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Chandigarh: हाईकोर्ट का अहम आदेश- तीन दशक तक काम कराकर स्वयंसेवक कहना अन्यायपूर्ण, नियमितीकरण की नीति बनाएं
Sat, 18 Oct 2025 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 18 Oct 2025 06:19 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि स्वैच्छिक सेवा का अर्थ यह है कि व्यक्ति बिना किसी प्रतिफल के सेवा दे लेकिन ऐसे देश में जहां रोजगार की कमी और गरीबी व्याप्त है यह मानना कठिन है कि कोई व्यक्ति तीन दशक तक पूरा समय बिना पारिश्रमिक के काम करेगा।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश में पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह लंबे समय से सेवाएं दे रहे होमगार्ड कर्मियों के नियमितीकरण पर नीति बनाए। जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दिन का कुछ हिस्सा या महीने के कुछ दिन किसी अन्य कार्य के साथ सेवा करता है तो उसे स्वयंसेवक कहा जा सकता है, लेकिन जो व्यक्ति लगातार तीन दशक तक पूरा समय कार्य करता रहा है उसे स्वयंसेवक नहीं कहा जा सकता।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह अन्यायपूर्ण और अनुचित होगा कि अन्य विभागों के श्रेणी तीन और श्रेणी चार कर्मचारियों को दस वर्ष की सेवा के बाद नियमित किया जाता है जबकि होमगार्ड कर्मियों को यह लाभ सिर्फ इसलिए न दिया जाए कि वे स्वयंसेवक हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि स्वैच्छिक सेवा का अर्थ यह है कि व्यक्ति बिना किसी प्रतिफल के सेवा दे लेकिन ऐसे देश में जहां रोजगार की कमी और गरीबी व्याप्त है यह मानना कठिन है कि कोई व्यक्ति तीन दशक तक पूरा समय बिना पारिश्रमिक के काम करेगा। याचिकाकर्ता को कांस्टेबल के वेतनमान के बराबर वेतन और अन्य भत्ते मिल रहे थे इसलिए यह कहना गलत होगा कि उसकी नियुक्ति गलत तरीके से हुई है।
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यह मामला दो याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था जिन्हें 1992 में पंजाब सरकार की ओर से होमगार्ड/स्वयंसेवक के रूप में भर्ती किया गया था। उनमें से एक याचिकाकर्ता गुरपाल सिंह 1992 से 2025 तक ड्राइवर के रूप में कार्यरत रहा। उसने सेवा नियमित करने की मांग को लेकर यह याचिका दायर की थी।