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मां मुकर गई थी, पर 7 साल की बेटी बयानों पर अड़ी रही...दुराचारी बाप अब जेल में रहेगा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 May 2018 01:26 PM IST
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child rape
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मां तो मुकर गई थी, लेकिन 7 साल की बेटी अपने बयानों पर अड़ी रही और उसने दुराचारी पिता के खिलाफ जंग जीत ली। मामला चंडीगढ़ का है। सात साल की मासूम बच्ची से दुराचार के मामले में जिला अदालत ने दोषी 29 वर्षीय सेक्टर-25 निवासी पिता को 15 साल कड़ी कैद की सजा सुनाई है।
साथ ही दोषी पर 1.05 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने इसमें से एक लाख रुपये बतौर मुआवजा पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। मामले में खास बात यह रही कि बच्ची की मां एवं शिकायतकर्ता अदालत में बयान से मुकर गई थी, लेकिन मासूम ने पिता की हरकतों के बारे में खुलकर बयान दिया।
यहीं बयान दोषी के गुनाह को साबित करने के लिए काफी थे। इससे पहले सेक्टर-11 थाना पुलिस ने दोषी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (2), (एफ) (1) और पॉक्सो एक्ट 6 के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि अदालत ने उसे पॉक्सो एक्ट 6 में दोषी करार दिया और सजा सुनाई है।
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साथ ही दोषी पर 1.05 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने इसमें से एक लाख रुपये बतौर मुआवजा पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। मामले में खास बात यह रही कि बच्ची की मां एवं शिकायतकर्ता अदालत में बयान से मुकर गई थी, लेकिन मासूम ने पिता की हरकतों के बारे में खुलकर बयान दिया।
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यहीं बयान दोषी के गुनाह को साबित करने के लिए काफी थे। इससे पहले सेक्टर-11 थाना पुलिस ने दोषी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (2), (एफ) (1) और पॉक्सो एक्ट 6 के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि अदालत ने उसे पॉक्सो एक्ट 6 में दोषी करार दिया और सजा सुनाई है।
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मां काम पर चली जाती थी तो पीछे से करता था रेप
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सेक्टर-11 थाना पुलिस ने 17 अक्तूबर, 2017 को पीड़ित बच्ची की मां की शिकायत के आधार पर बच्ची का मेडिकल करवाने के बाद उसके पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित बच्ची की मां ने आरोप लगाया था कि वह प्राइवेट नौकरी करती है और उसका पति ढोल बजाने का काम करता है।
उसका पति अधिकतर शाम के समय ही काम पर जाता था और दिन के समय अधिकतर घर पर ही रहता था, जबकि वह दिन के समय अपने काम पर चली जाती थी। एक दिन तबियत खराब होने के कारण वह काम पर नहीं गई थी। इस दौरान उसका 8 साल का बेटा और 7 साल की बेटी दोनों दोपहर के समय स्कूल से घर लौटे थे।
घर पहुंचने के बाद उसकी बच्ची ने पेट में दर्द होने की शिकायत की। इस पर वह बच्ची का चेकअप करवाने के लिए उसे लेकर पीजीआई पहुंची। बच्ची ने बताया कि दो दिन पहले उसके पिता ने उसे हवस का शिकार बनाया था। साथ ही उसे धमकाते हुए इस बारे में किसी को भी बताने से मना किया था। इस पर मां ने पुलिस को इसकी शिकायत दी थी।
उसका पति अधिकतर शाम के समय ही काम पर जाता था और दिन के समय अधिकतर घर पर ही रहता था, जबकि वह दिन के समय अपने काम पर चली जाती थी। एक दिन तबियत खराब होने के कारण वह काम पर नहीं गई थी। इस दौरान उसका 8 साल का बेटा और 7 साल की बेटी दोनों दोपहर के समय स्कूल से घर लौटे थे।
घर पहुंचने के बाद उसकी बच्ची ने पेट में दर्द होने की शिकायत की। इस पर वह बच्ची का चेकअप करवाने के लिए उसे लेकर पीजीआई पहुंची। बच्ची ने बताया कि दो दिन पहले उसके पिता ने उसे हवस का शिकार बनाया था। साथ ही उसे धमकाते हुए इस बारे में किसी को भी बताने से मना किया था। इस पर मां ने पुलिस को इसकी शिकायत दी थी।
ऐसा अपराध करने वाले दया के योग्य नहीं : अदालत
कोर्ट
एक पिता जो परिवार का संरक्षक होता है, उसी ने अपनी नाबालिग बेटी का शोषण किया। यह न केवल एक गंभीर मामला है, बल्कि परिवार के लिए शर्मनाक भी है। पिता ने बच्ची का भविष्य ही खराब कर दिया है। इसका खामियाजा उसे लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा।
पीड़िता की भावनात्मक प्रतिक्रिया और आत्मा को इससे नुकसान पहुंचा है। उसे भविष्य में सामाजिक और शारीरिक तौर पर परेशानी हो सकती है। ऐसा अपराध करने वाले समाज में किसी तरह की दया के योग्य नहीं हो सकते।
पीड़िता की भावनात्मक प्रतिक्रिया और आत्मा को इससे नुकसान पहुंचा है। उसे भविष्य में सामाजिक और शारीरिक तौर पर परेशानी हो सकती है। ऐसा अपराध करने वाले समाज में किसी तरह की दया के योग्य नहीं हो सकते।