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Highcourt: अलॉट की गई भूमि पर उद्योग की जगह काट दी कॉलोनी, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Fri, 02 Feb 2024 02:15 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 02 Feb 2024 02:15 PM IST
सार

द्योग विभाग ने मान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स को ढंडारीकलां में 60 एकड़ भूमि औद्योगिक उद्देश्य से अलॉट की थी। इसे बाद में 68 एकड़ कर दिया गया था लेकिन वर्धमान पॉलिटेक्स लिमिटेड ने इस भूमि में से 19.42 एकड़ पर नगर निगम से सीएलयू लेकर रिहायशी कॉलोनी बसा दी। 

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Colony cut off in place of industry on allotted land in Ludhiana, High Court issued notice
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

वर्धमान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स लुधियाना को औद्योगिक उद्देश्य के लिए दी गई भूमि पर रिहायशी कॉलोनी स्थापित करने व तय भूमि से अधिक अलॉटमेंट को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी रविंदर कटारिया ने एडवोकेट दीपक अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उद्योग विभाग ने मान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स को ढंडारीकलां में 60 एकड़ भूमि औद्योगिक उद्देश्य से अलॉट की थी। इसे बाद में 68 एकड़ कर दिया गया था लेकिन वर्धमान पॉलिटेक्स लिमिटेड ने इस भूमि में से 19.42 एकड़ पर नगर निगम से सीएलयू लेकर रिहायशी कॉलोनी बसा दी। 
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याची ने कहा कि वर्धमान पॉलिटेक्स तो अलॉटी भी नहीं था ऐसे में किस प्रकार उसे इस उद्देश्य के लिए सीएलयू जारी कर दिया गया। साथ ही उद्योग के लिए दी गई भूमि का कैसे रिहायशी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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इसके साथ ही यह भी बताया कि भूमि उद्योग स्थापित करने के लिए दी गई थी लेकिन वहां पर कोई उद्योग आज तक स्थापित ही नहीं किया गया। साथ ही कागजों में जो भूमि 68 एकड़ दिखाई गई है असल में वह 71.3 एकड़ है। ऐसे में करोड़ों की जमीन का बिना किसी भुगतान के कंपनी इस्तेमाल कर रही है।


याची ने इस बारे में सरकार को मांगपत्र भी दिया था लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर बताया जाए कि भूमि पर उद्योग है या नहीं।
 
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