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चंडीगढ़ नगर निगम ने पास किया 1005 करोड़ का बजट, साथ में नई मुसीबत भी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 17 Feb 2017 09:18 AM IST
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चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग
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चंडीगढ़ नगर निगम के सदन ने 1005 करोड़ रुपये का बजट पास कर दिया, लेकिन साथ में एक नई मुसीबत भी खड़ी हुई है, जिसे कोई सोच ही नहीं रहा है। जब बजट पास किया गया, तब किसी भी पार्षद ने यह नहीं पूछा की यह राशि कहां से आएगी? प्रशासन की ओर से नगर निगम को ग्रांट इन एड के तौर पर 419 करोड़ रुपये ही मिलना है जिसमे 100 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए है।
पास किए गए बजट में कोई नया प्रोजेक्ट शामिल नहीं है। छह साल पहले नगर निगम की एफडी 500 करोड़ रुपये की थी जो आगामी वित्तीय सत्र (अप्रैल) में 75 करोड़ रुपये की रह जाएगी। इस बात की जानकारी अधिकारियों ने बजट में दी है। जबकि पिछले साल अप्रैल माह में 272 करोड़ रुपये की एफडी थी। अधिकारियों के अनुसार प्रोजेक्ट्स और शहर के विकास कार्यों के लिए एफडी तुडवाई गई है।
लेकिन साल 2017-18 के बजट के लिए नगर निगम के पास कोई एफडी भी नहीं रह जाएगी, क्योंकि 75 करोड़ रुपये की एफडी इस साल ही टूट जाएगी। ऐसे में नगर निगम में वित्तीय संकट गहरा गया है और कोई भी पार्षद इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। वीरवार को सदन में नगर निगम ने कैपिटल में 339.55 और रेवेन्यू के लिए 666.13 करोड़ का बजट पास किया है।
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प्रशासन ने जो नगर निगम को जो 419 करोड़ रुपये की ग्रांट इन एड दी है, उसमें से 100 करोड़ तो सीधा स्मार्ट सिटी के खाते में चले जाएंगे, जबकि 200 करोड़ रुपये की राशि कर्मचारियों के वेतन में खर्च होगी। ऐसे में शहर के कामों के लिए 119 करोड़ ही बचेंगे । इसके अलावा नगर निगम की अपनी सालाना कमाई 160 करोड़ रुपये है। यह राशि भी नगर निगम को मिल जाएंगी। प्रशासन ने नगर निगम को कैपिटल बजट में 184.70 करोड़ दिया है जबकि रेवन्यू में 234.56 करोड़ का बजट दिया है।
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पास किए गए बजट में कोई नया प्रोजेक्ट शामिल नहीं है। छह साल पहले नगर निगम की एफडी 500 करोड़ रुपये की थी जो आगामी वित्तीय सत्र (अप्रैल) में 75 करोड़ रुपये की रह जाएगी। इस बात की जानकारी अधिकारियों ने बजट में दी है। जबकि पिछले साल अप्रैल माह में 272 करोड़ रुपये की एफडी थी। अधिकारियों के अनुसार प्रोजेक्ट्स और शहर के विकास कार्यों के लिए एफडी तुडवाई गई है।
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लेकिन साल 2017-18 के बजट के लिए नगर निगम के पास कोई एफडी भी नहीं रह जाएगी, क्योंकि 75 करोड़ रुपये की एफडी इस साल ही टूट जाएगी। ऐसे में नगर निगम में वित्तीय संकट गहरा गया है और कोई भी पार्षद इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। वीरवार को सदन में नगर निगम ने कैपिटल में 339.55 और रेवेन्यू के लिए 666.13 करोड़ का बजट पास किया है।
