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Chandigarh News: हमेशा ऊंचा लक्ष्य की सीख छोड़ गए कार्वर सर
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चंडीगढ़। शिक्षा को अनुशासन, संस्कार, मानवीय मूल्यों और सर्वांगीण विकास से जोड़ने वाले सेंट स्टीफेंस स्कूल चंडीगढ़ के संस्थापक निदेशक और प्रख्यात शिक्षाविद् हैरोल्ड कार्वर (80) का निधन हो गया। स्कूल का स्लोगन ‘सेम्पर सुर्सम’ (हमेशा ऊंचा लक्ष्य बनाएं) उनकी शिक्षा की सोच की पहचान रहा। कई बीमारियों के बावजूद वह शिक्षक दिवस पर स्कूल पहुंचे और सभी शिक्षकों को बुलाकर उन्हें बधाई दी। रात में सोते समय अचानक हुए निधन की खबर से स्कूल परिवार स्तब्ध रह गया।
पायलट बनने का सपना पूरा नहीं हुआ तो कार्वर शिक्षा के क्षेत्र में आए। उन्होंने 12 अप्रैल 1982 को सेक्टर-8 में महज सात कमरों से सेंट स्टीफेंस स्कूल की शुरुआत की। बाद में स्कूल का स्थायी परिसर सेक्टर-45 में बना। उन्होंने विद्यार्थियों में अनुशासन, ईमानदारी, आत्मविश्वास, मानवता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। आर्थिक रूप से कमजोर और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर देने के लिए भी प्रयास किए।
सम्मानों से भरा रहा सफर
कार्वर को हेनरी डेरोजियो अवार्ड फॉर एक्सेम्प्लरी सर्विस टू स्कूल एजुकेशन एंड ह्यूमन एनरिचमेंट से सम्मानित किया गया। 2007 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और 2008 में भारत के राष्ट्रपति से राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके अलावा फर्स्ट फ्राइडे फोरम अवार्ड, बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड और तारा चंद साबू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड समेत कई सम्मान मिले।
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फुटबॉल को भी बनाया पहचान
उन्होंने 1998 में सेंट स्टीफेंस फुटबॉल अकादमी शुरू की, जिसने विभिन्न आयु वर्गों में भारतीय फुटबॉल के लिए कई खिलाड़ी तैयार किए। विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के बीच वह केवल संस्थापक या प्रिंसिपल नहीं, बल्कि ‘कार्वर सर’ के नाम से मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत रहे।
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पायलट बनने का सपना पूरा नहीं हुआ तो कार्वर शिक्षा के क्षेत्र में आए। उन्होंने 12 अप्रैल 1982 को सेक्टर-8 में महज सात कमरों से सेंट स्टीफेंस स्कूल की शुरुआत की। बाद में स्कूल का स्थायी परिसर सेक्टर-45 में बना। उन्होंने विद्यार्थियों में अनुशासन, ईमानदारी, आत्मविश्वास, मानवता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। आर्थिक रूप से कमजोर और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर देने के लिए भी प्रयास किए।
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सम्मानों से भरा रहा सफर
कार्वर को हेनरी डेरोजियो अवार्ड फॉर एक्सेम्प्लरी सर्विस टू स्कूल एजुकेशन एंड ह्यूमन एनरिचमेंट से सम्मानित किया गया। 2007 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और 2008 में भारत के राष्ट्रपति से राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके अलावा फर्स्ट फ्राइडे फोरम अवार्ड, बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड और तारा चंद साबू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड समेत कई सम्मान मिले।
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फुटबॉल को भी बनाया पहचान
उन्होंने 1998 में सेंट स्टीफेंस फुटबॉल अकादमी शुरू की, जिसने विभिन्न आयु वर्गों में भारतीय फुटबॉल के लिए कई खिलाड़ी तैयार किए। विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के बीच वह केवल संस्थापक या प्रिंसिपल नहीं, बल्कि ‘कार्वर सर’ के नाम से मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत रहे।