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चंडीगढ़ निगम के ठेकेदार को जाना पड़ा हाइकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 19 Feb 2014 03:49 PM IST
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यूटी प्रशासन की कार्यप्रणाली से खफा चंडीगढ़ नगर निगम के एक ठेकेदार की कंपनी ने हाईकोर्ट की शरण ली है।
सेक्टर-35सी के मैसर्स सेलेवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि शहर के बाजारी इलाकों में टॉयलेट ब्लॉक के निर्माण और देखरेख संबंधी 24 जून 2013 को जारी टेंडरों के जरूरी दस्तावेज पत्र उनके पक्ष में अलॉट किए जाएं।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने प्रशासन को अपने स्तर पर इस मामले के निपटारे के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने याची कंपनी को भी निर्देश दिया कि वह अपनी रिप्रेजेंटेशन संबंधित अथॉरिटी को दें।
दाखिल याचिका में नगर निगम, निगम आयुक्त और एमसीपीएच के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को पार्टी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि फाइनेंस एंड कांट्रेक्ट कमेटी की 17 दिसंबर 2013 को हुई 234वीं बैठक में कांट्रेक्ट की लोअर बिड होने के साथ उनके पक्ष में एलोकेशन पर भी निर्णय हो गया, लेकिन इतने महीने बीतने के बावजूद भी जरूरी दस्तावेज उन्हें नहीं दिए गए।
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उन्होंने याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि कोर्ट में इस मामले को उठाने के बाद प्रशासन कोई विपरीत कार्रवाई न करे, इस संबंध में भी प्रतिवादियों को निर्देश जारी किए जाएं।
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सेक्टर-35सी के मैसर्स सेलेवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि शहर के बाजारी इलाकों में टॉयलेट ब्लॉक के निर्माण और देखरेख संबंधी 24 जून 2013 को जारी टेंडरों के जरूरी दस्तावेज पत्र उनके पक्ष में अलॉट किए जाएं।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने प्रशासन को अपने स्तर पर इस मामले के निपटारे के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने याची कंपनी को भी निर्देश दिया कि वह अपनी रिप्रेजेंटेशन संबंधित अथॉरिटी को दें।
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दाखिल याचिका में नगर निगम, निगम आयुक्त और एमसीपीएच के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को पार्टी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि फाइनेंस एंड कांट्रेक्ट कमेटी की 17 दिसंबर 2013 को हुई 234वीं बैठक में कांट्रेक्ट की लोअर बिड होने के साथ उनके पक्ष में एलोकेशन पर भी निर्णय हो गया, लेकिन इतने महीने बीतने के बावजूद भी जरूरी दस्तावेज उन्हें नहीं दिए गए।
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उन्होंने याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि कोर्ट में इस मामले को उठाने के बाद प्रशासन कोई विपरीत कार्रवाई न करे, इस संबंध में भी प्रतिवादियों को निर्देश जारी किए जाएं।