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प्रशासन ने जो नगर निगम को जो 419 करोड़ रुपये की ग्रांट इन एड दी है, उसमें से 100 करोड़ तो सीधा स्मार्ट सिटी के खाते में चले जाएंगे, जबकि 200 करोड़ रुपये की राशि कर्मचारियों के वेतन में खर्च होगी। ऐसे में शहर के कामों के लिए 119 करोड़ ही बचेंगे । इसके अलावा नगर निगम की अपनी सालाना कमाई 160 करोड़ रुपये है। यह राशि भी नगर निगम को मिल जाएंगी। प्रशासन ने नगर निगम को कैपिटल बजट में 184.70 करोड़ दिया है जबकि रेवन्यू में 234.56 करोड़ का बजट दिया है।
पार्किग की दिक्कत कैसे दूर होगी
चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग
वीरवार को बुलाई गई विशेष बैठक में भी अधिकतर पार्षदों ने सिर्फ अपने वार्ड से संबंधित कामों को ही बजट में शामिल करने के लिए कहा। किसी ने भी शहर में पार्किंग की दिक्कत के संबंध में कुछ नहीं कहा। इसके साथ ही बच्चों को कोई प्ले ग्राउंड मिले, इस संबंध में भी कोई फैसला नहीं लिया गया।
पिछले बजट में प्लान में मिले सिर्फ 84 करोड़
पिछले बजट में नगर निगम को प्लान में सिर्फ 84 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि खर्च 200 करोड़ से ज्यादा हुआ। तब नगर निगम 572 करोड़ की मांग की थी। इसी तरह से साल 2015-16 में नगर निगम ने 348 मांगे थे, 102 करोड़ पास किए थे, जबकि प्रशासन ने कटौती करते हुए 76 करोड़ की ही राशि दी थी। इस साल नगर निगम ने 252 करोड़ रुपये खर्च किए थे। साल 2014-15 में 345 करोड़ रुपये की मांग की गई जबकि 136 करोड़ पास हुए।
हकीकत में 102 करोड़ ही प्लान बजट में आए। जबकि नगर निगम का उस साल 169 करोड़ रुपये खर्च किए। इसी तरह से साल 2013-14 में प्रशासन से नगर निगम ने 261 करोड़ मांगे थे लेकिन 146 करोड़ प्रशासन ने पास किए लेकिन इसमे भी 121 करोड़ ही दिए। जबकि खर्चा 210 करोड़ किए गए। साल 2012-13 में नगर निगम ने प्रशासन से 504 करोड़ रुपये की मांग की थी लेकिन प्लान बजट में 121 करोड़ मिले थे जबकि खर्चा 178 करोड़ रुपये आया था।
पिछले बजट में प्लान में मिले सिर्फ 84 करोड़
पिछले बजट में नगर निगम को प्लान में सिर्फ 84 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि खर्च 200 करोड़ से ज्यादा हुआ। तब नगर निगम 572 करोड़ की मांग की थी। इसी तरह से साल 2015-16 में नगर निगम ने 348 मांगे थे, 102 करोड़ पास किए थे, जबकि प्रशासन ने कटौती करते हुए 76 करोड़ की ही राशि दी थी। इस साल नगर निगम ने 252 करोड़ रुपये खर्च किए थे। साल 2014-15 में 345 करोड़ रुपये की मांग की गई जबकि 136 करोड़ पास हुए।
हकीकत में 102 करोड़ ही प्लान बजट में आए। जबकि नगर निगम का उस साल 169 करोड़ रुपये खर्च किए। इसी तरह से साल 2013-14 में प्रशासन से नगर निगम ने 261 करोड़ मांगे थे लेकिन 146 करोड़ प्रशासन ने पास किए लेकिन इसमे भी 121 करोड़ ही दिए। जबकि खर्चा 210 करोड़ किए गए। साल 2012-13 में नगर निगम ने प्रशासन से 504 करोड़ रुपये की मांग की थी लेकिन प्लान बजट में 121 करोड़ मिले थे जबकि खर्चा 178 करोड़ रुपये आया था।
अरोमा लाइट प्वाइंट और बस स्टैंड चौक पर अंडरपास बनाएंगे
चंडीगढ़ की नई मेयर आशा जसवाल
