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सीनेट फैकल्टी वर्ग के चुनाव को चासंलर ने किया खारिज, अब दोबारा होंगे
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट फैकल्टी वर्ग के 1 सितंबर 2021 को हुए चुनाव को चांसलर एवं उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया है। चांसलर दफ्तर की ओर से पत्र के माध्यम से पीयू को सूचना दी गई है कि फैकल्टी वर्ग के चुनाव दोबारा करवाए जाएं। हालांकि फैकल्टी वर्ग की 6 सीटों पर चुनाव जीतने वाले गोयल ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि अभी तक उन्हें चांसलर दफ्तर की ओर से कोई सूचना नहीं मिली है।
पत्र में लिखा गया है कि पांच सदस्यों की ओर से मिली शिकायत के बाद जांच की गई है। फैकल्टी की 6 सीटों पर 24 अगस्त 2020 को चुनाव करवाए जाने थे। कोरोना महामारी के कारण चुनाव रद्द हुए और 1 सितंबर 2021 को आयोजित करवाए गए। 20 सितंबर 2021 को विजय के चोपड़ा की ओर से चुनाव में अनियमितताओं को लेकर शिकायत दी गई। इसके बाद चार सदस्यों डॉ. अंजू सूरी, डॉ. गुरपाल सिंह और डॉ. प्रियतोश शर्मा की ओर से चुनाव में गड़बड़ी को लेकर याचिका दी गई। इसमें कहा गया कि चुनाव को पीयू एक्ट के तहत नहीं करवाया गया है। इसमें कई ऐसे लोगों ने वोट डाला जो योग्य नहीं थे और कोई योग्य वोटर्स को वोटर सूची में शामिल नहीं किया और वोट नहीं डालने दिया गया। फैकल्टी की नोटिफिकेशन नहीं होने के कारण गोयल ग्रुप ने इसे हाईकोर्ट में चैलेंज किया था। इसके बाद कोर्ट ने पीयू को इस पर जवाब देने को कहा था। पूरे मामले की जांच के बाद चांसलर ने सितंबर में चुनाव को खारिज करने का फैसला देते हुए पीयू रेगुलेशन के तहत चुनाव को दोबारा करवाने का निर्देश दिया है।
कोट्स
वोटर होने के बाद भी सूची में नहीं था नाम
विभागाध्यक्ष होने के नाते में फैकल्टी चुनाव में वोटर था, लेकिन मेरा नाम वोटर सूची में नहीं शामिल किया गया। फैकल्टी के चुनाव पीयू एक्ट के तहत नहीं करवाए गए थे। इसमें नियमों की अवहेलना की गई थी। इस पर चांसलर दफ्तर को याचिका डाली थी। नोटिफिकेशन रद्द होने की सूचना मिली है, लेकिन अभी पत्र पढ़ा नहीं है। - डॉ प्रियतोश शर्मा, अध्यक्ष, इतिहास विभाग
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मीडिया के जरिए मिल रही जानकारी
फैकल्टी चुनाव की नोटिफिकेशन खारिज होने की सूचना मीडिया के जरिए मिल रही है। चांसलर दफ्तर की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है, यह प्रशासनिक चूक है। - डॉ. केशव मल्होत्रा, फैकल्टी वर्ग से विजेता सीनेटर
प्रभावित लोगों को नहीं दी सूचना
चांसलर दफ्तर की ओर से प्रभावित लोगों को सूचना देने की बजाय मीडिया को सूचना दी गई है। यह सूचना चांसलर दफ्तर की ओर से नहीं व्यक्ति विशेष की तरफ से फैलाई जा रही है। लोकतांत्रिक इंस्टीट्यूट का इस तरीके से राजनीतिक हितों के लिए काम करना निदंनीय है। - अशोक गोयल, वर्ष 1992 से सीनेटर और फैकल्टी वर्ग में विजेता
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पत्र में लिखा गया है कि पांच सदस्यों की ओर से मिली शिकायत के बाद जांच की गई है। फैकल्टी की 6 सीटों पर 24 अगस्त 2020 को चुनाव करवाए जाने थे। कोरोना महामारी के कारण चुनाव रद्द हुए और 1 सितंबर 2021 को आयोजित करवाए गए। 20 सितंबर 2021 को विजय के चोपड़ा की ओर से चुनाव में अनियमितताओं को लेकर शिकायत दी गई। इसके बाद चार सदस्यों डॉ. अंजू सूरी, डॉ. गुरपाल सिंह और डॉ. प्रियतोश शर्मा की ओर से चुनाव में गड़बड़ी को लेकर याचिका दी गई। इसमें कहा गया कि चुनाव को पीयू एक्ट के तहत नहीं करवाया गया है। इसमें कई ऐसे लोगों ने वोट डाला जो योग्य नहीं थे और कोई योग्य वोटर्स को वोटर सूची में शामिल नहीं किया और वोट नहीं डालने दिया गया। फैकल्टी की नोटिफिकेशन नहीं होने के कारण गोयल ग्रुप ने इसे हाईकोर्ट में चैलेंज किया था। इसके बाद कोर्ट ने पीयू को इस पर जवाब देने को कहा था। पूरे मामले की जांच के बाद चांसलर ने सितंबर में चुनाव को खारिज करने का फैसला देते हुए पीयू रेगुलेशन के तहत चुनाव को दोबारा करवाने का निर्देश दिया है।
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वोटर होने के बाद भी सूची में नहीं था नाम
विभागाध्यक्ष होने के नाते में फैकल्टी चुनाव में वोटर था, लेकिन मेरा नाम वोटर सूची में नहीं शामिल किया गया। फैकल्टी के चुनाव पीयू एक्ट के तहत नहीं करवाए गए थे। इसमें नियमों की अवहेलना की गई थी। इस पर चांसलर दफ्तर को याचिका डाली थी। नोटिफिकेशन रद्द होने की सूचना मिली है, लेकिन अभी पत्र पढ़ा नहीं है। - डॉ प्रियतोश शर्मा, अध्यक्ष, इतिहास विभाग
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मीडिया के जरिए मिल रही जानकारी
फैकल्टी चुनाव की नोटिफिकेशन खारिज होने की सूचना मीडिया के जरिए मिल रही है। चांसलर दफ्तर की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है, यह प्रशासनिक चूक है। - डॉ. केशव मल्होत्रा, फैकल्टी वर्ग से विजेता सीनेटर
प्रभावित लोगों को नहीं दी सूचना
चांसलर दफ्तर की ओर से प्रभावित लोगों को सूचना देने की बजाय मीडिया को सूचना दी गई है। यह सूचना चांसलर दफ्तर की ओर से नहीं व्यक्ति विशेष की तरफ से फैलाई जा रही है। लोकतांत्रिक इंस्टीट्यूट का इस तरीके से राजनीतिक हितों के लिए काम करना निदंनीय है। - अशोक गोयल, वर्ष 1992 से सीनेटर और फैकल्टी वर्ग में विजेता