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रिपोर्ट में खुलासा: ब्लड डोनेशन में चंडीगढ़ के आंकड़े पूरे देश में चौंकाने वाले
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 03 Aug 2016 09:29 AM IST
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देश का सबसे बड़ा ब्लड डोनर शहर
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जनसंख्या अनुपात के अनुसार चंडीगढ़ देश का सबसे बड़ा ब्लड डोनर शहर बन गया है। यहां तक कि उसने देश के सभी प्रदेशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बीते वित्तीय वर्ष के दौरान चंडीगढ़ के रक्तदाताओं ने 91 हजार 567 यूनिट रक्तदान किया। यह शहर की जरूरत के मुकाबले 768.18 प्रतिशत यूनिट सरप्लस है। जो देश में सबसे ज्यादा है। पिछले तीन वर्षों में पांच हजार यूनिट की बढ़ोतरी हुई है।
मंत्रालय के अनुसार ब्लड डोनेशन में चंडीगढ़ के बाद दूसरा नंबर दिल्ली का है, जहां 2015-16 में 5 लाख 59 हजार 534 ब्लड यूनिट एकत्रित किया गया। इस मामले में यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ फिसड्डी रहा है। बिहार में 84.19 प्रतिशत, यूपी में 54.92 और छत्तीसगढ़ में 65.71 प्रतिशत ब्लड यूनिट की कमी दर्ज की गई है।
डब्ल्यूएचओ के मानक से नौ गुना अधिक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) के मुताबिक कुल आबादी के एक फीसदी के बराबर ब्लड की जरूरत होती है। इस हिसाब से चंडीगढ़ को वर्ष में कुल 10 हजार 547 यूनिट ही चाहिए। यह चंडीगढ़ के उत्साहित लोगों और संगठनों की सफलता है कि शहर में रक्तदान का आंकड़ा नौ गुना से भी अधिक है। यह स्थिति तब है जब पूरे देश में रक्तदान में 10 फीसदी की कमी देखी गई है। हालांकि रक्तदान के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ रही है। वर्ष 2013-14 में देश में जरूरत के मुकाबले ब्लड यूनिट 17 फीसदी कम था।
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केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बीते वित्तीय वर्ष के दौरान चंडीगढ़ के रक्तदाताओं ने 91 हजार 567 यूनिट रक्तदान किया। यह शहर की जरूरत के मुकाबले 768.18 प्रतिशत यूनिट सरप्लस है। जो देश में सबसे ज्यादा है। पिछले तीन वर्षों में पांच हजार यूनिट की बढ़ोतरी हुई है।
मंत्रालय के अनुसार ब्लड डोनेशन में चंडीगढ़ के बाद दूसरा नंबर दिल्ली का है, जहां 2015-16 में 5 लाख 59 हजार 534 ब्लड यूनिट एकत्रित किया गया। इस मामले में यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ फिसड्डी रहा है। बिहार में 84.19 प्रतिशत, यूपी में 54.92 और छत्तीसगढ़ में 65.71 प्रतिशत ब्लड यूनिट की कमी दर्ज की गई है।
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डब्ल्यूएचओ के मानक से नौ गुना अधिक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) के मुताबिक कुल आबादी के एक फीसदी के बराबर ब्लड की जरूरत होती है। इस हिसाब से चंडीगढ़ को वर्ष में कुल 10 हजार 547 यूनिट ही चाहिए। यह चंडीगढ़ के उत्साहित लोगों और संगठनों की सफलता है कि शहर में रक्तदान का आंकड़ा नौ गुना से भी अधिक है। यह स्थिति तब है जब पूरे देश में रक्तदान में 10 फीसदी की कमी देखी गई है। हालांकि रक्तदान के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ रही है। वर्ष 2013-14 में देश में जरूरत के मुकाबले ब्लड यूनिट 17 फीसदी कम था।
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चंडीगढ़ में बढ़ रहा है ब्लड डोनेशन
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आंकड़ों से पता चला कि चंडीगढ़ में ब्लड डोनेशन लगातार बढ़ रहा है। 2013-14 में 86 हजार 029 यूनिट, साल 2014-15 में 88 हजार 873 यूनिट, साल 2015-16 में 91 हजार 567 यूनिट एकत्र किया गया। चंडीगढ़ के बाद दिल्ली दूसरा स्टेट है, जहां ब्लड यूनिट सरप्लस है। दिल्ली में 1 लाख 67 हजार 532 यूनिट के मुकाबले 2015-16 में 5 लाख 59 हजार 534 ब्लड यूनिट एकत्रित किया गया।