पास बजट के अनुसार नगर निगम को सेक्टर-17 बस स्टैंड चौक और सेक्टर-22 अरोमा लाइट प्वाइंट पर अंडरपास के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहले यह प्रोजेक्ट प्रशासन का था लेकिन प्रशासन ने अब इनके निर्माण की जिम्मेवारी नगर निगम को दे दी है। मालूम हो कि इन दोनों प्वाइंट पर सुबह और शाम पीक आवर में बहुत जाम लगता है। अंडरपास बनने से शहरवासियों को काफी राहत मिलेगी।
1850 किमी सड़कों की कारपेटिंग कराने की योजना
बजट भाषण में मेयर आशा जसवाल ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1850 किमी तक शहर की सड़कों की कारपेटिंग कराने का दावा किया है। इसके अलावा नगर निगम की जिस इमारत का विस्तार हो रहा है, उसका निर्माण कार्य पूरा करने का दावा किया गया है। इसके साथ ही पूरे शहर की लाइटों को बदलकर एलईडी में बदलने की बात कही गई है।
5 करोड़ रुपये की राशि साइकिल ट्रैक को ठीक कराने और वहां पर एलईडी लाइटें लगाने के लिए रखी गई हैं। कजौली वाटर वर्क्स के पांचवें और छठे फेज से पानी लाने का प्रोजेक्ट पूरा करने का दावा मेयर ने किया है। 24 घंटे पानी की सप्लाई गांव और कालोनियों में भी शुरू करने का दावा किया गया है। इसके साथ ही 32 करोड़ की राशि से फायर विभाग के उपकरण खरीदने का दावा किया गया है।
बबला और सूद के बीच नोकझोंक
सदन में कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला और भाजपा के पूर्व मेयर अरुण सूद के बीच जमकर राजनीतिक हंगामा भी हुआ। जब कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि बजट में कुछ भी नया नहीं है। अहम मुद्दे बजट से गायब हैं। सिर्फ खानापूर्ति की गई है। इस पर भाजपा पार्षद अरुण सूद ने कहा कि इस समय नगर निगम की कमाई नहीं बढ़ी है इसके लिए सिर्फ कांग्रेस का पूर्व 15 साल का कार्यकाल जिम्मेवार है। सूद ने कहा कि इस शहर की जो दुर्गति हो रही है उसके लिए सिर्फ कांग्रेस जिम्मेवार है।
1850 किमी सड़कों की कारपेटिंग कराने की योजना
बजट भाषण में मेयर आशा जसवाल ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1850 किमी तक शहर की सड़कों की कारपेटिंग कराने का दावा किया है। इसके अलावा नगर निगम की जिस इमारत का विस्तार हो रहा है, उसका निर्माण कार्य पूरा करने का दावा किया गया है। इसके साथ ही पूरे शहर की लाइटों को बदलकर एलईडी में बदलने की बात कही गई है।
5 करोड़ रुपये की राशि साइकिल ट्रैक को ठीक कराने और वहां पर एलईडी लाइटें लगाने के लिए रखी गई हैं। कजौली वाटर वर्क्स के पांचवें और छठे फेज से पानी लाने का प्रोजेक्ट पूरा करने का दावा मेयर ने किया है। 24 घंटे पानी की सप्लाई गांव और कालोनियों में भी शुरू करने का दावा किया गया है। इसके साथ ही 32 करोड़ की राशि से फायर विभाग के उपकरण खरीदने का दावा किया गया है।
बबला और सूद के बीच नोकझोंक
सदन में कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला और भाजपा के पूर्व मेयर अरुण सूद के बीच जमकर राजनीतिक हंगामा भी हुआ। जब कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि बजट में कुछ भी नया नहीं है। अहम मुद्दे बजट से गायब हैं। सिर्फ खानापूर्ति की गई है। इस पर भाजपा पार्षद अरुण सूद ने कहा कि इस समय नगर निगम की कमाई नहीं बढ़ी है इसके लिए सिर्फ कांग्रेस का पूर्व 15 साल का कार्यकाल जिम्मेवार है। सूद ने कहा कि इस शहर की जो दुर्गति हो रही है उसके लिए सिर्फ कांग्रेस जिम्मेवार है।