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कोरोनाः दवा कारोबार पर पड़ने लगा है लॉकडाउन का असर, नहीं आ रहा कच्चा माल, प्रोडक्शन बंद
Mon, 13 Apr 2020 01:41 PM IST
खुशबू गोयल
दीपक शाही, जीरकपुर
दीपक शाही, जीरकपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 13 Apr 2020 01:41 PM IST
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कोरोना वायरस का असर दवा कारोबार पर भी पड़ने लगा है। वर्तमान में चीन से दवाओं का कच्चा माल नहीं आने के कारण परेशानी बढ़ने लगी है। बद्दी, नालागढ़, दोतीवाला, काला, उत्तरांचल और जम्मू-कश्मीर में दवाओं का प्रोडक्शन बंद हो गया है। जिसके चलते ट्राईसिटी में दवा कारोबारियों के पास दवा की सप्लाई नहीं आ रही है। जिसमें जीरकपुर की करीब 300 से ज्यादा सप्लाई करने वाली दवा कंपनियां प्रभावित हैं। वे पुराने स्टॉक से काम चला रहे हैं। बता दें कि चीन दवा के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है। बीमारी फैलने के डर से वहां से दवाओं का कच्चा माल नहीं आ रहा है।
19 दिनों में महज दो बार हुई सप्लाई
लॉकडाउन के दौरान जीरकपुर में बद्दी और हरिद्वार से महज दो बार ही दवाओं का खेप आई है। वैसे आम दिनों में सप्लाई खेप की संख्या महीने में करीब 20 से 25 के बीच होती है, इसकी वहज दवाओं के प्रोडक्शन का बंद होना बताया जा रहा है। क्योंकि एक ओर कोरोना संक्रमण के चलते कंपनियों को काम करने वाले मुलाजिम नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन से कच्चा माल भी नहीं आ रहा है।
जिसके चलते सप्लाई चेन टूटने लगी है।
बता दें कि जीरकपुर से पूरे देश के अलग-अलग राज्यों (पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, यूपी सहित अन्य जगह) में दवा की सप्लाई की जा रही है। आने वाले समय में लॉकडाउन के चलते प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर के बीच की चेन टूटने की पूरी संभावना बताई जा रही है। हालांकि ट्रांस्पोर्टेशन की सुविधा मिलने से दवा कारोबारियों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन इसका व्यापक असर आने वाले दवा कारोबार पर भी पड़ सकता है। क्योंकि उदाहरण के तौर पर देखें तो पहले जहां 5 करोड़ रुपये की दवाओं का सेल होती थी, अब वह घटकर ढ़ाई करोड़ रुपये हो गई है।
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19 दिनों में महज दो बार हुई सप्लाई
लॉकडाउन के दौरान जीरकपुर में बद्दी और हरिद्वार से महज दो बार ही दवाओं का खेप आई है। वैसे आम दिनों में सप्लाई खेप की संख्या महीने में करीब 20 से 25 के बीच होती है, इसकी वहज दवाओं के प्रोडक्शन का बंद होना बताया जा रहा है। क्योंकि एक ओर कोरोना संक्रमण के चलते कंपनियों को काम करने वाले मुलाजिम नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन से कच्चा माल भी नहीं आ रहा है।
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जिसके चलते सप्लाई चेन टूटने लगी है।
बता दें कि जीरकपुर से पूरे देश के अलग-अलग राज्यों (पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, यूपी सहित अन्य जगह) में दवा की सप्लाई की जा रही है। आने वाले समय में लॉकडाउन के चलते प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर के बीच की चेन टूटने की पूरी संभावना बताई जा रही है। हालांकि ट्रांस्पोर्टेशन की सुविधा मिलने से दवा कारोबारियों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन इसका व्यापक असर आने वाले दवा कारोबार पर भी पड़ सकता है। क्योंकि उदाहरण के तौर पर देखें तो पहले जहां 5 करोड़ रुपये की दवाओं का सेल होती थी, अब वह घटकर ढ़ाई करोड़ रुपये हो गई है।
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चीन से 80 फीसदी भारत आता है कच्चा माल
दवा उद्योग से जुड़े संजीव कुमार बंसल ने बताया कि दवा बनाने के लिए करीब 80 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आता है। फिलहाल दवा उद्योग ट्रेडर्स के पास मौजूद स्टॉक पर ही निर्भर है। आमतौर पर इनके पास 2 से 3 महीने का स्टॉक रहता है। हालांकि सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस दिशा में कार्य शुरू हो जाएगा।
बढ़ सकती है दिक्कत
दवा उद्योग से जुड़े जीरकपुर के राकेश बंसल ने बताया कि फिलहाल अधिक समस्या नहीं है। कच्चे माल की सप्लाई अधिक समय के लिए बंद होती है तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। घाटे से बचने के लिए उद्यमी दवाओं का निर्माण करना बंद कर सकते हैं। ऐसे में दवाओं का सप्लाई प्रभावित होगी।
मेडिकल स्टाफ की तरह कोरोना से जंग
जीरकपुर में 300 से ज्यादा फार्मा कंपनियां काम कर रही हैं। जो बड़ी कंपनियां हैं, उनमें ईएसआई का लाभ मुलाजिमों को मिल रहा है, लेकिन कुछ छोटी कंपनियां भी हैं, जिनमें मुलाजिमों की संख्या 5 से 7 के बीच है। ऐसे में मुलाजिमों को ईएसआई का लाभ नहीं मिल पा रहा है, लेकिन वे भी मेडिकल स्टाफ तरह कोरोना के जंग में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्योंकि दवा रिटेलरों के पास तक दवा पहुंचाने के बीच की कड़ी में ये मुलाजिम शामिल हैं। इसलिए सी एंड एफएस एसोसिएशन ने पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को जीरकपुर के छोटे फार्मा कंपनियों में काम करने वाले मुलाजिमों के इंश्योरेंस की मांग की है। जिन्हें ईएसआई का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बढ़ सकती है दिक्कत
दवा उद्योग से जुड़े जीरकपुर के राकेश बंसल ने बताया कि फिलहाल अधिक समस्या नहीं है। कच्चे माल की सप्लाई अधिक समय के लिए बंद होती है तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। घाटे से बचने के लिए उद्यमी दवाओं का निर्माण करना बंद कर सकते हैं। ऐसे में दवाओं का सप्लाई प्रभावित होगी।
मेडिकल स्टाफ की तरह कोरोना से जंग
जीरकपुर में 300 से ज्यादा फार्मा कंपनियां काम कर रही हैं। जो बड़ी कंपनियां हैं, उनमें ईएसआई का लाभ मुलाजिमों को मिल रहा है, लेकिन कुछ छोटी कंपनियां भी हैं, जिनमें मुलाजिमों की संख्या 5 से 7 के बीच है। ऐसे में मुलाजिमों को ईएसआई का लाभ नहीं मिल पा रहा है, लेकिन वे भी मेडिकल स्टाफ तरह कोरोना के जंग में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्योंकि दवा रिटेलरों के पास तक दवा पहुंचाने के बीच की कड़ी में ये मुलाजिम शामिल हैं। इसलिए सी एंड एफएस एसोसिएशन ने पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को जीरकपुर के छोटे फार्मा कंपनियों में काम करने वाले मुलाजिमों के इंश्योरेंस की मांग की है। जिन्हें ईएसआई का लाभ नहीं मिल पा रहा है।