'मोदी ने मंत्री बनाया...क्या सोनिया का सम्मान छोड़ दूं'
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छोटूराम जयंती समारोह में हूटिंग से परेशान केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां का दर्द एक बार फिर झलक आया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने मुझे केबिनेट मंत्री बनाया है तो इसे कहने में गलत क्या है।
मैं 40 साल तक कांग्रेस में रहा, लेकिन यहां मुझे कभी बड़ा पद नहीं मिला। सोनिया ने मुझे केंद्रीय मंत्री नहीं बनाया तो क्या मैं उनका सम्मान करना छोड़ दूं?
हूटिंग से परेशान केंद्रीय मंत्री व छोटूराम सोसायटी के अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह डूमरखां ने अपने भाषण की शुरुआत भद्रजनों व संवेदनशील श्रोताओं जैसे शब्दों से की। कहा, राजनीति अपनी जगह है, एक-दूसरे का सम्मान व भाईचारा अपनी जगह।
उनके आग्रह पर ही ट्रस्ट ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कार्यक्रम का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया था। क्योंकि 10 साल से हुड्डा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते आ रहे हैं तो अब क्यों नहीं। बोले, 40 साल वे कांग्रेस में रहे, लेकिन सोनिया ने मंत्री नहीं बनाया। इसका मतलब यह नहीं है कि वे सोनिया का सम्मान करना छोड़ दें। उन्होंने कहा कि जिस कॉलेज में वे पढ़े, उसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनसे दो क्लास पीछे थे। मैं ही उन्हें पढ़ाता था। वे पहले मुख्यमंत्री बन गए, इसमें क्या है। कहा कि सर छोटूराम के समय भी प्रदेश में रोहतक की चर्चा रहती थी। आज भी रहती है। आगे रहेगी या नहीं इसका पता नहीं।
मैंने तो मंत्री बनवाने खातर कसर नहीं छोड़ी
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पौने चार बजे भाषण शुरू किया। उस समय तक केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु मंच से रवाना हो चुके थे। हुड्डा के भाषण शुरू करने तक उचाना विधायक और बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को छोड़कर सभी भाजपाइयों ने मंच खाली कर दिया था। पूर्व सीएम हुड्डा ने सबसे पहले कहा कि भाई बहुत कुछ कह गया, जवाब तो मंच से ही देना था। खैर भाभी जी हैं, वे भाई तक बात पहुंचा देंगी। मैंने भाई को केंद्र में मंत्री बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
कहा, उस समय और भी मंत्री थे, लेकिन छोटूराम को ही क्यों याद किया जाता है, क्योंकि उन्होंने जाति व धर्म से ऊपर उठकर किसानों को उनकी जमीन व हक दिलवाया था। केंद्र सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का समर्थन करते हुए हुड्डा ने कहा कि यह अभियान उन्होंने भी चलाया था, लेकिन आज सरकार को किसान बचाओ अभियान भी चलाना चाहिए, क्योंकि किसान बिजली, पानी व खाद की कमी और फसलों का उचित मूल्य न मिलने के कारण कमजोर होता जा रहा है।
बीरेंद्र सिंह ने कहानी सुनाई
केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनके नाना छोटूराम ने किसानों के लिए रक्तहीन क्रांति की। उस समय साहूकारों ने जमीनों को गिरवी रख रखा था। किसान तो केवल फसल पैदा करते थे। छोटूराम ने अंग्रेजों को किसानों को जमीन देने के लिए कानून बनाने पर मजबूर कर दिया था। केंद्रीय मंत्री ने कहानी सुनाते हुए कहा कि, जब वे चंडीगढ़ में पढ़ाई करते थे तो मां ने एक बाबा के हाथ दो किलो घी भेजा। बाबा ने घी मकान मालकिन को दे दिया। जब वह घी लेने गया तो मकान मालकिन ने कहा कि क्या आप रोहतक के रहने वाले है। एक रोहतक का छोटूराम भी था, जिसकी वजह से म्हारा ब्याज व बट्टे का धंधा बंद हो गया।
हाइवे 10 को नाम छोटूराम राष्ट्रीय मार्ग रखा जाए
छोटूराम सोसायटी ने केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी एवं विधायक प्रेमलता को सोसायटी की ओर से एक मांग सौंपा। इसमें दिल्ली से सर छोटूराम की पैतृक भूमि सांपला से होते हुए रोहतक, हिसार से फाजिल्का तक गुजरने वाले हाइवे नंबर 10 का नाम छोटूराम के नाम पर रखने की मांग की। साथ में मांग की कि कहीं भी छोटूराम के नाम पर सरदार पटेल की तरह बड़ा स्मारक बनाकर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए।