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चंडीगढ़ : पानी के दाम घटाने पर निगम को हर साल 47 करोड़ का घाटा, दोबारा भेजे प्रस्ताव पर आयुक्त ने फिर उठाई आपत्ति
Mon, 15 Mar 2021 12:37 PM IST
निवेदिता वर्मा
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 15 Mar 2021 12:37 PM IST
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पानी
- फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ नगर निगम सदन में पास नए पानी के दामों से निगम को हर साल लगभग 47 करोड़ रुपये का घाटा होगा। अधिकारियों ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेजने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। हालांकि निगम आयुक्त केके यादव ने इस बार भी सदन के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए टिप्पणी की है। इससे पहले भी आयुक्त की आपत्ति पर ही प्रशासन ने पानी के दाम घटाने वाला प्रस्ताव निगम को वापस लौटा दिया था।
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9 मार्च को हुई सदन की बैठक में पानी के दामों को घटाने के लिए प्रस्ताव लाया गया था। इसमें पानी की घरेलू दरों की दो श्रेणियों में बदलाव के साथ ही सीवर सेस 30 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत का प्रस्ताव पास किया गया था। इस पर निगम आयुक्त केके यादव ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि इससे पहले जब पानी की दरों में बदलाव करना था तो केवल एक श्रेणी को बदलने का प्रस्ताव था। सीवर सेस 5 प्रतिशत कर देना तो कहीं से भी ठीक नहीं है। नई दरों के अनुसार, निगम को लगभग 47 करोड़ का घाटा हो रहा है।
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ज्ञात हो कि फरवरी 2020 में सदन ने बढ़े हुए पानी की दरों का प्रस्ताव पास कर दिया था। उसके बाद भाजपा इन दरों में बदलाव के लिए नया प्रस्ताव लेकर आई थी। इस प्रस्ताव में हो रहे घाटे को देखते हुए निगम आयुक्त ने मिनट्स में आपत्ति जताई थी। प्रशासन ने सदन से पूछा था कि नए दामों के बाद जो निगम को घाटा होगा वह कैसे पूरा करेंगे। उसके बाद सदन में इस मुद्दे पर बहस हुई थी। ज्ञात हो कि निगम अभी पानी की आपूर्ति पर 245 करोड़ रुपये खर्च करता है जबकि इस साल केवल 157 करोड़ का राजस्व रखा है। इस हिसाब से निगम पहले ही 88 करोड़ के घाटे में है। निगम के अधिकारी आयुक्त के छुट्टी से वापस लौटते ही यह रिपोर्ट प्रशासन को भेजेंगे। इस प्रस्ताव में कोई संशोधन होना होगा तो वह भी आयुक्त आकर करेंगे।
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इस तरह समझिए घाटे का गणित
वर्तमान में दाम
वर्तमान में दाम
- शून्य से 15 किलोलीटर - 3 रुपये
- 16 से 30 किलोलीटर - 6 रुपये
- 31 से 60 किलोलीटर - 12 रुपये
- 60 से ऊपर किलोलीटर - 24 रुपये
- सीवर सेस - 30 प्रतिशत
- निगम का राजस्व - 157 करोड़
- शून्य से 15 किलोलीटर - 3 रुपये
- 16 से 30 किलोलीटर - 6 रुपये
- 31 से 60 किलोलीटर - 9 रुपये
- 60 से ऊपर किलोलीटर - 16 रुपये
- सीवर सेस - 05 प्रतिशत
- निगम का राजस्व - 110 करोड़
- घाटा - 47 करोड़
सीवर सेस 30 प्रतिशत रखा जाए तब
आयुक्त का कहना है कि पहले प्रस्ताव की तरह केवल 31 से 60 किलोलीटर वाली श्रेणी को 9 रुपये किया जाता है तो निगम को 11 करोड़ का घाटा होगा। इस घाटे को दिन की आपूर्ति बंद करके पूरा कर सकते हैं क्योंकि लोगों को इसकी ज्यादा जरूरत नहीं है। वहीं इस व्यवस्था पर 13 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होते हैं।
- निगम का राजस्व - 135.85 करोड़
- घाटा लगभग - 21 करोड़
- शून्य से 15 किलोलीटर- 3 रुपये
- 16 से 30 किलोलीटर - 6 रुपये
- 31 से 60 किलोलीटर - 09 रुपये
- 60 से ऊपर किलोलीटर - 24 रुपये
- सीवर सेस - 30 प्रतिशत
- निगम का राजस्व - 145 करोड़
- घाटा - 11 करोड़
आयुक्त का कहना है कि पहले प्रस्ताव की तरह केवल 31 से 60 किलोलीटर वाली श्रेणी को 9 रुपये किया जाता है तो निगम को 11 करोड़ का घाटा होगा। इस घाटे को दिन की आपूर्ति बंद करके पूरा कर सकते हैं क्योंकि लोगों को इसकी ज्यादा जरूरत नहीं है। वहीं इस व्यवस्था पर 13 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होते हैं।
सदन की प्रस्ताव के बाद निगम ने पानी की आपूर्ति की गणना कर ली गई है। अधिकारियों को एक बार सभी तथ्य जांचने को कहा है। एक सप्ताह के अवकाश के बाद लौटने पर निगम का प्रस्ताव प्रशासन को भेज देंगे। हमारे अनुसार इसमें निगम को बहुत ज्यादा घाटा होगा। -केके यादव, निगम आयुक्त