पेशी के लिए आए 4 विचाराधीन कैदी फरार
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चंडीगढ़ में जिला अदालत में पेशी के दौरान आए कैदियों के फरार होने से रोकने में यूटी पुलिस के कर्मी नाकाम साबित हो रहे हैं। इस बार चार विचाराधीन कैदी पुलिस सुरक्षा को धता बताते हुए जिला अदालत के बक्शीखाने से ही फरार हो गए।
बता दें कि बक्शीखाना वह जगह है जहां जेल से विचाराधीन कैदियों को पेशी पर लाने के दौरान रखा जाता है और जिला अदालत में यहां सबसे अधिक पुलिसकर्मी तैनात होते हैं।
विचाराधीन कैदियों के फरार होने की सूचना पर डीएसपी लाइन समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच की। इस संबंध में सेक्टर-36 थाना पुलिस में केस दर्ज करा दिया गया है। देर रात तक पुलिस चारों की तलाश में छापेमारी कर रही थी।
मामले के अनुसार बुधवार को अबरार खान, शाहने आलम, पंकज और विक्की को अलग-अलग मामलों में जिला अदालत में पेशी पर लाया गया था। चारों पर अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग थानों में केस दर्ज हैं। बक्शीखाने के रिकार्ड रजिस्टर के अनुसार दोपहर में 2:20 मिनट पर चारों को पेशी के बाद लॉकअप रूम में डाल दिया गया था। सीसीटीवी कैमरे में भी उनके अंदर दाखिल होने की फुटेज है।
शाम को पांच बजे जैसे ही सभी विचाराधीन और अन्य कैदियों को जेल ले जाने के लिए गाड़ी आई तो उनकी गिनती की गई। सुबह 40 कैदियों को पेशी पर लाया गया था। इनमें कुछ महिला विचाराधीन कैदी भी थीं। गिनती में चार कैदी कम मिले। इस पर पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया।
रिकार्ड बुक में एंट्री चेक की गई तो सभी के आने की एंट्री दर्ज थी। इस पर फौरन पूरे कोर्ट परिसर में तलाशी अभियान चलाया गया। साथ ही पुलिस कंट्रोल रूम और उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
पुलिस को पहले में ही पता चल गया था!
सूचना के बाद मौके पर डीएसपी लाइन सुमन कुमार, इंचार्ज बक्शीखाना चरणजीत सिंह और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मौके का मुआयना किया तो पाया कि लॉकअप रूम के टायलेट का ताला टूटा हुआ था।
इस पर संभवत: अंदेशा जताया जा रहा है कि चारों इसी रास्ते पानी के पाइप के सहारे ऊपरी मंजिल पर चढ़कर फरार हुए होंगे। पुलिस अधिकारियों ने ऊपर जाकर चेकिंग की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। वहीं पुलिस ने सेक्टर-43 स्थित आईएसबीटी पर भी सर्च अभियान चलाया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। बक्शीखाने में तैनात कर्मियों की शिकायत पर सेक्टर-36 थाना पुलिस में केस दर्ज कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार बक्शीखाने में तैनात पुलिसकर्मियों को चार कैदियों के फरार होने का पहले ही पता चल गया था, लेकिन पहले उन्होंने अपने स्तर पर ही कोर्ट परिसर और आसपास उनकी तलाश की। चार कैदियों के फरार होने की सूचना जैसे ही फैली तो बक्शीखाने में तैनात अन्य कर्मियों ने बताया कि ये मात्र अफवाह है। उन्होंने बताया कि चारों कैदी कोर्ट में पेशी पर गए हैं। साथ ही चेकिंग को रूटीन बताया।
सवालों के घेरे में: बक्शीखाने में तैनात पुलिसकर्मियों के अनुसार चारों को 2:20 मिनट पर लॉकअप रूम में डाल दिया गया था। इसके बाद वह कब फरार हुए उन्हें इसका पता नहीं लगा। जबकि, जांच में सामने आया है कि चारों लॉकअप रूम के टॉयलेट से ताला तोड़कर फरार हुए।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अदालत में सबसे सुरक्षित और जहां सबसे अधिक कर्मी तैनात हों वहां से चार कैदी ताला तोड़कर कैसे फरार हो गए। पुलिस के अनुसार चारों ताला तोड़कर फरार हुए तो ड्यूटी में तैनात कर्मियों में से किसी को भी ताला तोड़े जाने की आवाज तक नहीं आई। साथ ही चारों ने ताला तोड़ा भी तो किसी चीज से तोड़ा।
3 टीमें घरों में दबिश दी, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला
ये केस थे चारों पर दर्ज
अबरार खान- चोरी का मुकदमा (सेक्टर-36 थाना)
शाहने आलम- चोरी का मुकदमा (सेक्टर-31 थाना)
पंकज- खतरनाक हथियार से हमला करना (सेक्टर-36 थाना)
विक्की- धमकाना, वसूली, जानबूझकर चोट पहुंचाने की नियत से हमला करना (सेक्टर-26 थाना)
कोर्ट प्रशासन को लिख चुके थे इंचार्ज
जिला अदालत में बने जिस बक्शीखाने से कै दी फरार हुए हैं, उसमें पुरुष लॉकअप में बने टायलेट के पोर्शन की 5 फीट की दीवार को ऊंचा करने के लिए ज्यूडीशियल लॉकअप इंचार्ज इंस्पेक्टर चरणजीत सिंह ने डिस्ट्रिक कोर्ट प्रशासन को दो सितंबर को ही लेटर लिखा था।
इसमें उन्होंने बिजली के लटकते तारों की मरम्मत और लोहे के जंगले को भी ठीक करने की बात कही थी। साथ ही कहा गया था कि बिजली की खराब तारों के कारण टायलेट में अंधेरा रहता है और इन तारों के सहारे कोई भी कैदी फरार हो सकता है।
देर रात तक चली दबिश: सेक्टर-36 थाना पुलिस में चारों के खिलाफ पुलिस सुरक्षा से फरार होने का केस दर्ज कर लिया है। थाना पुलिस ने उनकी तलाश में 3 टीमें गठित कर उनके घरों में दबिश दी, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। समाचार लिखे जाने तक देर रात पुलिस टीमें उनकी तलाश में छापेमारी कर रही थीं।