खुलासा: रामपाल के समर्थकों से कुकर्म करवाती थी पुलिस
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रामपाल द्वारा जेल सुपरिंटेंडेंट पर 50 लाख रुपये मांगने के आरोप लगाने के बाद अब जेल से बाहर आए अभियुक्तों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत उन्होंने हिसार पहुंचे जस्टिस केसी पुरी के समक्ष की है।
शिकायत के बाद रविवार को जस्टिस केसी पुरी ने जेल का दौरा किया। रामपाल के समर्थकों के वकील और समर्थकों ने शनिवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में उनके समक्ष जेल में उन पर हुए कथित अत्याचार की शिकायत की।
जस्टिस केसी पुरी को दी शिकायत में रामपाल के वकील एडवोकेट रविंद्र ने बताया कि जेल में बंद रामपाल के अनुयायियों के साथ ऐसे अमानवीय अत्याचार हुए हैं कि जिन्हें बताने से भी रूह कांप उठती है। उन्होंने कहा है कि दो सगे भाइयों के आपस में अप्राकृतिक यौन संबंध बनवाए। जब तक उन्होंने ऐसा नहीं किया, उनके साथ लगातार मारपीट होती रही।
सातरोड निवासी राजकुमार, मिर्जापुर निवासी दिलबाग, अनिल और महेंद्र, आदमपुर निवासी दारा सिंह, सिसाय निवासी महावीर और मनदीप ने बताया है कि नवंबर में उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस थाने के बाद सेंट्रल जेल में ले गई। जैसे ही वे ड्योढ़ी में घुसे तो उनके साथ मारपीट शुरू कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि जेल अधीक्षक शमशेर दहिया ने उनके अंदर जाते ही कपड़े उतरवा दिए और दो-दो जवान बारी-बारी से उनके ऊपर बैठ गए और डंडों व पाइपों से मारपीट करते रहे।
मार खाते-खाते गला सूख गया, नहीं दिया पानी
जेल से बाहर आए अभियुक्तों ने बताया है एंट्री करते ही जेल में उनके साथ जब मारपीट हुई तो मार खाते-खाते उनके गले सूख गए, लेकिन पुलिस ने पानी नहीं पीने दिया। जब जेल स्टाफ उन्हें पीट-पीटकर थक गया तो सीधा उन्हें खाना दे दिया गया। कुछ देर आराम करने के बाद दोबारा उन्हें बैरक से निकाला और पीटना शुरू कर दिया। उनकी इस तरह से दिन में तीन बार परेड होती। कभी उन्हें मुर्गा बनाया जाता तो कभी दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जाता।
'चक्कियों में बंद कर दी जाती हैं यातनाएं'
जेल अधीक्षक पर रामपाल के अनुयायियों ने आरोप लगाया है कि मारपीट का भय दिखाकर अधीक्षक मालदार कैदियों और हवालातियों से रुपये एकत्रित करते हैं। उनसे भी जाते ही जितने भी रुपये थे, सब एक डिब्बे में डलवा लिए। उन्होंने मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में जेल में बंद कैदियों से पूछा जा सकता है।
अनुयायियों ने शिकायत में लिखा है कि जब उन्हें जेल भेजा गया तो वे 20 नवंबर से 19 दिसंबर तक सेंट्रल जेल वन में थे। इसके बाद उनकी बदली हो गई। उन्होंने कहा कि उनकी अगर कोई कैदी या हवालाती फरमाइश पूरी नहीं करते तो वे उन्हें चक्कियों में बंद कर यातनाएं देते थे।
उन्होंने कहा कि हिसार सेंट्रल जेल से ट्रांसफर होने के बाद दहिया रेवाड़ी चले गए थे और फिर दोबारा ट्रांसफर करवाकर सेंट्रल जेल 2 में पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंट्रल जेल अधीक्षक रहते हुए दहिया ने उन्हें भक्तों से रामपाल को थप्पड़ मरवाने की बात भी कही थी।
शमशेर सिंह दहिया, जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल टू ने बताया कि ये सभी लोग एडवोकेट रविंद्र के रटे-रटाए बोल मीडिया के सामने पेश कर रहे हैं। सभी लगाए गए आरोप एकदम झूठे और मनगठंत हैं। जेल में रामपाल के अनुयायियों की इतनी अधिक संख्या में उन पर अत्याचार तो दूर, छेड़ने पर भी अंदर हुड़दंग मच सकता था। ऐसे में पुलिस उन्हें क्यों छेड़ेगी।