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प्राइवेट स्कूलों की किताबों के लिए अभिभावकों का निकलेगा पसीना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 24 Feb 2017 09:17 AM IST
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- फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ के प्राइवेट स्कूलों के अभिभावकों के लिए आने वाले दिन परेशानी भरे रहेंगे। शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों के बीच एनसीईआरटी किताबों को लेकर चल रहे विवाद में अभिभावकों का किताबों के लिए खूब पसीना निकलने वाला है। जानकारी अनुसार हजारों अभिभावकों को किताबों के लिए जमकर धक्के खाने पड़ सकते हैं। फरवरी महीने में अक्सर शहर की बुकशॉप पर अगले सत्र की किताबों के बंडलों के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग जाते थे, लेकिन अभी तक अधिकतर बुकशॉप खाली पड़ी हैं।
एनसीईआरटी किताबों के लेकर शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूलों में चल रहे झगड़े के कारण अप्रैल 2017 सत्र के लिए किताबों के लिए बुकशॉप मालिकों ने आर्डर ही नहीं किया हैं। सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूलों के निर्देशों पर टिकी हैं। अमर उजाला ने वीरवार शहर के कई सेक्टरों में बुकशॉप्स पर किताबों मौजूदा स्थिति को लेकर पड़ताल की। अधिकतर विक्रेताओं ने बताया कि अभी तक उनके पास स्कूलों की ओर से अगले सत्र के लिए सिलेबस की किताबों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। कुछ स्कूलों ने वेबसाइट पर लिस्ट डाली है। ऐसे में इस साल पर्याप्त मात्रा में निजी पब्लिशर्स और एनसीईआरटी किताबों का आर्डर भी पूरा हो पाना मुमकिन नहीं है।
सेक्टर-22 स्थित एक बुकशॉप मालिक ने बताया कि किसी भी स्कूल ने किताबों की लिस्ट नहीं भेजी है, वह तो स्कूलों की वेबसाइट पर जारी लिस्ट के हिसाब से अब आर्डर करेंगे। लेकिन सीबीएसई के सर्कुलर के कारण किताबों पर फैसला ले पाना मुश्किल हो गया है। उधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मार्च के पहले हफ्ते तक सभी प्राइवेट स्कूल वेबसाइट पर किताबों की जानकारी अपलोड कर देंगे।
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एनसीईआरटी किताबों के लेकर शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूलों में चल रहे झगड़े के कारण अप्रैल 2017 सत्र के लिए किताबों के लिए बुकशॉप मालिकों ने आर्डर ही नहीं किया हैं। सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूलों के निर्देशों पर टिकी हैं। अमर उजाला ने वीरवार शहर के कई सेक्टरों में बुकशॉप्स पर किताबों मौजूदा स्थिति को लेकर पड़ताल की। अधिकतर विक्रेताओं ने बताया कि अभी तक उनके पास स्कूलों की ओर से अगले सत्र के लिए सिलेबस की किताबों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। कुछ स्कूलों ने वेबसाइट पर लिस्ट डाली है। ऐसे में इस साल पर्याप्त मात्रा में निजी पब्लिशर्स और एनसीईआरटी किताबों का आर्डर भी पूरा हो पाना मुमकिन नहीं है।
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सेक्टर-22 स्थित एक बुकशॉप मालिक ने बताया कि किसी भी स्कूल ने किताबों की लिस्ट नहीं भेजी है, वह तो स्कूलों की वेबसाइट पर जारी लिस्ट के हिसाब से अब आर्डर करेंगे। लेकिन सीबीएसई के सर्कुलर के कारण किताबों पर फैसला ले पाना मुश्किल हो गया है। उधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मार्च के पहले हफ्ते तक सभी प्राइवेट स्कूल वेबसाइट पर किताबों की जानकारी अपलोड कर देंगे।
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किताबों के लिए कई दुकानों पर खाने पड़ेंगे धक्के
