चिंताजनक: हरियाणा में हर दूसरे दिन एक विद्यार्थी करता है आत्महत्या, जानें- लक्षण, ये कदम उठा सकते परिजन
हरियाणा में फिलहाल ऐसा कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं है, जिसमें आत्महत्या को रोकने संबंधी मदद मांगी जा सके। आमतौर पर लोग पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल करते हैं। वहीं, हरियाणा में ऐसी कोई सामाजिक संस्था भी नहीं है, जो इस दिशा में काम कर रही हो।
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कोचिंग हब कोटा आजकल विद्यार्थियों के आत्महत्या की वजह से काफी चर्चा में है। इस मामले में अगर हरियाणा की बात करें तो यहां भी विद्यार्थी अपनी खूबसूरत जिंदगी का बुरा अंत करने में नहीं हिचकते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक हर साल आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। औसतन हर दूसरे दिन एक छात्र अपनी जीवनलीला को समाप्त कर रहा है। कोशिश तो इससे ज्यादा लोग करते हैं। इनमें से कुछ को समय रहते बचा लिया जाता है तो कुछ के लिए मौका ही नहीं मिलता।
विशेषज्ञ मानते हैं कि हर आत्महत्या को रोका जा सकता है। आत्महत्या करने से पहले पीड़ित में लक्षण दिखने लगते हैं लेकिन संवाद की कमी से न तो टीचर इसे पहचान पाते हैं और न ही अभिभावक। सबसे जरूरी है संवाद करना और विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाना। मनोविशेषज्ञ डॉ. एमपी शर्मा कहते हैं कि हर विद्यार्थी संपूर्ण नहीं होता है। सबमें कुछ न कुछ कमी रहती है। इसमें वह बेहतर उस स्किल को बढ़ाने में अभिभावकों को उसका साथ देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पहले जिंदगी में विफल होने पर लोग आत्महत्या करते थे लेकिन आज के समय में छोटी छोटी बात। यूं कहें कि मां ने डांट दिया तो बेटे ने आत्महत्या कर ली। गेम में टास्क पूरा करने के लिए छत से कूद गए। अब लोग बिना वजह के आत्महत्या करने लगे हैं। यह चलन काफी डराने वाला है। खासकर युवाओं में आत्महत्या की सोच तेजी से पैदा हो रही है, जो सबसे ज्यादा घातक है।
हरियाणा में नहीं है कोई हेल्पलाइन नंबर
हरियाणा में फिलहाल ऐसा कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं है, जिसमें आत्महत्या को रोकने संबंधी मदद मांगी जा सके। आमतौर पर लोग पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल करते हैं। वहीं, हरियाणा में ऐसी कोई सामाजिक संस्था भी नहीं है, जो इस दिशा में काम कर रही हो। हालांकि अन्य राज्यों में हेल्पलाइन नंबर है, जिसमें व्यक्ति बातचीत कर सकता है।
विद्यार्थियों में आत्महत्या की बड़ी वजह
- प्रतिस्पर्धा: विद्यार्थियों के आत्महत्या करने के पीछे का सबसे बड़ा कारण प्रतिस्पर्धा है।
- उम्मीदों का बोझ: घरवालों का दबाव और उनकी उम्मीदें भी छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है।
- देखभाल न होना: अक्सर अभिभावक अपने बच्चों से सिर्फ पढ़ाई को लेकर ही बात करते हैं। बाकी बातों से उनका लेनादेना नहीं होता।
- मानसिक कारण: प्रेम में नाकामी, उच्च-शिक्षा के मामले में आर्थिक समस्या, बेहतर रिजल्ट के बावजूद प्लेसमेंट नहीं मिलना भी एक वजह हो सकती है।
आत्महत्या करने से पहले के लक्षण
- अचानक से परिजनों से बातचीत करना कम कर दे
- अकेले, चुपचाप और गुमसुम रहना
- किसी बात को लेकर अधिक सोचना
- सोशल मीडिया पर निराशाजनक बातें लिखना
- इंटरनेट पर सुसाइड संबंधी खबरों को पढ़ना व तरीके खोजना
परिजनों का क्या कदम उठाने चाहिए
- बात करें। बात करने से बात बनती है
- न ज्यादा गुस्सा करें। न ज्यादा प्यार दिखाएं। दखलअंदाजी व बात-बात पर कमेंट न करें।
- अगर बच्चा दूर रहता है तो समय-समय पर उसके पास जाते रहें।
- बच्चों से खुलकर बात करें। पढ़ाई के अलावा दूसरे बातों में उसकी राय लें।
- मनोचिकित्सक व काउंसलर की सेवा जरूर लें।
- सकारात्मक बात करें और हौसला बढ़ाएं। किसी भी तरह का दबाव न बनाएं।