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चंडीगढ़: बजट में छात्रवृत्ति के लिए 4.17 करोड़ मिले, खर्च किए सिर्फ 8 लाख, वित्त वर्ष 2021-22 के छह माह हुए पूरे
Sun, 03 Oct 2021 03:54 PM IST
Trainee Trainee
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 03 Oct 2021 03:54 PM IST
सार
आम बजट में चंडीगढ़ को इस वित्तीय वर्ष में 48 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ 5186.14 करोड़ रुपये मिले हैं। जिसमें से 30 सितंबर 2021 तक 2344.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। रेवेन्यू हेड के तहत मिले 4567.69 करोड़ में से 2207.44 करोड़ और कैपिटल हेड के तहत मिले 618.45 करोड़ में से 136 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। प्रशासन ने सबसे कम आठ लाख रुपये छात्रवृत्ति पर खर्चे हैं।
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बजट
- फोटो : pixabay
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विस्तार
वित्त वर्ष 2021-22 के छह महीने पूरे हो चुके हैं। यूटी प्रशासन इन छह महीनों में बजट का 45 फीसदी पैसा ही खर्च कर पाया है। चंडीगढ़ को कैपिटल और रेवेन्यू हेड के तहत वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कुल 5186.14 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से 30 सितंबर 2021 तक 2344.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
रेवेन्यू हेड के तहत मिले 4567.69 करोड़ में से 2207.44 करोड़ और कैपिटल हेड के तहत मिले 618.45 करोड़ में से 136 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। प्रशासन ने सबसे कम आठ लाख रुपये छात्रवृत्ति पर खर्चे हैं।
आम बजट में चंडीगढ़ को इस वित्तीय वर्ष में 48 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ 5186.14 करोड़ रुपये मिले हैं। बजट में सबसे ज्यादा तनख्वाह, भत्ता, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) और ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) के लिए कुल 3150.82 करोड़ रुपये मिले थे। प्रशासन ने इसमें से 1555.28 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। प्रशासन ने वेतन के बजट का 52.59 फीसदी, भत्ते का 44.55 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) का 45.36 फीसदी, सप्लाई व मैटीरियल का 51.71 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) का 43 फीसदी खर्च किया है।
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वहीं, ऑफिस के खर्चे के नाम पर 108.71 करोड़ में से 41.10 करोड़ रुपये, विज्ञापन और पब्लिसिटी के नाम पर 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन छात्रवृत्ति पर महज आठ लाख रुपये ही खर्चे गए हैं, जबकि इसके लिए केंद्र से 4.17 करोड़ रुपये मिले हैं। कैपिटल बजट में मोटर वाहन के लिए मिले 27.56 करोड़ में से सिर्फ दो लाख रुपये खर्च किए गए हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशासन ने कोरोना के दौरान नई गाड़ियों की खरीद पर प्रतिबंध लगा रखा था। यह सभी खर्चे 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2021 तक के हैं।
यह भी पढ़ें: आजादी का अमृत महोत्सव: नगर निगम ने 7.5 किमी तक आयोजित की साइकिल रैली, राज्यपाल बनवारी लाल ने दिखाई हरी झंडी
घरेलू यात्रा पर 50 लाख खर्चे, विदेश यात्रा के बजट में से एक रुपया भी नहीं हुआ खर्च
कोरोना वायरस की वजह से कई महीनों तक यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहा। कुछ समय बाद केंद्र सरकार ने अनुमति के आधार पर यात्राओं की मंजूरी दे दी थी लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते इस साल विदेश यात्रा के लिए मिले 80 लाख रुपये के बजट में से एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा सका।
वहीं, घरेलू यात्रा के 3.04 करोड़ के बजट में से 50 लाख खर्च हुए हैं। यह 16.32 फीसदी है। सीक्रेट सर्विस के नाम पर 66 लाख, प्रोफेशनल सर्विस के लिए 6.18 करोड़, माइनर वर्क के नाम पर 33.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
