{"_id":"58c59c534f1c1bb66fdc4643","slug":"chemical-color-is-harmful-for-pregnant-women","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गर्भवती महिलाओं के लिए कैमिकल वाले रंग हानिकारक, जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्भवती महिलाओं के लिए कैमिकल वाले रंग हानिकारक, जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:36 AM IST
विज्ञापन
holi
- फोटो : Demo Pic
कैमिकल युक्त रंग कहीं आप के गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत न बिगाड़ दें। लिहाजा, गर्भवती महिलाओं को होली के त्योहार पर ऐसे रंगों से बचना चाहिए। स्त्रिी रोग विशेषज्ञ के मुताबिक गर्भावस्था में महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। साथ ही त्वचा भी काफी संवेदनशील हो जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अपने आप का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
नर्व सिस्टम डैमेज होने का खतरा
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी ने बताया कि लाल रंग में मौजूद मर्करी सल्फेट महिला के शरीर में प्रवेश कर गर्भनाल के माध्यम से गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित करता है। इससे बच्चे में शारीरिक विकृति या नर्व सिस्टम डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
प्री मैच्योर डिलीवरी भी हो सकती है
काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड गर्भनाल के जरिए गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर मिसकैरेज, प्री मैच्योर डिलीवरी या बच्चे के कम वजन का कारण बन सकता है।
विज्ञापन
स्किन एलर्जी हो सकती है
नीला रंग बनाने के लिए पू्रसिअन ब्लू का प्रयोग किया जाता है। इससे गर्भवती महिला को स्किन एलर्जी हो सकती है। इसका असर गर्भ में पले रहे बच्चे पर भी पड़ता है।
विज्ञापन
नर्व सिस्टम डैमेज होने का खतरा
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी ने बताया कि लाल रंग में मौजूद मर्करी सल्फेट महिला के शरीर में प्रवेश कर गर्भनाल के माध्यम से गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित करता है। इससे बच्चे में शारीरिक विकृति या नर्व सिस्टम डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
प्री मैच्योर डिलीवरी भी हो सकती है
काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड गर्भनाल के जरिए गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर मिसकैरेज, प्री मैच्योर डिलीवरी या बच्चे के कम वजन का कारण बन सकता है।
विज्ञापन
स्किन एलर्जी हो सकती है
नीला रंग बनाने के लिए पू्रसिअन ब्लू का प्रयोग किया जाता है। इससे गर्भवती महिला को स्किन एलर्जी हो सकती है। इसका असर गर्भ में पले रहे बच्चे पर भी पड़ता है।
Trending Videos
हरे रंग से प्रभावित हो सकता विकास
होली पर करें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल
- फोटो : अमर उजाला
हरे रंग से प्रभावित हो सकता विकास
हरे रंग में कॉपर सल्फेट होने के कारण गर्भवती महिला की आंखों में जलन, एलर्जी, आंखों से पानी आना और लालिमा जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए इनसे परहेज करें। इतना ही नहीं यदि यह रंग गर्भनाल के जरिए बच्चे तक पहुंच जाए तो उसका विकास प्रभावित हो सकता है।
डॉ. शालिनी की राय
गर्भवती महिलाएं कामकाज के दौरान खानपान पर ध्यान दें वर्ना एसिडिटी की समस्या हो सकती है। थकान लगे तो आराम करें और जहां गीली होली खेली जा रही हो वहां जाने से बचें। क्योंकि ऐसे में पांव फिसलने का डर बना रहता है।
रंगों से किडनी डैमेज और कैंसर का भी खतरा
लाल रंग बनाने के लिए अक्साइड का प्रयोग किया जाता है। यह रसायन किडनी को डैमेज कर सकता है। सिल्वर कलर या पेस्ट में एल्युमीनियम ब्रोक्साइड रहता है। आपको जानकर हैरानी होगी की यह रंग कैंसर का कारण भी बन सकता है। अमूमन होली के रंग जमीन पर गिरते हैं। इससे स्थल प्रदूषण बढ़ता है। रंग लगने के बाद लोग स्थान करते हैं। रंग लगे कपड़े धोते हैं। यह नालियों के माध्यम से नदी में प्रवाहित होते हैं। एक हिस्सा भू-गर्भ जल स्तर में मिलता है। इस तरह जल, स्थल व वायु तीनों तरह के प्रदूषण का कारण बनते हैं कैमिकल वाले रंग।
हरे रंग में कॉपर सल्फेट होने के कारण गर्भवती महिला की आंखों में जलन, एलर्जी, आंखों से पानी आना और लालिमा जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए इनसे परहेज करें। इतना ही नहीं यदि यह रंग गर्भनाल के जरिए बच्चे तक पहुंच जाए तो उसका विकास प्रभावित हो सकता है।
डॉ. शालिनी की राय
गर्भवती महिलाएं कामकाज के दौरान खानपान पर ध्यान दें वर्ना एसिडिटी की समस्या हो सकती है। थकान लगे तो आराम करें और जहां गीली होली खेली जा रही हो वहां जाने से बचें। क्योंकि ऐसे में पांव फिसलने का डर बना रहता है।
रंगों से किडनी डैमेज और कैंसर का भी खतरा
लाल रंग बनाने के लिए अक्साइड का प्रयोग किया जाता है। यह रसायन किडनी को डैमेज कर सकता है। सिल्वर कलर या पेस्ट में एल्युमीनियम ब्रोक्साइड रहता है। आपको जानकर हैरानी होगी की यह रंग कैंसर का कारण भी बन सकता है। अमूमन होली के रंग जमीन पर गिरते हैं। इससे स्थल प्रदूषण बढ़ता है। रंग लगने के बाद लोग स्थान करते हैं। रंग लगे कपड़े धोते हैं। यह नालियों के माध्यम से नदी में प्रवाहित होते हैं। एक हिस्सा भू-गर्भ जल स्तर में मिलता है। इस तरह जल, स्थल व वायु तीनों तरह के प्रदूषण का कारण बनते हैं कैमिकल वाले रंग।