कोरोना को न्योता: चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में पैर रखने की भी जगह नहीं, हवा हो रहे कोरोना के नियम
तीसरी लहर की आशंका के चलते अस्पताल प्रशासन ओपीडी के गिने-चुने मरीजों को ही परामर्श मुहैया करवा रहा है लेकिन इमरजेंसी में सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
वहीं मरीजों के परिजनों का कहना है कि अगर वह नियमों की बात करेंगे तो उनके मरीज को इलाज नहीं मिल पाएगा।
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विस्तार
चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की इमरजेंसी में जिस तरह मरीजों का इलाज हो रहा है, वह कोरोना की तीसरी लहर के लिए पूरी तरह मुफीद है। इमरजेंसी की गैलरी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों के बीच शारीरिक दूरी तो छोड़िए हाथ-पैर हिलाने तक की भी जगह नहीं बची है। मरीजों के स्ट्रेचर एक-दूसरे से सटाकर लगाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ अस्पताल प्रशासन तीसरी लहर की आशंका के चलते ओपीडी के गिने-चुने मरीजों को परामर्श मुहैया करा रहा है। वहीं अस्पताल में ही संक्रमण से बचाव के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि अगर वह कोरोना से बचाव के नियमों की बात करेंगे तो उनके मरीज को इलाज नहीं मिल पाएगा। वहीं, अस्पताल प्रशासन रेफर मरीजों के दबाव का हवाला देकर गलती सुधारने के बजाय खुद की पीठ थपथपाने की कोशिश कर रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों के साथ ही वहां ड्यूटी कर रहे डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमण के खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं।
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जिनको है फिक्र, वह किनारे हो गए
अस्पताल की इमरजेंसी में कुछ ऐसे मरीज भी मिले, जिन्होंने अपने स्ट्रेचर को भीड़ से अलग एक किनारे लगा रखा है। उन्हें स्टैंड की बजाय दीवार पर लगाए गए कील के सहारे ड्रिप चढ़ाई जा रही है। पूछने पर तीमारदारों ने बताया कि एक तो पहले से ही बीमारी से जूझ रहे हैं, अब इलाज के नाम पर भीड़ में रहकर बीमार नहीं होना है। इसलिए एक किनारे अपने मरीज को भर्ती कर रखा है।
संक्रमण से बीमारियों का खतरा
चिकित्सकीय उपकरण, मरीज के खांसने-छींकने, मानव संपर्क, दूषित वस्तुओं को छूने, गंदे बिस्तर, ज्यादा समय तक लगे कैथेटर से संक्रमण फैल सकता है। इससे दस्त, निमोनिया और अन्य घातक बीमारियों का खतरा हो सकता है।
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क्या कहते हैं मानक
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, हॉस्पिटल के वार्ड में भर्ती मरीजों के बेड कम से कम एक-दूसरे से 6 फुट की दूरी पर होने चाहिए। इससे एक-दूसरे से अन्य संक्रमण का खतरा नहीं रहता।
अस्पताल में रेफर मरीजों का दबाव बहुत ज्यादा है। गंभीर मरीजों को बिना इलाज वापस भी नहीं किया जा सकता। बेड कम होने पर उन्हें स्ट्रेचर पर भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। वार्ड में तो मानकों का पालन पूरी तरह किया जा रहा है लेकिन गैलरी में परिजन अपने हिसाब से अपने मरीजों को रखते हैं। इस अव्यवस्था में सुधार का प्रयास किया जाएगा ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। - डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच-32