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कैट का आदेश नहीं माना, वेस्टर्न कमांड के ब्रिगेडियर पर 50 हजार जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 22 Aug 2017 09:43 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पूर्व के आदेशों का पालन नहीं करने पर हेडक्वार्टर वेस्टर्न कमांड के ब्रिगेडियर प्रशासनिक (ए ब्रांच) पर 50 हजार रुपये कॉस्ट (जुर्माना) लगाया है। ट्रिब्यूनल ने यह आदेश यशपाल सिंह व अन्य की ओर से दायर एग्जीक्यूशन याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
ट्रिब्यूनल ने इस जुर्माना राशि में से 25 हजार रुपये याचिकाकर्ता को देने के आदेश दिए हैं। इससे पहले ट्रिब्यूनल ने जुलाई में पिछली सुनवाई पर संबंधित अधिकारी को केस की हर सुनवाई पर मौजूद रहने के आदेश दिए थे। पिछली सुनवाई पर भी ट्रिब्यूनल ने 25 हजार रुपये कॉस्ट लगाई थी।
चंडी मंदिर स्थित सेना के पश्चिमी मुख्यालय में बतौर सिविल मोटर ड्राइवर (सीएमडी) कार्यरत यश पाल सिंह, हरबंस सिंह और छम्मी सिंह ने ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में 5वें, छठवें वेतन आयोग के तहत प्रमोशन और वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए प्रतिवादी को आदेश देने की अपील की थी।
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याचिका में उन्हें सीएमडी (ओजी) के पद पर पहले अगस्त 1993 से, वर्ष 2002 से सीएमडी-2 के पद पर पदोन्नत करने के साथ ही अगस्त 2008 से सीएमडी-1 के पद पर पदोन्नति देने के साथ ही सभी लाभ देने की अपील की थी। साथ ही पिछले सभी भत्तों को 18 फीसदी ब्याज के साथ देने की मांग की थी।
तीनों याचिकाकर्र्ताओं ने 1984 में मोटर ट्राली ड्राइवर के तौर पर ज्वाइन किया था। उस समय उनका ग्रेड पे 240-400 रुपये था। वर्ष 2008 में उन्हें सीएमडी (ओजी) के पद पर रिडेजिगनेट किया गया था। इस बीच कार्यालय की ओर से नई पॉलिसी लागू की गई, लेकिन उन्हें एसीपी का लाभ नहीं दिया गया।
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ट्रिब्यूनल ने इस जुर्माना राशि में से 25 हजार रुपये याचिकाकर्ता को देने के आदेश दिए हैं। इससे पहले ट्रिब्यूनल ने जुलाई में पिछली सुनवाई पर संबंधित अधिकारी को केस की हर सुनवाई पर मौजूद रहने के आदेश दिए थे। पिछली सुनवाई पर भी ट्रिब्यूनल ने 25 हजार रुपये कॉस्ट लगाई थी।
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चंडी मंदिर स्थित सेना के पश्चिमी मुख्यालय में बतौर सिविल मोटर ड्राइवर (सीएमडी) कार्यरत यश पाल सिंह, हरबंस सिंह और छम्मी सिंह ने ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में 5वें, छठवें वेतन आयोग के तहत प्रमोशन और वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए प्रतिवादी को आदेश देने की अपील की थी।
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याचिका में उन्हें सीएमडी (ओजी) के पद पर पहले अगस्त 1993 से, वर्ष 2002 से सीएमडी-2 के पद पर पदोन्नत करने के साथ ही अगस्त 2008 से सीएमडी-1 के पद पर पदोन्नति देने के साथ ही सभी लाभ देने की अपील की थी। साथ ही पिछले सभी भत्तों को 18 फीसदी ब्याज के साथ देने की मांग की थी।
तीनों याचिकाकर्र्ताओं ने 1984 में मोटर ट्राली ड्राइवर के तौर पर ज्वाइन किया था। उस समय उनका ग्रेड पे 240-400 रुपये था। वर्ष 2008 में उन्हें सीएमडी (ओजी) के पद पर रिडेजिगनेट किया गया था। इस बीच कार्यालय की ओर से नई पॉलिसी लागू की गई, लेकिन उन्हें एसीपी का लाभ नहीं दिया गया।