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खुलासाः बिना रजिस्ट्रेशन चल रही थी पीजीआई में कई एंबुलेंस
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Jun 2016 09:58 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : demo pics
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पुलिस ने एंबुलेंस सेवा देने वाले दो गुटों में मारपीट की शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए तीन एंबुलेंस चालकों को गिरफ्तार किया है। ये बिना परमिशन के पीजीआई में एंबुलेंस चला रहे थे। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी मान ग्रुप के कारिंदे हैं। इन्होंने माता मनसा देवी भंडारा कमेटी के चालकों से मारपीट की थी। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरुण, सुलेमान और अवतार के रूप में हुई है।
नहीं ली थी इजाजत
सेक्टर-11 पुलिस स्टेशन के एसएचओ नरेंदर पटियाल ने बताया कि पीजीआई में एंबुलेंस चलाने के लिए बकायदा पीजीआई प्रबंधन से इजाजत लेनी पड़ती है। लेकिन पुलिस जांच में सामने आया है कि इनकी एंबुलेंस बिना परमिशन के ही चल रही थी। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ दो एंबुलेंसों को जब्त कर थाने ले गई है। वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीजीआई प्रशासन को पत्र लिख फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस का कहना है कि ये दादागिरी दिखाते हुए अन्य टैक्सी चालकों को अपनी गाड़ियां वहां लगाने नहीं देते हैं। जिसकी उनके पास कई बार शिकायत भी आई है। एंबुलेंस वालों की दादागिरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अन्य टैक्सी वालों ने शिकायत की है कि पहले जहां उनके दिन में 60-70 चक्कर लग जाते थे वहीं अब मुश्किल से 15-20 ही चक्कर लगते है। क्योंकि ये उनको गाड़ियां ही नहीं लगाने देते।
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मरीजों से मनचाहा किराया वसूल रहे थे
पुलिस के मुताबिक पीजीआई से कई लोगों को शिकायत मिली थी कि प्राइवेट एंबुलेंस चालक लोगों को खूब चपत लगा रहे थे। वह मनचाहा पैसा वसूलते थे। पुलिस ने बताया कि एक व्यक्ति हिमाचल से गंभीर हालत में मरीज लेकर आया था। लेकिन, कुछ देर बाद पीजीआई में उसकी मौत हो गई। पीड़ित जब उसी एंबुलेंस में शव वापस ले जाने लगा तो पीजीआई के इन एंबुलेंस चालकों ने उसे एंबुलेंस में शव नहीं ले जाने दिया। शव ले जाने के लिए उसे यहां से नई एंबुलेंस बुक करवानी पड़ी। पीड़ित ने मामले में लिखित शिकायत देने से मना कर दिया था। इन एंबुलेंस चालकों का नेटवर्क भी काफी तेज था। जैसे ही किसी की मौत होती थी या पोस्टमार्टम होता था ये तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे।
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नहीं ली थी इजाजत
सेक्टर-11 पुलिस स्टेशन के एसएचओ नरेंदर पटियाल ने बताया कि पीजीआई में एंबुलेंस चलाने के लिए बकायदा पीजीआई प्रबंधन से इजाजत लेनी पड़ती है। लेकिन पुलिस जांच में सामने आया है कि इनकी एंबुलेंस बिना परमिशन के ही चल रही थी। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ दो एंबुलेंसों को जब्त कर थाने ले गई है। वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीजीआई प्रशासन को पत्र लिख फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस का कहना है कि ये दादागिरी दिखाते हुए अन्य टैक्सी चालकों को अपनी गाड़ियां वहां लगाने नहीं देते हैं। जिसकी उनके पास कई बार शिकायत भी आई है। एंबुलेंस वालों की दादागिरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अन्य टैक्सी वालों ने शिकायत की है कि पहले जहां उनके दिन में 60-70 चक्कर लग जाते थे वहीं अब मुश्किल से 15-20 ही चक्कर लगते है। क्योंकि ये उनको गाड़ियां ही नहीं लगाने देते।
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मरीजों से मनचाहा किराया वसूल रहे थे
पुलिस के मुताबिक पीजीआई से कई लोगों को शिकायत मिली थी कि प्राइवेट एंबुलेंस चालक लोगों को खूब चपत लगा रहे थे। वह मनचाहा पैसा वसूलते थे। पुलिस ने बताया कि एक व्यक्ति हिमाचल से गंभीर हालत में मरीज लेकर आया था। लेकिन, कुछ देर बाद पीजीआई में उसकी मौत हो गई। पीड़ित जब उसी एंबुलेंस में शव वापस ले जाने लगा तो पीजीआई के इन एंबुलेंस चालकों ने उसे एंबुलेंस में शव नहीं ले जाने दिया। शव ले जाने के लिए उसे यहां से नई एंबुलेंस बुक करवानी पड़ी। पीड़ित ने मामले में लिखित शिकायत देने से मना कर दिया था। इन एंबुलेंस चालकों का नेटवर्क भी काफी तेज था। जैसे ही किसी की मौत होती थी या पोस्टमार्टम होता था ये तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे।