चंडीगढ़: अमेरिका से लौटी बेटी, स्वास्थ्य सचिव के पूरे परिवार को किया होम क्वारंटीन
स्वास्थ्य सचिव व गृह सचिव अरुण कुमार गुप्ता के पूरे परिवार को 14 दिन के लिए होम कोरेंटाइन किया गया है। शुक्रवार को उनकी बेटी अमेरिका से लौटी हैं, जिनके संपर्क में आने के बाद पूरे परिवार को सरकार के आदेशानुसार होम कोरेंटाइन किया गया है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा ने भी खुद को 14 दिन के लिए होम आइसोलेट कर लिया है जबकि उनके बेटे को जीएमसीएच-32 के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, अरुण कुमार गुप्ता की बेटी शुक्रवार रात अमेरिका से लौटी हैं। हालांकि उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं लेकिन भारत सरकार के आदेशानुसार विदेश से आने वाले या उनके संपर्क में आने वाले सभी व्यक्तियों को कोरेंटाइन करना अनिवार्य है, इसलिए पूरे परिवार को 14 दिन के लिए अलग-थलग कर दिया है।
अगर इन दिनों में कोई लक्षण सामने आते हैं तो जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे। वहीं, सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार के कुछ सीनियर अफसरों को भी चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर कोरेंटाइन किया गया है। प्रशासन के अधिकारियों के बीच भी अब दहशत का माहौल है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कोरोना को रोकने के लिए कुछ बड़े और सख्त फैसले लिए जा सकते हैं।
एनपी शर्मा के बेटे को किया कोरेंटाइन
सूत्रों के अनुसार, शहर की 23 वर्षीय युवती जो कि पिछले रविवार को लंदन से चंडीगढ़ पहुंची थी, उसके संपर्क में आने की वजह से ही एनपी शर्मा के बेटे को जीएमसीएच-32 के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक उनमें कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। बेटा एनपी शर्मा के साथ ही रहता था, इसलिए उन्हें भी कोरेंटाइन किया गया है। यहीं नहीं, नगर निगम के अधिकारियों में इस बात को लेकर भी खलबली मची हुई है क्योंकि बीते दिनों में एनपी शर्मा कई अधिकारियों और लोगों से मिले हैं।
आइसोलेशन ही सबसे बेहतर तरीका : डॉक्टर
जानकारों का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को आइसोलेशन के जरिए ही कम किया जा सकता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में आइसोलेशन ही बचाव का सबसे सही तरीका है। इस बारे में डॉक्टर्स का कहना है कि सभी मरीजों को विशेष ध्यान यानी इंटेसिव केयर की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन सभी को एहतियातन आइसोलेट करना पड़ेगा। कोरेंटाइन में उन व्यक्तियों को रखा जाता है जिनमें बीमारी के संकेत दिख रहे हों या फिर वो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों, लेकिन वह स्वस्थ दिख रहे हों।