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सुलह की बात: पंजाब-हरियाणा के बीच फिर होगी एसवाईएल पर बैठक, केंद्रीय मंत्री बनेंगे मध्यस्थ
Fri, 18 Jun 2021 03:10 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 18 Jun 2021 03:10 PM IST
सार
कोरोना काल से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंजाब और हरियाणा के सीएम की एसवाइएल नहर निर्माण के मुद्दे पर बैठक हुई थी। तब यह निर्णय लिया गया था कि एसवाइएल को लेकर पंजाब के साथ फिर बैठक होगी।
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दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत से मिलते मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) पर हरियाणा-पंजाब सरकार के बीच जल्द दोबारा बातचीत का दौर शुरू हो सकता है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच बैठक का समय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तय कराएंगे। शेखावत इसके लिए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को पत्र लिखेंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात के बाद जानकारी दी।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि शेखावत के साथ उनकी एसवाईएल समेत प्रदेश से जुड़े अनेक जल मामलों पर चर्चा हुई। कोरोना काल से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंजाब और हरियाणा के सीएम की एसवाइएल नहर निर्माण के मुद्दे पर बैठक हुई थी। तब यह निर्णय लिया गया था कि एसवाइएल को लेकर पंजाब के साथ फिर बैठक होगी। अब केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पंजाब के सीएम को पत्र लिखकर इस बैठक का समय तय कराएंगे। सरस्वती प्रोजेक्ट का डिजाइन 15 जुलाई तक केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय तैयार कराएगा। इसके लिए 500 करोड़ रुपये की राशि केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी। एनआरसीपी के माध्यम से यह फंड मिलेगा।
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलोजी की तरफ से एक संस्तुति आई है कि यमुना में पानी बढ़ाया जाए। अभी यमुना में 10 क्यूसिक पानी ही छोड़ा जाता है। इसका कारण है कि यमुना में पानी कम मात्रा में आ रहा है। जल शक्ति मंत्रालय को यह बताया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलोजी की संस्तुति को पूरा नहीं किया जा सकेगा। सीएम ने कहा कि यदि अपर यमुना के तीन प्रोजेक्ट लखवार, किशाऊ और रेणुका का निर्माण हो जाता है और पानी अतिरिक्त मिलता है तो फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलोजी के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ा जा सकता है।
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मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार ने आग्रह किया है कि एनसीआर में कुछ बड़ी वाटर बाडी बनाई जाएं। इनके लिए सोनीपत और रोहतक में 15-15 एकड़ जमीन हरियाणा सरकार देगी। इनमें वाटर बाडी बनाने का काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। हरियाणा में 130 महाग्राम हैं। जल जीवन मिशन की योजना के तहत 28 लाख परिवारों को नल से जल उपलब्ध करा चुके हैं।
आठ जिलों के गांवों में नल से जल मिल रहा है। हरियाणा देश में सबसे पहले नल से जल योजना को पूरा करेगा। इस योजना के तहत महाग्राम में 55 लीटर पानी प्रति व्यक्ति दिया जाता है, मगर यह कम पड़ता है। इसलिए यहां केंद्र सरकार 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति उपलब्ध कराए। 130 महाग्राम हैं और 25 करोड़ रुपये के हिसाब से 3250 करोड़ रुपये की राशि बनती है। यह व्यवस्था भी जल शक्ति मंत्रालय करे। इसके अलावा महाग्राम में सीवरेज व्यवस्था भी इसी योजना के तहत उपलब्ध कराई जाए। इस बाबत भी आग्रह केंद्रीय मंत्री से किया है।
नए उद्योग का लाइसेंस पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी कनेक्शन के बाद
एनसीआर के 14 जिलों में नई इंडस्ट्री को लाइसेंस तभी मिलेगा जब पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी का कनेक्शन होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस मुद्दे पर शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से भी मुलाकात की। उन्होंने मांग की है कि जिन जिलों में गैस पाइप लाइन का नेटवर्क नहीं है, वहां यह छूट दी जाए। पानीपत के उद्यमियों सहित आठ जिला के उद्यमियों को इसका फायदा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी मांग पर यह छूट पर्यावरण मंत्रालय ने तुरंत दे दी। यमुनानगर में 15 उद्योगों को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से प्रदूषण की एनओसी की राहत मिलेगी। इन्हें दोबारा से एनओसी लेने की छूट होगी।