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Chandigarh News: बिना फोन और एआई के 30 मिनट में गढ़ीं डरावनी कहानियां
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पेपर पिजन्स के सत्र में मयंक बने विजेता, सेक्टर 18 पार्क में हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
डिजिटल निर्भरता के दौर में लोगों की मौलिक रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेपर पिजन्स ने सेक्टर-18 पार्क में ‘डार्क पेजेस’ नाम से अनूठा हॉरर स्टोरी लेखन एवं वाचन सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने मोबाइल और एआई की मदद के बिना अपनी कल्पनाओं से डरावनी कहानियां लिखीं और सुनाईं। आयोजन के दौरान सभी प्रतिभागियों के मोबाइल फोन जमा करा लिए गए। इसके बाद उन्हें डायन, चुड़ैल, दानव और पिशाचिनी जैसे विचित्र किरदारों के साथ चाकू, लिपस्टिक और दस्ताने जैसी वस्तुएं दी गईं। इन सभी को कहानी में शामिल कर 30 मिनट के भीतर रचना तैयार करनी थी। समय पूरा होने पर प्रतिभागियों ने अपनी कहानियों का वाचन किया। मौलिकता, कल्पनाशीलता और किरदारों के इस्तेमाल के आधार पर प्रतिभागियों ने ही अंक दिए। मुकाबले में मयंक विजेता रहे। उन्हें नकद पुरस्कार और विशेष छूट कूपन देकर सम्मानित किया गया। संस्था के संस्थापक एवं आयोजक विक्रांत ने कहा कि आयोजन का मकसद मोबाइल से दूरी बनाकर लोगों की मौलिक कल्पनाशक्ति को सामने लाना था। गुरप्रीत कौर, रोहित सिंह परमार और महिमा कौशल ने भी रचनात्मकता और आमने-सामने संवाद के महत्व पर विचार साझा किए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डिजिटल निर्भरता के दौर में लोगों की मौलिक रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेपर पिजन्स ने सेक्टर-18 पार्क में ‘डार्क पेजेस’ नाम से अनूठा हॉरर स्टोरी लेखन एवं वाचन सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने मोबाइल और एआई की मदद के बिना अपनी कल्पनाओं से डरावनी कहानियां लिखीं और सुनाईं। आयोजन के दौरान सभी प्रतिभागियों के मोबाइल फोन जमा करा लिए गए। इसके बाद उन्हें डायन, चुड़ैल, दानव और पिशाचिनी जैसे विचित्र किरदारों के साथ चाकू, लिपस्टिक और दस्ताने जैसी वस्तुएं दी गईं। इन सभी को कहानी में शामिल कर 30 मिनट के भीतर रचना तैयार करनी थी। समय पूरा होने पर प्रतिभागियों ने अपनी कहानियों का वाचन किया। मौलिकता, कल्पनाशीलता और किरदारों के इस्तेमाल के आधार पर प्रतिभागियों ने ही अंक दिए। मुकाबले में मयंक विजेता रहे। उन्हें नकद पुरस्कार और विशेष छूट कूपन देकर सम्मानित किया गया। संस्था के संस्थापक एवं आयोजक विक्रांत ने कहा कि आयोजन का मकसद मोबाइल से दूरी बनाकर लोगों की मौलिक कल्पनाशक्ति को सामने लाना था। गुरप्रीत कौर, रोहित सिंह परमार और महिमा कौशल ने भी रचनात्मकता और आमने-सामने संवाद के महत्व पर विचार साझा किए।