सारा खप जाता है ब्लड
भले ही चंडीगढ़ में 868.18 प्रतिशत ब्लड यूनिट सरप्लस हो, लेकिन सारा का सारा खप जाता है। दरअसल पीजीआई, जीएमसीएच 32, जीएमएसएच 16 और अन्य सिविल अस्पताल में 70-80 प्रतिशत मरीज चंडीगढ़ के बाहर के प्रदेशों से आते हैं। पीजीआई में हर साल 55-60 हजार यूनिट रक्त विभिन्न कैंपों द्वारा एकत्र किया जाता है। जबकि जीएमसीएच 32 में 17-18 हजार यूनिट। बाकी जीएमएसएच 16 व रोटरी ब्लड बैंक के सहयोग से एकत्र होता है।
इन एसोसिएशन का सबसे ज्यादा सहयोग
श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट पंचकूला, थैलेसीमिक चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, स्माइल फॉरएवर, अमर उजाला फाउंडेशन, विश्वास फाउंडेशन के अलावा कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं ब्लड यूनिट एकत्र करने में अहम भूमिका निभाती हैं। श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान राकेश संगर ने बताया कि वे इस साल अब तक 34 कैंप लगा चुके हैं।
सारा खप जाता है ब्लड
भले ही चंडीगढ़ में 868.18 प्रतिशत ब्लड यूनिट सरप्लस हो, लेकिन सारा का सारा खप जाता है। दरअसल पीजीआई, जीएमसीएच 32, जीएमएसएच 16 और अन्य सिविल अस्पताल में 70-80 प्रतिशत मरीज चंडीगढ़ के बाहर के प्रदेशों से आते हैं। पीजीआई में हर साल 55-60 हजार यूनिट रक्त विभिन्न कैंपों द्वारा एकत्र किया जाता है। जबकि जीएमसीएच 32 में 17-18 हजार यूनिट। बाकी जीएमएसएच 16 व रोटरी ब्लड बैंक के सहयोग से एकत्र होता है।
इन एसोसिएशन का सबसे ज्यादा सहयोग
श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट पंचकूला, थैलेसीमिक चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, स्माइल फॉरएवर, अमर उजाला फाउंडेशन, विश्वास फाउंडेशन के अलावा कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं ब्लड यूनिट एकत्र करने में अहम भूमिका निभाती हैं। श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान राकेश संगर ने बताया कि वे इस साल अब तक 34 कैंप लगा चुके हैं।
सीधे ब्लड बैंक में जाकर ब्लड डोनेट करने की सुविधा
ब्लड बैंक परिसर में रक्तदान करती नैनसी बरनवाल।
- फोटो : mirzapur
कोट
लोगों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अब लोगों को कैंपों का इंतजार करने के बजाय सीधे ब्लड बैंक में जाकर ब्लड डोनेट करने की सुविधा मिलेगी। इससे कभी भी ब्लड की कमी नहीं रहेगी और एक सर्कल भी बनकर तैयार हो जाएगा।
-रवनीत कौर, प्रोफेसर व एचओडी ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन जीएमसीएच 32
कोट
पीजीआई हर साल स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ और धार्मिक संस्थाओं की बदौलत 55 से 60 हजार यूनिट ब्लड इकट्ठा करता है। सारा ब्लड जरूरतमंद मरीजों में ही चढ़ा दिया जाता है।
-आरआर शर्मा, एडिशनल प्रोफेसर, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन पीजीआई।
लोगों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अब लोगों को कैंपों का इंतजार करने के बजाय सीधे ब्लड बैंक में जाकर ब्लड डोनेट करने की सुविधा मिलेगी। इससे कभी भी ब्लड की कमी नहीं रहेगी और एक सर्कल भी बनकर तैयार हो जाएगा।
-रवनीत कौर, प्रोफेसर व एचओडी ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन जीएमसीएच 32
कोट
पीजीआई हर साल स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ और धार्मिक संस्थाओं की बदौलत 55 से 60 हजार यूनिट ब्लड इकट्ठा करता है। सारा ब्लड जरूरतमंद मरीजों में ही चढ़ा दिया जाता है।
-आरआर शर्मा, एडिशनल प्रोफेसर, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन पीजीआई।