किताबें
- फोटो : Demo Pic
शहर में नहीं एनसीईआरटी का पर्याप्त स्टॉक
प्राइवेट स्कूलों में अगर एनसीईआरटी किताबें सिलेबस में लागू भी कर दी जाएं तो शहर में सभी कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध हो ही नहीं पाएंगी। सेक्टर-19 स्थित एक बुक विक्रेता ने बताया कि एनसीईआरटी की 9 से 12वीं की फिलॉस्फी,इकोनॉमिक्स सहित कई तरह की किताबें मौजूद ही नहीं हैं।
उधर जूनियर स्तर पर एनसीईआरटी ग्रॉमर बुक्स की प्रिंटिंग नहीं करता है। पिछले सालों में ही शहर में एनसीईआरटी किताबों के लिए अभिभावकों को जमकर धक्के खाने पड़ते रहे हैं। स्टूडेंट्स को फोटो स्टेट कापी से काम चलाना पड़ता है। शहर में सिर्फ तीन बुकशॉप के पास एनसीईआरटी किताबों का डिपो है।
किताबों के लिए कई दुकानों पर खाने पड़ेंगे धक्के
यूटी प्रशासन द्वारा एनसीईआरटी किताबें सिलेबस में शामिल करने को लेकर कोई फैसला नहीं लेने से अभिभावकों के लिए किताबों का पूरा सेट करने के लिए कई बुकशॉप पर चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। शिक्षा विभाग ने किताबें और यूनिफार्म के लिए अभिभावकों को एक ही दुकान से खरीदारी करने से तो राहत दे दी है, लेकिन सभी स्कूलों में एकसमान एनसीईआटटी किताबें लागू होने से पूरे सेट के लिए कई बुकशॉप पर जाना पड़ सकता है।
1 लाख बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने दिया एनसीईआरटी किताबों का आर्डर
शहर के 110 सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं क्लास में पढ़ने वाले करीब 1 लाख बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने फरवरी में ही आर्डर दे दिया है। विभाग की ओर से इसके लिए दो करोड़ की ग्रांट जारी की गई है। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में आठवीं क्लास तक निशुल्क किताबें दी जाती है।
प्राइवेट स्कूलों में अगर एनसीईआरटी किताबें सिलेबस में लागू भी कर दी जाएं तो शहर में सभी कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध हो ही नहीं पाएंगी। सेक्टर-19 स्थित एक बुक विक्रेता ने बताया कि एनसीईआरटी की 9 से 12वीं की फिलॉस्फी,इकोनॉमिक्स सहित कई तरह की किताबें मौजूद ही नहीं हैं।
उधर जूनियर स्तर पर एनसीईआरटी ग्रॉमर बुक्स की प्रिंटिंग नहीं करता है। पिछले सालों में ही शहर में एनसीईआरटी किताबों के लिए अभिभावकों को जमकर धक्के खाने पड़ते रहे हैं। स्टूडेंट्स को फोटो स्टेट कापी से काम चलाना पड़ता है। शहर में सिर्फ तीन बुकशॉप के पास एनसीईआरटी किताबों का डिपो है।
किताबों के लिए कई दुकानों पर खाने पड़ेंगे धक्के
यूटी प्रशासन द्वारा एनसीईआरटी किताबें सिलेबस में शामिल करने को लेकर कोई फैसला नहीं लेने से अभिभावकों के लिए किताबों का पूरा सेट करने के लिए कई बुकशॉप पर चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। शिक्षा विभाग ने किताबें और यूनिफार्म के लिए अभिभावकों को एक ही दुकान से खरीदारी करने से तो राहत दे दी है, लेकिन सभी स्कूलों में एकसमान एनसीईआटटी किताबें लागू होने से पूरे सेट के लिए कई बुकशॉप पर जाना पड़ सकता है।
1 लाख बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने दिया एनसीईआरटी किताबों का आर्डर
शहर के 110 सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं क्लास में पढ़ने वाले करीब 1 लाख बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने फरवरी में ही आर्डर दे दिया है। विभाग की ओर से इसके लिए दो करोड़ की ग्रांट जारी की गई है। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में आठवीं क्लास तक निशुल्क किताबें दी जाती है।