सर्वे में खुलासा, सेक्स जानते हैं बच्चे पर हेल्थ नहीं
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सिटी ब्यूटीफुल के किशोर (10 से 19 वर्ष) सेक्स एजुकेशन के बारे में पूरी तरह से अवेयर हैं। उन्हें मालूम है कि एचआईवी क्या होता है? एड्स कैसे फैलता है? गर्भ निरोधक गोलियां कब खाईं जाती हैं? इसी प्रकार की अन्य जानकारी के बारे में भी वे जागरूक हैं। इसके विपरीत उनमें हेल्थ अवेयरनेस की भारी कमी है। न तो उन्हें हेल्दी फूड के बारे में पता है और न ही यह मालूम है कि नशा करने से क्या-क्या नुकसान हो सकता है। यह जानकारी पीजीआई की कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एक स्टडी में सामने आया है। विभाग ने यह स्टडी चंडीगढ़ के 90 सरकारी स्कूलों में की थी।
बच्चों को हेल्थ से संबंधित जानकारी देना बहुत जरूरी
नेशनल रुरल हेल्थ मिशन ने चंडीगढ़ में साल 2005-11 तक विशेष तौर पर किशोरावस्था में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए अभियान चलाया था। सरकार की इस योजना का क्या फायदा हुआ, यह जानने के लिए ही स्टडी की गई थी। यह अध्ययन करने वाली डॉ. मधु गुप्ता ने बताया कि किशोरावस्था में कई तरह के शारीरिक बदलाव आते हैं। दिमाग भी विकसित होने की प्रक्रिया में होता है, इसलिए इस उम्र में ही हेल्थ से संबंधित जानकारी देना बहुत जरूरी है।
ड्रॉप आउट स्टूडेंट भी सेक्स एजुकेशन में अव्वल
स्टडी में ड्रॉप आउट स्टूडेंट को भी शामिल किया गया है। ये स्टूडेंट भी सेक्स एजुकेशन के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। इनमें खास तौर पर चंडीगढ़ के अरबन और स्लम एरिया के स्टूडेंट काफी जागरूक हैं। वहीं सिटी ब्यूटीफुल के रुरल एरिया के बच्चे न तो सेक्स एजुकेशन के बारे में अवेयर हैं और न ही हेल्थ एजुकेशन के बारे में। इनमें दोनों ही शिक्षाओं की भारी कमी है।
ग्लोबल ट्रेंड से अलग राह पर किशोर
वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन और अन्य संस्था प्रीवेंटिव हेल्थ पर ध्यान दे रही हैं ताकि बीमारियों का बोझ कम किया जा सके। यदि बीमारियों के प्रति लोग जागरूक होंगे, तो वे रोगों से दूर रहने के लिए उचित कदम उठाएंगे। स्टडी में यह भी सामने आया है कि चंडीगढ़ के अरबन स्लम व रुरल में रहने वाले स्टूडेंट क्यूरेटिव हेल्थ (बीमारी के बाद जागना) की राह पर है। जब वे बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं तो वे जागरूक होते हैं और इलाज कराते हैं।