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मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को चुनौती: हाईकोर्ट ने सरकार से 12 तक मांगा जवाब, कहा-क्यों न रोक लगा दें

Sat, 02 Dec 2023 11:00 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 02 Dec 2023 11:00 AM IST
सार

पंजाब सरकार ने 27 नवंबर को गुरुपर्व के अवसर पर ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ की शुरुआत की थी। यात्रा में जाने वाले लोगों को एसी धर्मशालाओं में ठहराया जाएगा। खाना व श्रद्धालु किट भी मुहैया करवाई जाएगी। जब किसी धार्मिक स्थल पर श्रद्धालु पहुंचेंगे तो वहां उनकी भाषा में तैनात गाइड विस्तार से जानकारी देंगे।

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Chief Minister Teerth Yatra Scheme started in Punjab challenged in High Court, notice issued to government
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

पंजाब सरकार की ओर से हाल ही में शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया है और पूछा है कि क्यों न इस पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि एक ओर युवा रोजगार को तरस रहे हैं और दूसरी ओर मुफ्त तीर्थ यात्रा की यह स्कीम लाकर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सरकार को इसका स्पष्टीकरण देना होगा।

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होशियारपुर निवासी परविंदर सिंह किटना ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि 27 नवंबर को पंजाब सरकार ने राज्य के लोगों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा की योजना आरंभ की है। इसके तहत इस वित्तीय वर्ष में 13 सप्ताह की अवधि के दौरान 13 ट्रेनें चलाई जाएंगी और प्रत्येक ट्रेन में 1000 यात्रियों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य में विभिन्न स्थानों से प्रतिदिन 10 बसें चलाई जाएंगी और प्रत्येक बस में 43 यात्रियों को ले जाया जाएगा। इस योजना पर राज्य सरकार 40 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है और इस योजना से 50,000 लोगों को लाभान्वित किया जाना है।
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याची की दलील- योजना करदाताओं के पैसे की बर्बादी

याची ने दलील देते हुए कहा कि यह योजना सीधे तौर पर करदाताओं के पैसे की बर्बादी है, क्योंकि इससे कोई विकास या कल्याण नहीं होगा। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से भारत सरकार बनाम रफीक शेख और अन्य के मामले में मुस्लिम समुदाय के लोगों को हज यात्रा के लिए सब्सिडी देने में होने वाले खर्च पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि हर साल हज सब्सिडी को कम करें और 10 साल में इसे पूरी तरह खत्म कर दे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि सब्सिडी का पैसा शिक्षा और सामाजिक विकास व अन्य उत्थान के लिए अधिक लाभप्रद रूप से उपयोग किया जा सकता है।

कोर्ट ने पूछे तीन सवाल

  • कितने लोगों ने ऐसी तीर्थ यात्रा योजना शुरू करने की मांग रखी थी।
  • जब प्रदेश में युवा रोजगार के लिए तरस रहे हैं तो राज्य के खर्च पर मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना का क्या औचित्य है।
  • जब यह योजना 2017 में बंद कर दी गई थी तो इसे दोबारा क्यों शुरू किया गया।
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