चंडीगढ़ के कारोबारियों को झटकाः लीज होल्ड से फ्री होल्ड को केंद्र ने किया मना, SC में हलफनामा दायर
चंडीगढ़ में 6,621 कॉमर्शियल प्लॉट्स और 1,451 इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के अलावा 500 प्लॉट्स शैक्षिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और संस्थागत निकायों को आवंटित हैं। प्रशासन ने 12 जुलाई को गृह मंत्रालय को रिमाइंडर भेजकर मांग की थी कि प्रॉपर्टी को लीज से फ्री होल्ड करने की सैद्धांतिक मंजूरी जल्द जारी की जाए।
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चंडीगढ़ के व्यापारियों और उद्योगपतियों को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल प्लॉट्स को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने से इन्कार कर दिया है। केंद्र के इस फैसले से पिछले कई वर्षों से फ्री होल्ड की आस में बैठे हजारों व्यापारियों और उद्योगपतियों की उम्मीद टूट गई है।
पिछले तीन दशकों से शहर की इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल प्लॉट्स को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने का मामला अटका हुआ है, जिसके चलते शहर का व्यापारी वर्ग काफी प्रभावित है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। इसी दौरान गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव राकेश सिंह की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि चंडीगढ़ में इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल प्लॉट्स को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में बदलने के संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन से प्राप्त प्रस्ताव की मंत्रालय में विस्तार से जांच की गई है और इस पर सहमति नहीं बनी है। इसमें यह भी कहा गया है कि चंडीगढ़ में भवन उल्लंघन और परिसर के दुरुपयोग के मामलों में लगाए जाने वाले जुर्माने में संशोधन के लिए प्राप्त प्रस्ताव कानूनी मामलों के विभाग के परामर्श से जांच के अधीन है।
केंद्र के इस जवाब से ही सभी हैरान हैं। व्यापारियों और उद्योगपतियों को उम्मीद थी कि जल्द मंजूरी मिलने वाली है लेकिन अचानक उल्टा हो गया क्योंकि पिछले साल प्रशासन के अधिकारियों ने काफी सक्रियता दिखाई थी।
चंडीगढ़ को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा हैः सीसीआई
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि गृह मंत्रालय की यह कार्रवाई चौंकाने वाली है। प्रशासन और गृह मंत्रालय दोनों ही चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में बदलने के पक्ष में थे। उन्हें आखिरी बार बताया गया था कि गृह मंत्रालय कन्वर्जन रेट के फॉर्मूला पर काम कर रहा है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। अगर सभी राज्य और यहां तक कि दिल्ली सरकार भी इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में बदलने की नीति लेकर आ चुकी है तो फिर चंडीगढ़ को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। मंत्रालय के इस फैसले से मुकदमेबाजी बढ़ेगी।
उद्योग व्यापार मंडल की मांग- प्रशासन दोबारा भेजे प्रस्ताव
उद्योग व्यापार मंडल चंडीगढ़ के अध्यक्ष कैलाश चंद जैन ने कहा कि प्रशासन की तरफ से गृह मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव विस्तृत और ठीक नहीं था इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया गया। प्रशासन इस बारे में दोबारा विचार कर नए सिरे से प्रस्ताव भेजे। जैन ने कहा कि जब रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी लीज होल्ड से फ्री होल्ड हो सकती है तो कॉमर्शियल या इंडस्ट्रियल क्यों नहीं। दिल्ली में फ्री होल्ड हो सकती है तो चंडीगढ़ में क्यों नहीं। कहा कि प्रशासन के प्रस्ताव में पूरी जानकारी नहीं थी। फ्री होल्ड की मांग शहरवासियों की बहुत जरूरी मांग है, इसे हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।