बजट खर्च के लिए लगी रोक हटी, अगले दो तिमाही में होगा लाभ
कोरोना की वजह से केंद्र सरकार ने बजट पर 20 फीसदी का कट लगाया था, जिसे अब हटा दिया गया है। इसका लाभ यूटी प्रशासन ने अगले दो तिमाही में मिलेगा। प्रशासन अतिरिक्त बजट का इस्तेमाल नई परियोजनाओं व पुरानी रुकी हुई परियोजनाओं को शुरू करने में करेगा। पिछले साल सभी चार तिमाही में बजट कटौती की यह रोक लागू थे। इस साल भी पहले दोनों तिमाही अप्रैल से जून और जुलाई से सितंबर तक पांच फीसदी बजट नहीं खर्च करने के आदेश वित्त मंत्रालय की तरफ से दिए गए थे।
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रेवेन्यू हेड के तहत मिले 4567.69 करोड़ में से 2207.44 करोड़ और कैपिटल हेड के तहत मिले 618.45 करोड़ में से 136 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। प्रशासन ने सबसे कम आठ लाख रुपये छात्रवृत्ति पर खर्चे हैं।
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आम बजट में चंडीगढ़ को इस वित्तीय वर्ष में 48 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ 5186.14 करोड़ रुपये मिले हैं। बजट में सबसे ज्यादा तनख्वाह, भत्ता, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) और ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) के लिए कुल 3150.82 करोड़ रुपये मिले थे। प्रशासन ने इसमें से 1555.28 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। प्रशासन ने वेतन के बजट का 52.59 फीसदी, भत्ते का 44.55 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) का 45.36 फीसदी, सप्लाई व मैटीरियल का 51.71 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) का 43 फीसदी खर्च किया है।
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वहीं, ऑफिस के खर्चे के नाम पर 108.71 करोड़ में से 41.10 करोड़ रुपये, विज्ञापन और पब्लिसिटी के नाम पर 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन छात्रवृत्ति पर महज आठ लाख रुपये ही खर्चे गए हैं, जबकि इसके लिए केंद्र से 4.17 करोड़ रुपये मिले हैं। कैपिटल बजट में मोटर वाहन के लिए मिले 27.56 करोड़ में से सिर्फ दो लाख रुपये खर्च किए गए हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशासन ने कोरोना के दौरान नई गाड़ियों की खरीद पर प्रतिबंध लगा रखा था। यह सभी खर्चे 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2021 तक के हैं।
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घरेलू यात्रा पर 50 लाख खर्चे, विदेश यात्रा के बजट में से एक रुपया भी नहीं हुआ खर्च
कोरोना वायरस की वजह से कई महीनों तक यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहा। कुछ समय बाद केंद्र सरकार ने अनुमति के आधार पर यात्राओं की मंजूरी दे दी थी लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते इस साल विदेश यात्रा के लिए मिले 80 लाख रुपये के बजट में से एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा सका।
वहीं, घरेलू यात्रा के 3.04 करोड़ के बजट में से 50 लाख खर्च हुए हैं। यह 16.32 फीसदी है। सीक्रेट सर्विस के नाम पर 66 लाख, प्रोफेशनल सर्विस के लिए 6.18 करोड़, माइनर वर्क के नाम पर 33.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
बजट खर्च के लिए लगी रोक हटी, अगले दो तिमाही में होगा लाभ
कोरोना की वजह से केंद्र सरकार ने बजट पर 20 फीसदी का कट लगाया था, जिसे अब हटा दिया गया है। इसका लाभ यूटी प्रशासन ने अगले दो तिमाही में मिलेगा। प्रशासन अतिरिक्त बजट का इस्तेमाल नई परियोजनाओं व पुरानी रुकी हुई परियोजनाओं को शुरू करने में करेगा। पिछले साल सभी चार तिमाही में बजट कटौती की यह रोक लागू थे। इस साल भी पहले दोनों तिमाही अप्रैल से जून और जुलाई से सितंबर तक पांच फीसदी बजट नहीं खर्च करने के आदेश वित्त मंत्रालय की तरफ से दिए गए थे।