

पुलिस टीम जबरन उठा कर ले गई थी

Fake Encounter Case: Life Imprisonment to 4 Police Personnels Including DSP

पुलिस पोस्ट मलोद थाना पायल जिला खन्ना में एएसआई हरिंदर सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ छह अक्तूबर 1993 में लुधियाना के गांव सहारनमाजरा में रहने वाले हरजीत सिंह को जबरन उठा कर ले गया था।

हरजीत एक क्लीनिक में हेल्पर का काम करता था। उसके पिता मोहिंदर सिंह ने गांव के कुछ लोगों के साथ एएसआई हरिंदर सिंह से मिलने पहुंचे तो पता चला कि हरजीत को पुलिस स्टेशन पायल शिफ्ट कर दिया गया है। जब पायल पुलिस से पूछा गया, तो बताया गया कि हरजीत को हरिद्वार पुलिस के एसआई कौशल कुमार शर्मा अपने तीन कांस्टेबलों की टीम के साथ ले गए हैं।

बाद में खुलासा हुआ कि हरजीत सिंह को एक लाख का इनामी आतंकी बताते हुए यूपी के शाहजहांपुर जिले के थाना पुवायां के गांव बिलसड़ी बुजुर्ग में एक एनकाउंटर में 12 अक्तूबर 1993 की रात को मार दिया गया है। एनकाउंटर करने वालों में आरके सिंह, बृज लाल, ओंकार शामिल था। पुलिस ने हरजीत सिंह के पास एक 38 बोर के विदेशी रिवाल्वर, 39 कारतूस और 11 खोखों की बरामदगी दिखाई थी।

सीबीआई जांच में फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ

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हरजीत सिंह के पिता मोहिंदर सिंह ने हत्या बताते हुए मामले की जांच की सीबीआई से कराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर सुनवाई के बाद मामला सीबीआई को जांच के लिए दिया गया।

जांच में सामने आया कि कौशल कुमार शर्मा हरिद्वार के किसी भी पुलिस स्टेशन में उस दौरान तैनात नहीं थे और न ही हरजीत सिंह पर हरिद्वार में कोई केस दर्ज था। साथ ही गांव बिलसड़ी बुजुर्ग से गवाह अशरफी लाल, राजकुमार, दिलीप बगैरा ने बताया कि 12 अक्तूबर 1993 को पुलिस ने गांव के लोगों को चेतावनी दी थी कि रात को गांव में एक पुलिस एनकाउंटर होना है, इसलिए बाहर न निकलें।

रात को दो पुलिस गाड़ियां गांव में आईं। इनमें से एक गांव में ही खड़ी रही, जबकि दूसरी आगे चली गई। थोड़ी देर बाद गोलियों की आवाजें सुनाईं दीं। हरजीत सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोलियां लगने की पुष्टि हुई थी। सीबीआई की जांच में यह फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ था।

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