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हिमाचल की बस पर बवाल: बिना मंजूरी लिए चंडीगढ़ पहुंची नई वोल्वो ISBT-43 से लौटाई... जब्त करने की दी चेतावनी

Sat, 02 Aug 2025 09:46 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 02 Aug 2025 09:46 AM IST
सार

हिमाचल के कई रूट को लेकर सीटीयू और हिमाचल रोजवेड में विवाद चल रहा है। सबसे बड़ा विवाद चंबा रूट को लेकर है जो दो साल से बंद है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वहां की एक निजी बस कंपनी ने केस दायर कर बस को रोकने की मांग की थी।

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Chaos over Himachal New Volvo reached Chandigarh without approval returned from ISBT 43
हिमाचल रोडवेज की वोल्वो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ यूटी परिवहन विभाग और हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बीच बसों के संचालन पर एक बार फिर तनातनी शुरू हो गई है। 
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हिमाचल की नई वोल्वो बस बिना एनओसी और काउंटर टाइम के आईएसबीटी-43 पहुंच गई, जिसका विरोध शुरू हो गया। बस में खुद एचआरटीसी के अधिकारी बैठकर आए लेकिन बस को आईएसबीटी से बाहर कर दिया गया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भी दोबारा बिना कागजों के आने पर जब्त करने की चेतावनी दे डाली।

हैरानी की बात है कि बस में खुद बैठकर एचआरटीसी के शिमला रीजन के डिवीजनल मैनेजर पहुंचे थे। बस 9:45 बजे आईएसबीटी-43 के अंदर आई। जब अधिकारियों ने देखा तो चंडीगढ़ परिवहन विभाग की एनओसी और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी किए जाने वाले काउंटर टाइम के कागज मांगे। बस के पास कुछ भी नहीं था। यह बस शिमला से आई थी और चंडीगढ़ से होकर चंबा के लिए निकली थी। जब कागज नहीं दिखा पाए तो तुरंत बस को बाहर निकाल दिया गया। 
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इसके बाद एचआरटीसी के अधिकारियों ने सीटीयू के अधिकारियों के साथ बैठक भी की जिसमें दो टूक जवाब दिया गया कि बिना कागजों के बस चलने नहीं दी जाएगी। 

बता दें सीटीयू ने पहले भी लिखित में आरोप लगाया है कि एचआरटीसी की 50 से ज्यादा बसें अवैध रूप से चंडीगढ़ में चलती है जिनके पास जरूरी मंजूरी नहीं हैं। इस संबंध में कई स्तर पर बैठक भी हो चुकी हैं लेकिन अब तक बसें आ रही हैं।
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चंडीगढ़ की बस को 7 माह से मंजूरी नहीं, खुद बिना कागजों के चला रहे

साढ़े 7 महीने पहले पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने सीटीयू की 60 लॉन्ग रूट की बसों की हरी झंडी दिखाई थी। इसमें सीटीयू ने दावा किया था कि वो बैजनाथ, सरकाघाट और जोगिंदर नगर के लिए भी बस चलाएंगे लेकिन आजतक ये बसें नहीं चल पाई हैं।

कारण है कि हिमाचल ने सीटीयू की इन बसों को काउंटर टाइम ही नहीं दिया। इधर हिमाचल ने बिना एनओसी और काउंटर टाइम के बस चला दी और चंडीगढ़ भी लेकर पहुंच गए। नियमों के अनुसार किसी भी अन्य राज्य व यूटी के लिए बस चलाने से करीब 3 से 6 महीने पहले परमिट, काउंटर टाइम आदि की मंजूरी के लिए प्रक्रिया शुरू की जाती है। कई महीने पत्राचार होता है और सभी मंजूरी मिलने के बाद ही बस चलाई जाती है लेकिन हिमाचल ने ऐसा कुछ नहीं किया।

दिन में सिर्फ सीटीयू की बस जाती थी चंबा, दो साल से बंद

हिमाचल के कई रूट को लेकर सीटीयू और हिमाचल रोजवेड में विवाद चल रहा है। सबसे बड़ा विवाद चंबा रूट को लेकर है जो दो साल से बंद है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वहां की एक निजी बस कंपनी ने केस दायर कर बस को रोकने की मांग की थी। कोर्ट ने रोक लगाई है और मामले में दो साल से सुनवाई चल रही है। सीटीयू की तरफ से लोगों की मांग का हवाला देकर अदालत में भी बस को शुरू करने की मांग की जा चुकी है। बता दें कि चंडीगढ़ से यह एकमात्र बस थी जो दिन के समय चंबा जाती थी। अन्य सभी रोडवेज बसें रात में जाती हैं।

अगस्त 2023 में हुई थी तनातनी, हिमाचल की जब्त हुई थीं 5 बसें

अगस्त 2023 में सीटीयू की चंबा की बस को हिमाचल में रोकने और ऊना में हुई मारपीट के बाद सीटीयू और हिमाचल में तन गई थी। 31 अगस्त 2023 को एसटीए ने हिमाचल प्रदेश की पांच बसें जब्त कर ली थीं। परमिट और काउंटर साइन न दिखाने पर आईएसबीटी-43 पर चालान की कार्रवाई की गई थी। हिमाचल प्रदेश के कर्मियों ने इसे बदले की कार्रवाई बताया और नारेबाजी की। हंगामा बढ़ता देख मौके पर पुलिस और परिवहन विभाग के निदेशक भी पहुंचे थे। बताया गया कि इन बसों के पास काउंटर साइन तो दूर, परमिट भी खत्म हो चुका था। जब्त की गई ज्यादातर बसें ऊना रूट की थीं।

एचआरटीसी की बोल्वो बस सुबह आईएसबीटी-43 पहुंची थी। उनके पास काउंटर टाइम नहीं था, इसलिए बस को काउंटर पर नहीं लगने दिया गया और वापस भेज दिया गया। उनके अधिकारियों के साथ लंबी बैठक भी हुई। उन्हें समझाया गया कि बिना कागजों के बस नहीं चलाई जा सकती। चंडीगढ़ की कुछ बसों को 7 महीने से काउंटर टाइम नहीं किया गया है। वो मुद्दा भी एचआरटीसी के अधिकारियों के सामने उठाया गया है। - प्रद्युमन सिंह, निदेशक परिवहन विभाग


बस को काउंटर पर नहीं लगने दिया गया। मैं अधिकारियों के पास ढाई घंटे बैठा रहा। उनका कहना है कि सीटीयू की बैजनाथ, सरकाघाट और जोगिंदर नगर की बसों को पक्का समय नहीं मिला है। मैंने मौके से ही संबंधित अधिकारियों को फोन किया। इन बसों को टेंपरेरी समय मिला हुआ है। हालांकि उन्होंने पहले इन बसों को पक्का समय दिलाने की बात कही है। एचआरटीसी की वोल्वो बस काउंटर पर नहीं लगती है तो लोगों को असुविधा होगी। - देवासेन नेगी, डिविजनल मैनेजर, शिमला रीजन
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