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पंजाब में खत्म होंगे भूमि विवाद: अब असल मालिकों को मिलेगा संपत्ति का हक, डोर टू डोर डिजिटल ऑनरशिप मैपिंग शुरू

Thu, 27 Aug 2026 09:34 AM IST
Nivedita राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 27 Aug 2026 09:34 AM IST
सार

पंजाब सरकार ने परियोजना के लिए छह शहरों को चुना था जिसमें मोहाली और डेराबस्सी भी शामिल था लेकिन इन दो शहरों में मंजूरी न मिलने के कारण फिलहाल सिर्फ चार शहरों में ही परियोजना शुरू की जा रही है।  

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Land disputes in Punjab to end Genuine owners to get property rights door-to-door digital ownership mapping
पंजाब में डोर टू डोर सर्वे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के शहरी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े विवादों का निपटारा होगा और साथ ही असल मालिकों को संपत्ति हक मिलेगा जिसके लिए स्थानीय निकाय विभाग ने डोर-टू-डोर सर्वे शुरू कर दिया है।

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पायलट प्रोजेक्ट के तहत बनूड, राजपुरा, खन्ना और बरनाला में यह परियोजना शुरू की गई है जिसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इन चार शहरों में 2 लाख संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है।

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यह परियोजना केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर शहरी इलाकों में लागू की जा रही है। पंजाब सरकार परियोजना के लिए छह शहरों को चुना था जिसमें मोहाली और डेराबस्सी भी शामिल था लेकिन इन दो शहरों में मंजूरी न मिलने के कारण फिलहाल सिर्फ चार शहरों में ही परियोजना शुरू की जा रही है। केंद्र सरकार ने इस पूरी परियोजना के लिए फंड उपलब्ध कराया है जबकि स्थानीय निकाय विभाग सर्वे का काम देख रहा है।

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रोवर मशीन का उपयोग सैटेलाइट संकेतों और आधुनिक तकनीक के जरिये इंच-इंच जमीन की सटीक माप और सीमांकन के लिए किया जा रहा है ताकि एक सही भूमि रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। सर्वेक्षण टीमों को एक विशेष टैबलेट दिया गया है जिसमें सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हैं और यह टैबलेट ब्लूटूथ के जरिये रोवर मशीन से जुड़ा होता है।

सर्वेक्षण के लिए 71 टीमों को किया तैनात
परियोजना के तहत संपत्तियों का ड्रोन से डिजिटल सर्वे पहले पूरा हो चुका है और अब सिर्फ डोर-टू-डोर रोवर सर्वे जारी है जिसके लिए 71 टीमों को तैनात किया गया है जो आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और अन्य संपत्तियों का दौरा कर कब्जाधारियों की सूची तैयार करेंगी।

राजस्व विभाग पटवारियों की मदद लेगा और तैयार किए गए डेटा का सत्यापन उनके रिकॉर्ड से किया जाएगा, जिससे असल मालिकों की पहचान में मदद मिलेगी। इसके अलावा सर्वेक्षण पूरा होने के बाद रिकॉर्ड को फाइनल करने से पहले लोगों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी जाएंगी ताकि अगर इनमें किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत है तो संशोधन किया जा सके। इसके लिए जिला स्तर पर राजस्व विभाग की तरफ से समितियां भी बनाई जाएंगी।

भू-माफिया और फर्जीवाड़े पर भी लाएगी अंकुश
यह परियोजना भू-माफिया और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाएगी, भूमि की लूट बंद होगी और भूमि मालिक अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा ऑनलाइन देख सकेंगे। विभाग विवादित जमीनों के निपटारे के लिए डिजिटल व्यवस्था तैयार करेगा। साथ ही, अवैध कब्जों का पता लगाकर उन्हें हटाने में भी मदद मिलेगी। प्रत्येक संपत्ति का क्षेत्रफल दर्ज कर उसे एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे लाभार्थी का पूरा पता डिजिटल हो जाएगा और जमीन-जायदाद के झगड़ों में कमी आएगी। डिजिटल रूप से तैयार किए गए नक्शों और प्रॉपर्टी कार्डों को कानूनी मान्यता मिलेगी, जिससे संपत्ति की खरीद-बिक्री व पंजीकरण सरल होता है।

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