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डॉ. संजय ने कहा: चंडीगढ़ बना सिटी ऑफ डायबिटीज, 10 साल में पांच गुना मरीज बढ़े

Sun, 14 Nov 2021 12:36 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 14 Nov 2021 12:36 AM IST
सार

फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के वस्कुर्लर सर्जरी के निदेशक डॉ. रावल जिंदल ने प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में बताया कि भारत में डायबिटिक फुट एक बड़ी समस्या है और लगभग 10-18 प्रतिशत मधुमेह रोगी इस बीमारी से पीड़ित हैं। जब मधुमेह अनियंत्रित होता है तो यह मधुमेह मरीज के पैर, अंधापन, अंग विच्छेदन, हृदय रोग, गुर्दे की विफलता और यहां तक कि जल्दी मृत्यु जैसी जटिलताओं का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि लोगों को संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। नियमित फिटनेस आहार का पालन करना चाहिए। वजन नियंत्रण जरूरी है। तंबाकू से संबंधित उत्पादों से दूर रहना है।

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Chandigarh became the city of diabetes patients increased five times in 10 years says Dr. Sanjay
जानकारी देते डॉ. संजय भडाडा, डॉ सोनू गोयल व अन्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैसे तो दुनियाभर में शुगर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ सिटी ऑफ डायबिटीज बन गया है। यहां 10 साल में ही पांच गुना डायबिटीज के मरीज बढ़ गए। डायबिटीज का प्रसार वर्ष 2010 में सिर्फ दो फीसदी से बढ़कर वर्ष 2020 में 8 से 10 फीसदी तक पहुंच गया है। यह बात पीजीआई के प्रसिद्ध एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. संजय भडाडा ने ‘विश्व मधुमेह दिवस’ के उपलक्ष्य में एक पैनल चर्चा में कही।

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75 फीसदी वयस्क डायबिटीज के साथ हाई बीपी के शिकार
पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की ओर से आयोजित इस चर्चा में डॉ. संजय ने बताया कि डायबिटीज मेलिटस और हाइपरटेंशन दो साइलेंट किलर हैं और सीवीडी (हृदय रोग) के लिए सबसे आम जोखिम कारक हैं। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप और डायबिटीज (मधुमेह) के जोखिम को कम करने के लिए एक साथ काम करने की जरूरत है।
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डॉ. भडाडा ने न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के निष्कर्षों को सामने रखते हुए कहा कि टाइप- 2 डायबिटीज मेलिटस के सामान्य रक्तचाप वाले व्यक्तियों की तुलना में उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों में विकसित होने की लगभग 2.5 गुना अधिक संभावना है। इससे डायबिटीज मेलिटस और हाई ब्लडप्रेशर के बीच एक सहयोगी तालमेल और बायडायरेक्शनल रोगजनक संबंधों का संकेत मिलता है। डायबिटीज मेलिटस वाले 75 प्रतिशत भारतीय वयस्कों में भी हाई ब्लडप्रेशर मिल रहा है।

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डॉ. सोनू गोयल बोले- फैट्स, नमक और चीनी वाले उत्पादों की पहचान होनी जरूरी

मुख्य आयोजक प्रो. डॉ. सोनू गोयल ने कहा कि यह चिंताजनक है कि सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के अनुसार डायबिटीज मेलिटस से प्रभावित 75 प्रतिशत भारतीय बालिग हाई ब्लडप्रेशर का भी शिकार हैं। उन्होंने पंजाब राज्य में क्षमता निर्माण, मीडिया और संचार और हितधारकों के जुड़ाव के माध्यम से उच्च रक्तचाप सेवाओं के प्रबंधन को मजबूत करने वाली परियोजना का संक्षिप्त विवरण भी दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को उन खाद्य पदार्थों को पहचाने के महत्व को समझने की जरूरत है, जिनमें फैट्स, नमक और चीनी (एचएफएसएस) की मा़त्रा काफी अधिक है।

भारत सरकार को भी एचएफएसएस खाद्य पदार्थों की आसान पहचान को बढ़ावा देने के लिए फ्रंट ऑफ पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) नीति को प्रभावी और तेजी से लागू करना चाहिए। इस दौरान डॉ. श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि टाइप- 2 डायबिटीज मेलिटस (टी2डी) के रोगियों में हाई ब्लड प्रेशर की रीडिंग एक आम खोज है। डायबिटीज व्यक्तियों में हाई ब्लडप्रेशर का बढ़ना न केवल उपचार रणनीति को जटिल बनाता है और हेल्थकेयर की लागत को भी बढ़ाता है।

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