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'उड़ता पंजाब' पर राजनीति तेज, आप ने शिअद पर साधा निशाना

Wed, 08 Jun 2016 05:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 08 Jun 2016 05:54 PM IST
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conflict on movie Udta Punjab, AAP statement against SAD and BJP government
आप नेता सुखपाल खैहरा - फोटो : फाइल फोटो

चुनावी वर्ष में ड्रग विषय पर बनी फिल्म 'उड़ता पंजाब' पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। आप ने शिअद पर साधा निशाना। आम आदमी पार्टी ने कहा है कि फिल्म उड़ता पंजाब सूबे की सही तसवीर पेश करेगी, लेकिन अकाली दल जानबूझ कर झूठे बहाने लगाकर फिल्म को रोकने की कोशिश कर रहा है।

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पंजाब प्रभारी संजय सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला कर रही हैं। फिल्म उड़ता पंजाब राज्य की सही तसवीर बयान करती है, नशे की गिरफ्त में आए युवाओं केहालात बयां करती है। जब से फिल्म के आने की सूचना मिली है, अकाली दल झूठे बहाने लगाकर इसे रोकने की कोशिश कर रहा है। कह रहा है कि इससे पंजाब की बदनामी होगी।
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जबकि, राज्य को सैंड और लैंड माफिया के जरिए लूटने वाले पंजाब को बदनाम कर रहे हैं। तमाम सबूत आए, ईडी की पूछताछ में ड्रग डीलर ने कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया का नाम लिया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह फिल्म देख कर पंजाब के लोग सचेत होंगे, उनमें नशे के खिलाफ लड़ने की ताकत आएगी। इसमें कटौती अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट होगी।
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सिख दंगों पर गठित एसआईटी ने कुछ नहीं किया संजय सिंह ने कहा कि सिख संगठनों की मांग थी कि 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने को एसआईटी बनाने की मांग की थी। पर किसी सरकार ने कुछ नहीं किया। 2013 में पहली बार आप की सरकार बनी तो एसआईटी गठित की गई। 2015 में दोबारा अरविंद केजरीवाल ने जब शपथ लेनी थी तो केंद्र सरकार ने एसआईटी गठित कर दी, लेकिन आज तक न तो एसआईटी ने किसी आरोपी को बुलाया, न तफ्तीश की। दिल्ली पुलिस, सीबीआई या किसी भी जांच एजेंसी से कोई फाइल तक नहीं ली गई। न ही सीएम प्रकाश सिंह बादल ने यह जानने की कोशिश की कि डेढ़ साल में एसआईटी ने क्या किया। अब केजरीवाल ने इस मामले में पीएम को पत्र लिखा है कि या तो एसआईटी कुछ करे, या दिल्ली सरकार को एसआईटी बनाने की इजाजत दी जाए।

सुखपाल खैरा का आरोप, भाजपा इस मुद्दे पर सिर्फ बयानबाजी कर रही है

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सुखपाल खैरा - फोटो : file photo

पार्टी प्रवक्ता सुखपाल खैरा ने आरटीआई जानकारी के हवाले से बताया कि भाजपा इस मुद्दे पर सिर्फ बयानबाजी कर रही है। एसआईटी का कार्यकाल छह माह का था। इसे देश भर की पुलिस व एजेंसियों की जांच रिपोर्ट की पड़ताल करनी थी ताकि जो लोग एफआईआर में आने से रह गए हैं, उन्हें भी शामिल किया जाए।

गस्त 2015 में बिना कोई वजह बताए इसका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया, वह भी अब खत्म होने वाला है। खैरा ने कहा कि जांच के लिए गठित जैन-अग्रवाल कमेटी की रिपोर्ट में 14 एफआईआर का जिक्र है, जिनमें भाजपा व आरएसएस के 49 नेता नामजद थे।

इसीलिए केंद्र सरकार इस पर कार्रवाई नहीं कर रही है। खैरा ने कहा कि जब ईडी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह केबेटे को तलब किया है तो उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि मजीठिया के मामले में कांग्रेस ने पूरे पंजाब में धरने दिए थे। अब कांग्रेस दोहरे मापदंड अपना रही है।

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